प्रतीकात्मक तस्वीर
सुपरफास्ट डिलिवरी प्लेटफॉर्म जेप्टो मूल्यांकन और लाभप्रदता संबंधी मुद्दों की वजह से अपने प्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश (आईपीओ) के स्थगित करने के कारण चर्चा में है। इसे 2021 में कोविड के समय शुरू किए गए किरानाकार्ट के विस्तार के रूप में लॉन्च किया गया था। स्टैनफर्ड विश्वविद्यालय से पढ़ाई बीच में ही छोड़ देने वाले आदित पालिचा और कैवल्य वोहरा (तब उम्र 18 और 19 वर्ष ) ने जेप्टो की स्थापना की। क्विक कॉमर्स की चर्चा होते ही सबसे पहले जेप्टो का ध्यान आता है। किसी मूल कंपनी के बोझ के बिना इसने एक ऐसी प्रणाली के इर्द-गिर्द अपना व्यवसाय खड़ा किया, जो 10 मिनट में डिलिवरी करने का वादा करता था।
क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में अन्य कंपनियां भी चर्चा में हैं। वर्ष 2008 में दीपेंद्र गोयल और पंकज चड्ढा द्वारा मूल रूप से फूडीबे के रूप में स्थापित जोमैटो (अब इटर्नल) ने हाल ही में वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही के वित्तीय परिणामों, विशेष रूप से अपने क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म ब्लिंकइट के लिए सुर्खियां बटोरीं। आंकड़ों से ब्लिंकइट के मासिक उपयोगकर्ताओं में उल्लेखनीय वृद्धि के साथ लेनदेन की बहुत बड़ी संख्या भी देखी गई। श्रीहर्ष मजेटी, राहुल जैमिनी और नंदन रेड्डी द्वारा 2014 में स्थापित स्विगी और इसकी क्विक कॉमर्स यूनिट इंस्टामार्ट भी अपने वित्तीय आंकड़ों के लिए चर्चा में हैं।
क्विक कॉमर्स सेक्टर में नेतृत्व परिवर्तन भी चर्चा का विषय रहा है। नंदिता सिन्हा मिंत्रा से इंस्टामार्ट आकर उसकी सीईओ बनीं, जबकि अमितेश कुमार झा ने इंस्टामार्ट के इसी पद से इस्तीफा दिया। कुछ समय पहले ही अमित नंदा ने बिगबास्केट के सीईओ का पदभार संभाला और इसके सह-संस्थापक और मुख्य कार्यपालक अधिकारी हरि मेनन की जगह ली। बिगबास्केट अपने कारोबार को बढ़ाने के लिए क्विक कॉमर्स पर बड़ा दांव लगा रही है। इसकी स्थापना 2011 में पांच उद्यमियों ने की थी और अब यह टाटा डिजिटल के स्वामित्व में है। अमित नंदा इससे पहले एमेजॉन में थे। वह कंपनी भी क्विक कॉमर्स को एक संभावित सफल क्षेत्र के रूप में देखती है और इस श्रेणी में भारी निवेश कर रही है।
वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट भी अपने उपभोक्ताओं तक पहले से कहीं अधिक तेजी से पहुंचने की होड़ में है और एमेजॉन के साथ-साथ क्विक कॉमर्स क्षेत्र के अन्य खिलाड़ियों से भी मुकाबला कर रही है। फ्लिपकार्ट इस महीने के अंत में फूड डिलिववरी सेवा भी शुरू करने जा रही है, जिससे क्विक कॉमर्स के क्षेत्र में एक और आयाम जुड़ जाएगा। भारत में क्विक कॉमर्स के बढ़ते चलन का मुख्य कारण यहां की सुगम भुगतान प्रणाली है। यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) ने स्टार्टअप और पारंपरिक व्यवसाय, दोनों के लिए क्विक कॉमर्स को बेहतर बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाई है। क्या सरकार द्वारा संसद में पेश किए जाने वाले विधेयक से यह स्थिति बदलेगी, जिससे कारोबारियों द्वारा बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं को भुगतान किया जाने वाले शुल्क (मर्चेंट डिस्काउंट रेट) का युग फिर से शुरू हो सकता है?
