ऑटोमोबाइल कंपनी स्टेलेंटिस ने सीके बिड़ला समूह से स्टेलेंटिस इंडिया ऑटोमोबाइल प्राइवेट लिमिटेड (एसआईएपीएल) की बाकी हिस्सेदारी खरीद ली है। इसके साथ ही तमिलनाडु के तिरुवल्लूर में सिट्रोएन की गाड़ियां बनाने वाले प्लांट पर स्टेलेंटिस का पूरा मालिकाना हक हो गया है।
कंपनी ने यह कदम अपनी ‘फास्टलेन 2030’ रणनीति के तहत उठाया है। इसके तहत स्टेलेंटिस भारत को अपना बड़ा वैश्विक निर्यात केंद्र बनाना चाहती है। दोनों कंपनियों के बीच इस संयुक्त कारोबार की शुरुआत 2017 में हुई थी।
उत्पादन करीब तीन गुना करने की तैयारी
स्टेलेंटिस अब तिरुवल्लूर प्लांट में गाड़ियों का उत्पादन तेजी से बढ़ाने की तैयारी कर रही है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि 2026 में इस प्लांट में करीब 18,000 गाड़ियां बनाई जा रही हैं। 2027 तक इसे बढ़ाकर करीब 50,000 गाड़ियां करने की योजना है। यानी एक साल में उत्पादन करीब तीन गुना हो सकता है।
स्टेलेंटिस इंडिया के CEO और MD शैलेश हजेला ने कहा, ‘अभी हम हर साल 18,000 गाड़ियां बनाते हैं। अगले साल करीब 50,000 गाड़ियां बनाने की योजना है। इसमें भारत में बिक्री और निर्यात दोनों के लिए बनने वाली गाड़ियां शामिल होंगी।’
कंपनी का मानना है कि भारत के प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौतों से यहां बनी गाड़ियों को दूसरे देशों में भेजना ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो सकता है। प्लांट पर पूरा नियंत्रण मिलने से कंपनी भारत और दूसरे देशों के लिए नए मॉडल भी तेजी से पेश कर सकेगी। साथ ही गाड़ियों में भारत में बने पुर्जों का इस्तेमाल बढ़ाने में भी मदद मिल सकती है।
Also Read: चीन को भारत का निर्यात 40% बढ़ा, इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग सामान ने पकड़ी रफ्तार
हिस्सेदारी कितने में खरीदी?
स्टेलेंटिस ने सीके बिड़ला समूह से बाकी हिस्सेदारी खरीदने के लिए कितनी रकम दी है, इसका खुलासा नहीं किया है। कंपनी ने इस खरीद के लिए पैसा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के जरिए उपलब्ध कराया है।
कंपनी के मुताबिक, यह सौदा भारत में उसके कारोबार के लिए अहम कदम है। पूरा मालिकाना हक मिलने से स्टेलेंटिस को कामकाज पर ज्यादा नियंत्रण मिलेगा। इससे फैसले तेजी से लेने और उत्पादन से जुड़े काम को बेहतर तरीके से संभालने में मदद मिलने की उम्मीद है।
यह सौदा भारत में लंबे समय तक कारोबार बढ़ाने की स्टेलेंटिस की योजना का भी हिस्सा है। कंपनी भारत में उत्पादन बढ़ाने के साथ यहां से दूसरे देशों में गाड़ियों का निर्यात भी बढ़ाना चाहती है।
