एक महीने में हल्दी के वायदा भाव करीब 25 फीसदी बढ़ गए हैं।
हल्दी की कीमतों में आ रही भारी तेजी को देखने कमोडिटी एक्सचेंज नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (NCDEX) ने इसके कारोबार पर अतिरिक्त मार्जिन लगा दिया है। बीते एक माह के दौरान हल्दी के भाव करीब 25 फीसदी बढ़ चुके हैं। कमोडिटी एक्सपर्ट के मुताबिक मार्जिन लगने से कुछ समय के लिए खरीदार हल्दी के वायदा कारोबार से दूरी बना सकते हैं। साथ ही मुनाफावसूली के कारण इसकी कीमतों में गिरावट आ सकती है। फंडामेंटल मजबूत होने से लॉन्ग टर्म में हल्दी में तेजी की संभावना है।
एनसीडीईएक्स ने हल्दी के वायदा और ऑप्शंस कारोबार में 2.5% अतिरिक्त मार्जिन लगाने का फैसला किया है। यह अतिरिक्त मार्जिन 15 जुलाई 2026 से लागू हो गया है। साथ ही यह हल्दी के अगस्त 2026, अक्टूबर 2026 और दिसंबर 2026 एक्सपायरी वाले सभी कॉन्ट्रैक्ट्स पर लागू होगा।
कमोडिटी एक्सपर्ट और एग्रोकॉर्प इंटरनेशनल के रिसर्च हेड इंद्रजीत पॉल का कहना है कि एनसीडीईएक्स का 2.5% अतिरिक्त मार्जिन लगाने का फैसला बाजार में बढ़ते उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने और जोखिम कम करने के लिए है। शॉर्ट टर्म में हल्दी की नई खरीदारी कुछ कमजोर पड़ सकती है क्योंकि निवेशकों को अधिक मार्जिन देना होगा।
कमोडिटी एक्सपर्ट अनुज गुप्ता ने कहा कि मार्जिन बढ़ने से बाजार में कुछ पोजीशन का लिक्विडेशन हो सकता है और कारोबारी प्रॉफिट बुकिंग कर सकते हैं। इससे शॉर्ट टर्म में हल्दी की कीमतों पर दबाव देखने को मिल सकता है।
मार्जिन लगने से बुधवार (15 जुलाई) को हल्दी कीमतों में गिरावट देखने को मिली। खबर लिखे जाने के समय हल्दी का अगस्त कॉन्ट्रेक्ट करीब एक फीसदी की गिरावट के साथ 20,500 रुपये प्रति क्विंटल के भाव पर कारोबार कर रहा था। हालांकि बुधवार को ही इस कॉन्ट्रैक्ट ने कारोबार की शुरुआत में 21,400 रुपये क्विंटल के भाव पर ऑल टाइम हाई बनाया था।
केडिया एडवाइजरी के निदेशक अजय केडिया ने कहा कि ऊंचे स्तर पर चल रहे हल्दी के भाव में मार्जिन लगने के बाद मुनाफावसूली देखने को मिल सकती है। जिससे इसकी कीमतों में गिरावट आ सकती है। इसके भाव एक बार 19 हजार रुपये से नीच आ सकते हैं। हालांकि फंडामेंटल मजबूत होने से भाव बाद में चढ़कर 22,500 रुपये क्विंटल तक जा सकते हैं।
पॉल ने कहा कि तकनीकी रूप से बाजार अभी भी मजबूत अपट्रेंड में है। हल्दी के कम उत्पादन की आशंका, कम कैरी-फॉरवर्ड स्टॉक, सीमित किसानों की बिक्री और मजबूत घरेलू व निर्यात मांग जैसे फंडामेंटल बाजार को समर्थन दे रहे हैं। इसलिए हल्दी हालिया गिरावट को ट्रेंड रिवर्सल नहीं, बल्कि स्पीड ब्रेकर माना जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मजबूत फंडामेंटल बने रहने पर हल्दी के दाम 22,000 रुपये क्विंटल तक बढ़ने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।