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सुपर अल नीनो से बिगड़ेगा चीनी-एथेनॉल का गणित? घटती फसल और कम स्टॉक ने बढ़ाई चिंता

चीनी की उपलब्धता कम होने की स्थिति में चीनी सीजन 2026-27 के दौरान गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन को सीमित करना पड़ सकता है

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सुशील मिश्र   
Last Updated- September 07, 2026 | 2:33 PM IST

Ethanol Production: संभावित सुपर अल नीनो मौसम पैटर्न वैश्विक चीनी आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन को प्रभावित कर सकता है। अलनीनों का प्रभाव फसलों पर दिखाई दे रहा है। चालू खरीफ सीजन में गन्ना , मक्का और धान के रकबे में गिरावट देखी जा रही है। जिसका असर फसलों के उत्पादन पर पड़ेगा।

अल नीनो का प्रभाव लगातार दो साल तक पड़ने की आशंका है। चीनी की उपलब्धता कम होने की स्थिति में चीनी सीजन 2026-27 के दौरान गन्ने के रस और बी-हेवी शीरे से एथेनॉल उत्पादन को सीमित करना पड़ सकता है।

अल नीनो का उत्पादन पर कितना असर?

अल नीनो से जुड़ा सूखा और बाढ़ दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक क्षेत्रों में गन्ने के उत्पादन को प्रभावित कर सकता है और निर्यात के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा घट सकती है। गोल्डमैन सैक्स के अनुसार संभावित सुपर अल नीनो मौसम पैटर्न वैश्विक चीनी आपूर्ति और एथेनॉल उत्पादन को प्रभावित कर सकता है।

दुनिया के कुल चीनी निर्यात में ब्राजील, भारत और थाईलैंड की हिस्सेदारी करीब 70 प्रतिशत है, इसलिए इन देशों में मौसम संबंधी बदलाव का वैश्विक बाजार पर बड़ा असर पड़ सकता है। सूखे के कारण मक्के की फसल कमजोर होने पर एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने की मांग बढ़ सकती है।

हालांकि गन्ने पर भी मौसम की मार और चीनी मांग को देखते हुए बहुत ज्यादा गन्ना भी एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल करना मुश्किल होगा। जो एथेनॉल के उत्पादन को प्रभावित करेगा ।

बदलाव के दौर में एथेनॉल उद्योग

भारत का एथेनॉल उद्योग तेज़ी से बदलाव के दौर से गुजर रहा है। जहां पहले एथेनॉल उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और उससे जुड़े उत्पादों पर निर्भर था, वहीं अब अनाज आधारित कच्चे माल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है।

ऑल इंडिया डिस्टिलर्स’ एसोसिएशन (एआईडीए) के अनुसार जून 2026 के आँकड़ों के अनुसार, देश में एथेनॉल की कुल आपूर्ति का लगभग 67 प्रतिशत हिस्सा अनाज आधारित स्रोतों से आया, जबकि गन्ने आधारित स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 33 प्रतिशत रही। अनाज से लगभग 480 करोड़ लीटर और गन्ने आधारित स्रोतों से लगभग 238 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की गई।

मक्का सबसे बड़ा एथेनॉल फ़ीडस्टॉक बनकर उभरा है और इससे लगभग 258 करोड़ लीटर एथेनॉल का उत्पादन हुआ। भारतीय खाद्य निगम (एफ़सीआई) के अतिरिक्त खाद्यान्नों से 177 करोड़ लीटर, गन्ने के रस से 144 करोड़ लीटर, बी-हेवी शीरे से 82 करोड़ लीटर और क्षतिग्रस्त खाद्यान्नों से लगभग 45 करोड़ लीटर एथेनॉल तैयार किया गया।

एथेनॉल सप्लाई वर्ष 2025-26 में अब तक कुल 717 करोड़ लीटर एथेनॉल की आपूर्ति की जा चुकी है, जो 1,048 करोड़ लीटर के अनुबंधित लक्ष्य का लगभग 68 प्रतिशत है।

चीनी का स्टॉक कम

अल नीनो की स्थिति जून 2026 से मई 2027 तक बने रहने का अनुमान है। डीएएम कैपिटल (DAM Capital) एडवाइजर्स की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार बारिश की कमी से गन्ने की पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं, चीनी मिलों में पेराई जल्द शुरू होने पर चीनी की रिकवरी दर में और गिरावट आ सकती है।