वर्ष 2020 में डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने और व्यापार में सुगमता लाने के लिए यूपीआई के उपयोग पर लगने वाला एमडीआर हटा दिया गया था। नए घटनाक्रम में भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 की धारा 10ए में संशोधन का प्रस्ताव है, जिसमें यूपीआई और रुपे डेबिट कार्डों को एमडीआर से छूट दी गई थी, लेकिन अभी तक कोई शुल्क प्रस्तावित नहीं किया गया है। संशोधन होने से सरकार को यह अधिसूचित करने की अनुमति मिलेगी कि किन इलेक्ट्रॉनिक भुगतान माध्यमों पर एमडीआर लागू हो सकता है।
सरकार की ओर से कहा गया है कि यदि कोई शुल्क लगाया जाता है, तो दो व्यक्तियों के बीच होने वाले लेनदेन इससे मुक्त रहेंगे। खबरों के अनुसार, व्यवसायों और व्यापारियों के साथ लगभग 2,000 रुपये से अधिक के लेनदेन पर 0.5 फीसदी से कम का एमडीआर लगाया जा सकता है। शुल्क की सीमा अलग-अलग स्तरों पर निर्धारित की जा सकती है। साथ ही, एमडीआर की गणना करते समय व्यवसाय/व्यापारी के कारोबार को भी ध्यान में रखा जा सकता है। यह संभव है कि लगभग 1.5 करोड़ रुपये तक के वार्षिक कारोबार वाले व्यवसायों/व्यापारियों को यह भुगतान न करना पड़े।
यूपीआई लेनदेन पर एमडीआर लागू करते समय कई शर्तें, श्रेणियां और विभिन्न स्तरों पर गणनाएं लागू होने से पहले से ही जटिल खुदरा परिदृश्य में नियमों और दिशानिर्देशों का एक जाल बन सकता है। खुदरा के इस दायरे में तेजी से बढ़ता ई-कॉमर्स और क्विक कॉमर्स भी शामिल है। प्रत्येक लेनदेन मूल्य के अलावा व्यापारी के कारोबार के आधार पर शुल्क निर्धारित करना काफी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विभिन्न आकारों के हजारों विक्रेता और व्यापारी ई-कॉमर्स मार्केटप्लेस प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं। हालांकि एमडीआर लागू होने के बाद खरीदार को कितना भुगतान करना होगा या करना भी होगा, इस बारे में अभी कोई स्पष्टता नहीं है, लेकिन आमतौर पर व्यापारी और व्यवसाय किसी भी अतिरिक्त बोझ को उपभोक्ता पर डालने के लिए जाने जाते हैं।
क्विक कॉमर्स एक आदर्श व्यवसाय प्रारूप है या नहीं, यह एक अलग मुद्दा है। कुछ समय पहले, गिग वर्करों ने क्विक कॉमर्स मॉडल के विरोध में हड़ताल की थी और इतने कम समय में डिलिवरी पूरी करने से जुड़े सुरक्षा खतरों का हवाला दिया था। सरकार के हस्तक्षेप के बाद कई कंपनियों ने 10 मिनट में डिलिवरी वाले मार्केटिंग और विज्ञापन टैग हटा दिए। हालांकि, क्विक कॉमर्स, चाहे इसकी कोई भी परिभाषा अपनाई जाए , एक जीवंत व्यवसाय के रूप में जारी है, और देश भर में गोदाम और डार्क स्टोर खुल रहे हैं।
हाल ही में हुई बातचीत में, फ्लिपकार्ट के सीईओ कल्याण कृष्णमूर्ति ने इस अखबार को बताया कि फ्लिपकार्ट कोई क्विक कॉमर्स कंपनी नहीं है और क्विक कॉमर्स उत्पादों की डिलिवरी का सिर्फ एक तरीका है। फिर भी, यह स्पष्ट है कि मौजूदा समय में कोई भी ऑनलाइन व्यवसाय गति की अनिवार्यता से बच नहीं सकता। आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के बारे में पूछे गए एक प्रश्न के उत्तर में कृष्णमूर्ति का जवाब स्वतः स्पष्ट है: ‘जो भी एआई और तकनीक का उपयोग करके उत्पादों को ग्राहकों तक सबसे पहले पहुंचाएगा, वही सफल होगा। यही तकनीक और एआई का मूलमंत्र है।’
दरअसल, यूपीआई में सरकार द्वारा छोटे व्यापारियों के यहां 2,000 रुपये तक के लेनदेन पर प्रोत्साहन योजना के माध्यम से सब्सिडी दी जाती है। सरकार तकनीक और पहुंच को बढ़ाने के लिए आवश्यक निवेश के लिए एक स्थायी वित्तीय मॉडल की तलाश कर रही है। लेकिन क्या क्रेडिट और डेबिट कार्ड की तरह एमडीआर को वापस लाना, और वह भी एक जटिल नियमावली के साथ, आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है?