इंडिया डीप टेक अलायंस (आईडीटीए) में शामिल निवेशकों ने डीप-टेक स्टार्टअप कंपनियों में अब तक 3 अरब डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई है। संगठन की एग्जीक्यूटिव कमेटी के चेयरमैन और सेलेस्टा कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर अरुण कुमार ने सेमीकॉन इंडिया 2026 के दौरान आईडीटीए सदस्यों में सहयोग, आरडीआई फंड और अन्य निवेश फंडों पर उदिशा श्रीवास्तव के साथ बातचीत की। प्रमुख अंश:
आईडीटीए का ऐलान पिछले साल सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम में किया गया था। इस एक साल में क्या बदलाव आया?
पिछले साल 8 फंडों ने कुल 1 अरब डॉलर निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी। उसके तुरंत बाद हमने 8 फंड और जोड़े और फिर 8 फंड साथ आए। आज संगठन के 30 सदस्य हैं और इनसे अब कुल निवेश प्रतिबद्धताएं 3 अरब डॉलर तक पहुंच गई हैं। पिछले एक साल में आईडीटीए के सदस्य वेंचर कैपिटल फंडों ने लगभग 25 करोड़ डॉलर का निवेश किया है। इस तरह देखें तो यह बहुत अच्छी प्रगति है।
सभी सदस्य, खासतौर से वीसी कैसे सहयोग कर रहे हैं?
हम कई तरीकों से मिलकर काम कर रहे हैं। मसलन, सभी डीप-टेक संस्थापकों को एक साथ लाना होगा, क्योंकि उन्हें ही असली निवेशकों को ढूंढना पड़ता है। हर कोई डीप-टेक की बात कर रहा है, लेकिन ऐसे बहुत कम लोग हैं, जो धैर्यवान और डीप-टेक में निवेश के बारे में अच्छी तरह वाकिफ हों। इसलिए, हमारे पास संस्थापकों को निवेशकों से जोड़ने के लिए कई कार्यक्रम हैं।
सेलेस्टा कैपिटल द्वारा 2,000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना कहां तक पहुंची? क्या आपने आरडीआई फंड के तहत आवेदन किया है?
इस मामले में कंपनी अच्छी प्रगति के रास्ते पर हैं। हमने निवेश शुरू कर दिया है। पहला क्लोज कुछ समय पहले किया गया था। आईडीटीए के कई सदस्यों की तरह हमने आरडीआई फंड के तहत दूसरे स्तर के फंड मैनेजर बनने के लिए भी आवेदन किया है।
सरकार आरडीआई के तहत स्टार्टअप को धन दे रही है। ऐसे में जरूरत इस बात की है कि ये स्टार्टअप 50 फीसदी निवेश निजी स्तर पर लाएं। क्या आपने सरकार के साथ कोई साझेदारी की है, ताकि प्रक्रिया सुचारू और तेज हो?
प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने कई कंपनियों में सीधे शेयर खरीदे हैं और उम्मीद यह है कि अन्य निवेशक, वेंचर-कैपिटल निवेशक भी इतनी ही रकम उन कंपनियों में लगाएंगे, लेकिन कई कंपनियों को फंड प्राप्त करने में मदद की जरूरत है।
