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आंध्र की धरती से निकला ‘सोना’, भारत की आयात निर्भरता घटाने की बड़ी शुरुआत

आंध्र प्रदेश के कुरनूल में 405 करोड़ रुपये की जोन्नागिरी स्वर्ण परियोजना शुरू हुई, जिससे भारत की घरेलू सोना उत्पादन क्षमता को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

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शाइन जेकब   
Last Updated- June 25, 2026 | 8:29 AM IST

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने कुरनूल जिले में 405 करोड़ रुपये की स्वर्ण खनन एवं प्रसंस्करण परियोजना का उद्घाटन किया। बुधवार को को इस परियोजना का उद्घाटन देश के लिए यह बड़ा अहम कदम है क्योंकि देश सोने का बहुत बड़ा उपभोक्ता तो है मगर इसका उत्पादन बहुत कम करता है।

तुग्गली मंडल के जोन्नागिरी, एर्रागुडी और पागीदिरायि गांवों में फैली यह परियोजना भारत की घरेलू स्वर्ण उत्पादन क्षमता मजबूत करने की दिशा में उठाया गया एक अहम कदम है। ऐसे समय में जब भारत दुनिया में सोने के सबसे बड़े उपभोक्ता देशों में एक है जोन्नागिरी में व्यावसायिक स्तर पर स्वर्ण खनन फिर से चर्चा में आ गई है।

लगभग 598 हेक्टेयर में फैली और 400 करोड़ रुपये से अधिक निवेश वाली जोन्नागिरी परियोजना से अपनी पूरी क्षमता पर हर साल 1,000 किलोग्राम तक प्रसंस्कृत सोने का उत्पादन होने की उम्मीद है और इस खनन की अनुमानित अवधि लगभग 15 साल है। अभी प्रमाणित स्वर्ण संसाधन लगभग 13.1 टन हैं और खोज से पता चलता है कि बड़े खनिज से भरपूर क्षेत्र में और भी अधिक संसाधन मिलने की संभावना है।

जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया प्राइवेट लिमिटेड (स्वर्ण अन्वेषण एवं विकास कंपनी) और डेक्कन गोल्ड माइन द्वारा विकसित और लॉयड्स और त्रिवेणी ग्रुप की मदद से तैयार यह खान भारत में व्यावसायिक स्तर पर सोने का उत्पादन फिर शुरू कर रही है जबकि देश घरेलू मांग पूरी करने के लिए हर साल 700 से 1,000 टन सोना आयात करता है।

लगभग 598 हेक्टेयर में फैले और 400 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली जोन्नागिरी परियोजना से हर साल 1,000 किलोग्राम तक प्रसंस्कृत सोना मिलने की उम्मीद है और इसकी खदान की अनुमानित उम्र लगभग 15 साल है। अभी प्रमाणित सोने का भंडार लगभग 13.1 टन है और खोज से पता चलता है कि बड़े खनिज क्षेत्र में और भी अधिक भंडार मिलने की संभावना है।

लॉयड मेटल्स ऐंड एनर्जी के प्रबंध निदेशक एवं चेयरमैन बी प्रभाकरण ने कहा,‘जोन्नागिरी स्वर्ण खदान भारत के स्वर्ण खनन उद्योग के लिए एक नए अध्याय की शुरुआत है। दशकों से भारत सोने का दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता रहा है जबकि आयात पर बहुत अधिक निर्भर रहा है। आज हम यह दिखा रहे हैं कि भारत व्यावसायिक स्तर पर विश्व-स्तरीय स्वर्ण खान परिसंपत्तियों की खोज, उनका विकास और संचालन कर सकता है।’

उन्होंने कहा,‘हमारा लक्ष्य केवल एक परियोजना से कहीं आगे तक जाता है। हमारा लक्ष्य एक टिकाऊ घरेलू स्वर्ण खनन ढांचा तैयार करना है जो आर्थिक विकास में मदद करे, रोजगार पैदा करे, राष्ट्रीय संसाधन सुरक्षा में योगदान दे और भारत में ‘मेड इन इंडिया’ प्रसंस्कृत सोने को घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में स्थापित करे। जोन्नागिरी देश में विश्व-स्तर पर प्रतिस्पर्द्धी स्वर्ण खदान परिसंपत्तियों का पोर्टफोलियो बनाने की दिशा में ‘आत्मनिर्भर भारत’ का एक स्पष्ट उदाहरण है।’

First Published : June 25, 2026 | 8:29 AM IST