कर्नाटक सरकार डेटा सेंटरों के लिए नए कूलिंग समाधान विकसित करने वाली कंपनियों और स्टार्टअप को प्रोत्साहन देने पर विचार कर रही है। सूत्रों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि अपने तरह के इस अनूठे कदम का उद्देश्य इन क्षेत्रों में काम करने वाली वैश्विक कंपनियों को आकर्षित करना है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘हम नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भी इसी तरह का विचार कर रहे हैं। यदि कोई डेटा सेंटर ऊर्जा ग्रिड, जो आम तौर पर कोयले जैसे पारंपरिक ईंधन से संचालित होते हैं, पर निर्भरता को खत्म करती है तो हम उसे भी प्रोत्साहित कर सकते हैं।’
डेटा सेंटरों को ठंडा रखने के लिए परंपरागत रूप से भारी मात्रा में पानी की आवश्यकता होती है, जिसका उपयोग में मौजूद हजारों पंक्तियों के डेटा सेंटर रैक द्वारा उत्पन्न गर्मी को दूर करने के लिए शीतलक के रूप में किया जाता है। हालांकि कम पानी का उपयोग करने वाले नवाचार हुए हैं लेकिन इन समाधानों की उच्च लागत के कारण अधिकांश को बड़े पैमाने पर लागू नहीं किया गया है।
अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के अनुसार औसतन 100 मेगावॉट क्षमता वाला एक डेटा सेंटर प्रतिदिन लगभग 20 लाख लीटर पानी की खपत करता है जो लगभग 6,500 घरों की पानी की खपत के बराबर है। एक अधिकारी ने कहा, ‘डेटा सेंटरों में पानी की खपत को कम करना जरूरी है। इसलिए इस क्षेत्र में जो भी नए नवाचार हुए हैं उन्हें सही समर्थन प्रदान करने के लिए प्रोत्साहन देने का विचार किया जा रहा है।‘
अधिकारी ने कहा कि अगले 2 से 3 महीनों में नई डेटा सेंटर नीति आने की संभावना है। इस नीति के तहत प्रति रैक अधिक सर्वर पैक करने के समाधान विकसित करने वाली कंपनियों के लिए भी प्रोत्साहन का प्रावधान किया गया है। कर्नाटक सरकार के एक अन्य अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार ‘बियॉन्ड बेंगलूरु’ योजना यानी बेंगलूरु से बाहर के पहलू को भी शामिल करेगी, जिसके तहत कंपनियां छोटे, मझोले शहरों और कस्बों में डेटा सेंटर स्थापित करने के लिए अतिरिक्त वित्तीय और गैर-वित्तीय प्रोत्साहन प्राप्त कर सकती हैं।
उन्होंने कहा, ‘जिन क्षेत्रों में नए डेटा सेंटर को संभावित (सब-सी) केबल लैंडिंग स्टेशनों से जोड़ने की क्षमता है, वहां प्रोत्साहन की योजना बनाई जा रही है। डेटा सेंटर नीति के तहत हम वैश्विक कंपनियों, दूरसंचार फर्मों और प्रौद्योगिकी दिग्गजों के साथ केबल लैंडिंग स्टेशनों को भी प्रोत्साहित करने की दिशा में काम करने पर विचार कर रहे हैं।‘
एक अधिकारी ने कहा कि राज्य की डेटा सेंटर नीति के दूसरे चरण के लिए कोष को अभी तक अंतिम रूप नहीं दिया गया है लेकिन कर्नाटक सरकार उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से आवश्यकताओं का आकलन करने के लिए बातचीत कर रही है और उसके मुताबिक निर्णय लिया जाएगा। राज्य की डेटा सेंटर नीति का पहला चरण 2022 में शुरू हुआ था और उसका लक्ष्य 2025 तक कर्नाटक में 200 मेगावॉट का डेटा सेंटर क्षमता विकसित करना था।
यह नीति डेटा सेंटरों को विश्वसनीय और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए दो अलग-अलग सब स्टेशनों से बिजली लेने की अनुमति भी देती है। इस नीति के तहत भूमि और इमारत को छोड़कर अचल संपत्तियों के मूल्य पर 10 करोड़ रुपये तक की एकमुश्त 7 फीसदी पूंजी सब्सिडी और यदि भूखंड बेंगलूरु शहरी क्षेत्र से बाहर है तो जमीन की खरीद पर 10 फीसदी तक सब्सिडी देने का प्रावधान है।