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खरीफ फसलों की बुवाई पिछड़ी, धान का रकबा 3.74% और मक्का का 3.18% घटा

मानसून सीजन के दौरान रकबे में अंतर काफी कम हुआ है, लेकिन कुल खरीफ बुवाई क्षेत्र अभी भी पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है

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सुशील मिश्र   
Last Updated- September 07, 2026 | 4:46 PM IST

Kharif Crops Sowing: भारत में खरीफ फसलों की बुवाई का सीजन लगभग समाप्त हो चुका है। मानसून सीजन के दौरान रकबे में अंतर काफी कम हुआ है, लेकिन कुल खरीफ बुवाई क्षेत्र अभी भी पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम है।

ताजा आंकड़ों के अनुसार 4 सितंबर 2026 तक भारत में खरीफ की बुआई 1,086.31 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गई, जो एक साल पहले के 1,104.00 लाख हेक्टेयर से 17.69 लाख हेक्टेयर या 1.60% कम है।

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार, 4 सितंबर 2026 तक खरीफ की कुल बुआई 1,086.31 लाख हेक्टेयर रही, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 1,104.00 लाख हेक्टेयर थी। यह 17.69 लाख हेक्टेयर या 1.60% की कमी को दर्शाता है।

पूरे खरीफ सीजन का औसत रकबा 1,104.46 लाख हेक्टेयर हैं । पिछले साल खरीफ सीजन के दौरान 1,134.27 लाख हेक्टेयर में क्षेत्र में फसलों की बुवाई की गई थी।

फिसिड्डी साबित हुई धान की रोपाई

खरीफ सीजन की बुवाई सामान्य बुवाई क्षेत्र के करीब पहुंच गई, लेकिन इस सीजन की सबसे प्रमुख फसल धान की रोपाई में दूसरी फसलों की अपेक्षा कमजोर रही । धान के रकबे में 3.74% की कमी आई दर्ज की गई है।

धान की खेती का रकबा 421.82 लाख हेक्टेयर पहुंचा गया, जो पिछले साल के मुकाबले 3.74% कम है। मोटे अनाजों की स्थिति भी मिली-जुली रही। ज्वार और बाजरा में सुधार हुआ, लेकिन मक्का का रकबा 3.18% और रागी का रकबा 13.30% घट गया।

सोयाबीन का रकबा बढ़ा

तिलहन का कुल रकबा मामूली रूप से घटकर 191.99 लाख हेक्टेयर रह गया, जो पिछले साल के मुकाबले 0.56% कम है। मूंगफली का रकबा 1.65 फीसदी और सोयाबीन के रकबे में 0.94% की गिरावट आई, जबकि तिल का रकबा 15.15% बढ़ गया।

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सूरजमुखी के रकबे में 95.69% की भारी बढ़ोतरी हुई और नाइजरसीड (रामतिल) में 13.29% की वृद्धि हुई। अरंडी (कैस्टरसीड) की स्थिति कमजोर रही और इसमें 13.61% की गिरावट आई।

दलहन का रकबा बढ़ा

दालों का कुल रकबा 115.30 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 117.13 लाख हेक्टेयर हो गया, जिसमें 1.60% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। जिसका कारण अरहर और उड़द की अधिक बुआई थी। अरहर में 1.61% और उड़द में 11.95% की बढ़ोतरी हुई, जबकि मूंग में 3.05% और अन्य दालों में 13.14% की गिरावट आई।

तिलहन के रकबे में मामली कमी

कुल तिलहन रकबे में 0.56% की मामूली कमी आई; तिल और सूरजमुखी की बुआई में अच्छी बढ़त ने मूंगफली और सोयाबीन के कम रकबे की भरपाई की। कपास की बुआई में मामूली गिरावट आई। कुल मिलाकर, रकबे के मिले-जुले रुझान उत्पादन की उम्मीदों को तय कर रहे हैं और कृषि जिंसों की कीमतों को कुछ हद तक सहारा दे रहे हैं। कपास का रकबा भी 0.63% घटकर 109.17 लाख हेक्टेयर रह गया।

कम बुवाई से कीमतों को सहारा

कृषि जिंसों की कीमतों को कुछ हद तक सहारा मिलने की संभावना है क्योंकि भारत में खरीफ़ की बुआई का स्तर पिछले साल के स्तर से नीचे बना हुआ है। हालाँकि पिछली रिपोर्टों की तुलना में कुल रकबे का अंतर कम हुआ है, लेकिन धान, सोयाबीन, मूंगफली, मक्का और कपास की कम बुआई उत्पादन को लेकर चिंताएं बनाए रख सकती है।

साथ ही, दलहन के रकबे में सुधार और कुछ खास तिलहनों की अच्छी बुआई से आपूर्ति की संभावनाएं बेहतर हो सकती हैं, जिससे अलग-अलग जिंसों की कीमतों में बहुत ज़्यादा बढ़ोतरी सीमित हो सकती है।

केडिया एडवायजरी के मुताबिक खरीफ का रकबा पिछले साल के मुकाबले कम है, जिससे कम बुआई वाली फसलों की कीमतों को सहारा मिल रहा है। वहीं, दालों और कुछ खास तिलहनों की बेहतर स्थिति कृषि बाजारों में आपूर्ति से जुड़ी चिंताओं को कम कर सकती है।

First Published : September 7, 2026 | 4:46 PM IST