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24 सितंबर को SEBI के बोर्ड की अहम बैठक, PMS नियमों में बड़े बदलाव समेत कई प्रस्तावों पर रहेगी नजर

24 सितंबर को होने वाली सेबी बोर्ड बैठक में पीएमएस के नियम आसान बनाने, डेट मार्केट में सुधार और एफपीआई भागीदारी बढ़ाने पर फैसला हो सकता है। वहीं, गलत इस्तेमाल की आशंका से म्युचुअल फंड गिफ्ट कार्ड को मंजूरी मिलना मुश्किल है

SEBI

प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

Last Updated: सितंबर 20, 2026 | 9:09 PM IST

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) 24 सितंबर को निदेशक मंडल की बैठक में पोर्टफोलियो मैनेजमेंट सर्विसेज (पीएमएस) से जुड़े नियमों में बड़े बदलावों को मंजूरी दे सकता है। इन बदलावों में कम पाबंदी के साथ नई व सिर्फ म्युचुअल फंड वाली पीएमएस सेवाएं, डेट मार्केट में सुधार और एक्सचेंज ट्रेडेड कमोडिटी डेरिवेटिव में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की भागीदारी को बढ़ावा देने वाले उपाय शामिल हो सकते हैं।

सूत्रों के मुताबिक नियामक निजी नियोजन के जरिये छोटी रकम का कर्ज जुटाने के लिए मर्चेंट बैंकर नियुक्त करने की अनिवार्य शर्त हटा सकता है और डेट सिक्योरिटीज के बारे में जानकारी देने के लिए क्रेडिट रिस्क मीटर ला सकता है। साथ ही, वह रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट और इन्फ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट में सुधारों पर विचार कर सकता है।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि म्युचुअल फंड निवेश के लिए गिफ्ट कार्ड की इजाजत देने का प्रस्ताव शायद मंजूर न हो क्योंकि इसके गलत इस्तेमाल की आशंका है। इसके अलावा, स्टॉक ब्रोकरों के लिए अलग-अलग नेटवर्थ की जरूरत वाले प्रस्ताव पर बातचीत चल रही है। इसलिए हो सकता है कि बोर्ड बैठक में इस उपाय पर विचार न किया जाए। इस बारे में जानकारी के लिए सेबी को भेजे गए ईमेल का जवाब नहीं मिला।

प्रस्तावित एमएफ-पीएमएस ढांचे के तहत रेग्युलर पीएमएस में निवेश की मौजूदा न्यूनतम सीमा 50 लाख रुपये से घटाकर 25 लाख रुपये कर दी जाएगी। साथ ही, एमएफ-पीएमएस के लिए आवेदन करने वालों की नेटवर्थ की न्यूनतम जरूरत को भी 5 करोड़ रुपये से घटाकर 2 करोड़ रुपये की जा सकती है। इससे पोर्टफोलियो मैनेजरों को खासतौर पर म्युचुअल फंड स्कीमों के डायरेक्ट प्लान और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड (एसआईएफ) में निवेश का प्रबंध करने की सुविधा मिल जाएगी।

नियामक पोर्टफोलियो मैनेजरों को विदेशी प्रतिभूतियों में निवेश करने, एक्सचेंज ट्रेडेड डेरिवेटिव का इस्तेमाल बढ़ाने और सूचीबद्ध होने वाली व असूचीबद्ध प्रतिभूतियों में निवेश की भी इजाजत दे सकता है। सेबी एक कॉमन एडवरटाइजमेंट कोड को भी मंजूरी दे सकता है ताकि उसके नियमन दायरे वाली संस्थाओं के मानकों में एकरूपता लाई जा सके। इस समय अलग-अलग तरह की इंटरमीडियरी के लिए अलग-अलग व्यवस्था है।

ऑल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंडों के लिए एक्रेडिटेड इन्वेस्टर फ्रेमवर्क की भी समीक्षा संभव है। इसमें शामिल करने की प्रक्रिया के तहत ज्यादा लोगों को जोड़ने की पात्रता और निवेश प्रबंधक के जरिये एक्रिडिटेशन यानी मान्यता देने जैसे उपाय शामिल हो सकते हैं। बोर्ड जिन अन्य प्रस्तावों पर विचार कर सकता है, उनमें निपटान नियमों में बड़े बदलाव, मार्केट इन्फ्रास्ट्रक्चर इंस्टिट्यूशंस में टेक्नॉलजी मजबूत करने के कदम और मार्जिन ट्रेडिंग सुविधा की समीक्षा शामिल है।

नियामक एफपीआई के लिए गैर-कृषि वाले इंडेक्स डेरिवेटिव और बिना नकदी सेटल होने वाले गैर-कृषि कमोडिटी डेरिवेटिव में कारोबार का रास्ता साफ कर सकता है। इस कदम से भागीदारों की संख्या बढ़ सकती है, लिक्विडिटी और मार्केट की गहराई बेहतर हो सकती है, प्राइस डिस्कवरी में सुधार हो सकता है और डेरिवेटिव व फिजिकल मार्केट के बीच तालमेल मजबूत हो सकता है।

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