नई कारों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी के मामले में भारत दुनिया के दूसरे देशों से काफी पीछे है। हालांकि सरकार ने कई नीतिगत दखल के जरिए 2030 तक इन वाहनों की पैठ बढ़ाकर 30 प्रतिशत तक करने का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है।
ऊर्जा क्षेत्र में एक स्वायत्त अंतर-सरकारी संगठन- पेरिस स्थित इंटरनैशनल एनर्जी एजेंसी (आईईए)- के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में नई कारों की कुल बिक्री में वैश्विक इलेक्ट्रिक कारों की हिस्सेदारी 25 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी। सीधे शब्दों में कहें तो, बिकने वाली हर चार में से एक कार इलेक्ट्रिक होगी, जिससे दुनिया भर में ऐसे वाहनों की संख्या 2 करोड़ तक पहुंच जाएगी। आईईए इन ने इन आंकड़ों में बैटरी से चलने वाली इलेक्ट्रिक और प्लग-इन हाइब्रिड कारों को भी शामिल किया है।
इस बेंचमार्क के मुकाबले पिछले साल भारत में बिकने वाली इलेक्ट्रिक कारों का हिस्सा कुल नई कारों की बिक्री का महज 4 प्रतिशत था। यह बिक्री सिर्फ दो घरेलू कंपनियों – टाटा मोटर्स और महिंद्रा ऐंड महिंद्रा तक ही सीमित थी, जिनका इलेक्ट्रिक कारों की कुल बिक्री में 60 प्रतिशत हिस्सा था। यह बिक्री 165,000 वाहनों तक पहुंची थी।
आईईए के आंकड़ों से यह भी पता चलता है कि यूरोपीय संघ के अलावा 23 ऐसे देश हैं जहां 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री पहले ही 10 प्रतिशत का आंकड़ा पार कर चुकी है। लेकिन इस खास सूची में भारत का कोई स्थान नहीं है। इसके बजाय भारत वियतनाम (जहां 2020 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री शून्य थी, वहीं 2025 में कुल नई कारों की बिक्री में इनका हिस्सा 41 प्रतिशत हो गया), थाईलैंड (23 प्रतिशत), इंडोनेशिया (2020 में शून्य से बढ़कर 15 प्रतिशत), दक्षिण कोरिया (11 प्रतिशत) और फिलीपींस (10 प्रतिशत) जैसे ज्यादातर एशियाई देशों से पीछे रह गया है।
यहां तक कि ब्राजील (9 प्रतिशत) और मैक्सिको (7 प्रतिशत) जैसे लैटिन अमेरिकी देश भी इस मामले में भारत से आगे हैं। यूरोप में तुर्की ने दुनिया को हैरान कर दिया। वहां इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 2022 में नई कारों की कुल बिक्री के महज 1 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 20 प्रतिशत तक पहुंच गई। निश्चित ही, नॉर्वे इस मामले में सबसे आगे है, जहां पिछले साल कुल नई कारों की बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों का हिस्सा 97 प्रतिशत था। भारत का पड़ोसी देश नेपाल भी बड़ी सफलता की मिसाल बना है, जहां 2025 में इलेक्ट्रिक कारों की बिक्री 10 प्रतिशत से बढ़कर 68 प्रतिशत तक पहुंच गई।
निस्संदेह, चीन इस मामले में सबसे आगे है। चीन में पिछले साल कारों की कुल बिक्री में इलेक्ट्रिक कारों की भागीदारी 53 प्रतिशत रही। अमेरिका थोड़ा पीछे रहा, लेकिन वर्ष 2020 के 2 प्रतिशत के मुकाबले उसने अब 10 प्रतिशत इलेक्ट्रिक कार बिक्री का आंकड़ा पार कर लिया है। भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की धीमी गति का एक मुख्य कारण चार्जिंग स्टेशनों के बुनियादी ढांचे की कमी है।