2026-27 चीनी सत्र में चीनी उत्पादन करीब 2.9 करोड़ टन रहने का अनुमान लगाया है। 1 अक्टूबर 2026 को शुरू होने वाले 2026-27 चीनी सत्र की शुरुआत में चीनी का भंडार करीब 30 लाख टन रह सकता है। यह मात्रा देश की केवल लगभग 35 दिनों की खपत के लिए पर्याप्त होगी और पिछले एक दशक में सबसे कम शुरुआती स्टॉक होगी।

गोल्डमैन सैक्स के अनुसार, इससे भारत के एक प्रमुख चीनी निर्यातक से संभावित रूप से शुद्ध आयातक बनने की स्थिति पैदा हो सकती है। वर्तमान में वैश्विक चीनी निर्यात में भारत की हिस्सेदारी करीब 6 प्रतिशत है।

अनाज कीमतों में बढ़ोत्तरी

डीएएम कैपिटल के अनुसार चीनी की तंग आपूर्ति का असर एथेनॉल उत्पादन पर भी पड़ने की आशंका है। शराब उद्योग की जरूरतों सहित कुल इथेनॉल मांग करीब 14.5 अरब लीटर रहने का अनुमान लगाया है। इसमें लगभग 11.5 अरब लीटर अनाज आधारित इथेनॉल और करीब 2.9 अरब लीटर सी-हेवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल से आने की उम्मीद है।

हालांकि, मक्का और टूटे चावल पर अधिक निर्भरता से अनाज की कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है। सरकार एथेनॉल उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए FCI के अतिरिक्त चावल भंडार का इस्तेमाल कर सकती है।

10 फीसदी कम हो सकता है मक्का उत्पदान

इस खरीफ सीजन में मक्का के उत्पादन में कमी की आशंका व्यक्त की जा रही है। अमेरिकी कृषि विभाग यानी यूएसडीए (USDA) की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के 2026-27 मक्का उत्पादन का अनुमान करीब 10% घटाकर 5 करोड़ टन किया गया है।

कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 28 अगस्त तक किसानों ने करीब 89.99 लाख हेक्टेयर में मक्का बोया था। पिछले साल इसी अवधि तक यह रकबा 93.87 लाख हेक्टेयर था। यानी एक साल में मक्के की बुवाई का क्षेत्र करीब 4% घटा है ।

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2026-27 में भारत का मक्का उत्पादन करीब 5 करोड़ टन रह सकता है। इसके मुकाबले कृषि मंत्रालय के तीसरे अग्रिम अनुमान में 2025-26 के दौरान देश में मक्के का उत्पादन करीब 5.5 करोड़ टन रहने की बात कही गई थी। जबकि 2025-26 का उत्पादन 2024-25 के मुकाबले करीब 27% अधिक था।

मक्का की मांग अधिक

मक्का उत्पादन कम रहने की अनुमान के बीच मक्के की मांग अधिक रहने की संभावना जताई जा रही है। जो कीमतों को मजबूत करेगा। यूएसडीए के ताजा अनुमान के मुताबिक 2026-27 में भारत में मक्के की कुल खपत करीब 510 लाख टन रह सकती है।

पिछले साल मक्के की खपत करीब 480 मिलियन टन रहने का अनुमान था। भारत ने 2025-26 में दुनिया भर में 12.5 लाख मीट्रिक टन मक्का का निर्यात किया है, जिसका मूल्य 3,357.54 करोड़ रुपये है।

वैश्विक उत्पादन पर असर

भारत के साथ थाईलैंड और ब्राजील की गन्ने की फसल पर भी नजर बनी रहेगी। अक्टूबर 2026 से अप्रैल 2027 के बीच देश में 2027 के गन्ना उत्पादन सीजन के दौरान सूखे की स्थिति पैदा होने पर अप्रैल से अक्टूबर 2027 के बीच पेराई के लिए उपलब्ध गन्ने की मात्रा कम हो सकती है। इस बीच, ब्राजील की मक्के की फसल भी एक महत्वपूर्ण कारक बन सकती है।

जनवरी से अप्रैल 2027 के बीच सूखे से मक्का उत्पादन प्रभावित होने पर गन्ने से बनने वाले एथेनॉल की मांग बढ़ सकती है। इससे निर्यात के लिए उपलब्ध चीनी की मात्रा और कम हो सकती है। हालांकि, निकट अवधि में ब्राजील में जारी गन्ना पेराई के दौरान गन्ने में चीनी की मात्रा में सुधार चीनी की कीमतों पर दबाव डाल सकता है।

First Published : September 7, 2026 | 2:33 PM IST