प्रतीकात्मक तस्वीर
केंद्र सरकार ने पौधों की रक्षा के लिए व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाले पैराक्वाट डाइक्लोराइड पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाने के लिए आदेश जारी कर दिया है। इस पर पिछले कई महीने से चर्चा चल रही थी। यह प्रतिबंध मानव स्वास्थ्य पर इसके प्रतिकूल असर, पॉइजनिंग की घटनाओं और किसी खास एंटीडोट की अनुपस्थिति को देखते हुए लगाया गया है।
सरकारी अधिसूचना में कहा गया है कि पौधों की रक्षा करने वाले इस खरपतवार नाशक को विभिन्न वजहों से 70 से ज्यादा देशों में प्रतिबंधित किया जा चुका है। इसमें प्रमुख वजह मनुष्यों और पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाला इसका प्रतिकूल असर है। हितधारकों से मसौदा प्रतिबंध आदेश पर 13 अगस्त तक अपनी आपत्तियां भेजने को कहा गया है।
बहरहाल उद्योग सूत्रों के अनुसार, ‘पैराक्वाट डाइक्लोराइड एक नॉन सलेक्टिव खरपतवारनाशी है। इसे कृषि और गैर कृषि क्षेत्रों में खरपतवारों और घासों को नियंत्रित करने के लिए पंजीकृत किया गया है। यह विश्व स्तर पर और भारत में आधुनिक खरपतवार प्रबंधन प्रणालियों में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है। भारत में पैराक्वाट डाइक्लोराइड (24 प्रतिशत एसएल या घुलनशील तरल) सबसे व्यापक रूप से बिकने वाला खरपतवार नाशक है। चाय, कॉफी, कपास, धान, गन्ना, मक्का, रबर, अंगूर, गेहूं और अन्य वृक्षारोपण फसलों में इसका व्यापक उपयोग किया जाता है।