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बिज़नेस स्टैंडर्ड

इक्विटी फंड्स में रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न क्या है और क्यों जरूरी है? निवेश से पहले जरूर जान लें

रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न आपको यह तय करने में मदद करता है कि कौन सा फंड लंबे समय में बेहतर साबित हो सकता है।

Equity Mutual Funds

Equity Mutual Funds

Last Updated: सितंबर 18, 2026 | 7:26 PM IST

इक्विटी म्युचुअल फंड्स में निवेश करते समय ज्यादातर लोग सिर्फ रिटर्न पर ध्यान देते हैं। लेकिन असल समझदार निवेश वही है जो रिटर्न के साथ-साथ जोखिम को भी ध्यान में रखें। यहीं पर “रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न” की भूमिका सामने आती है। यह बताता है कि आपने जितना जोखिम लिया, उसके मुकाबले आपको कितना रिटर्न मिला।

रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न क्या होता है?

सरल भाषा में समझें तो, रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न का मतलब है कि किसी निवेश से मिलने वाला रिटर्न, उस निवेश में शामिल जोखिम के हिसाब से कितना बेहतर है। दो फंड अगर समान रिटर्न दे रहे हैं, तो बेहतर वही माना जाएगा जिसमें जोखिम कम हो। यानी सिर्फ ज्यादा रिटर्न ही नहीं, बल्कि उस रिटर्न की स्थिरता और जोखिम भी मायने रखता है।

यह क्यों जरूरी है?

इक्विटी फंड्स बाजार से जुड़े होते हैं, इसलिए इनमें उतार-चढ़ाव स्वाभाविक है। कई बार कोई फंड बहुत ऊंचा रिटर्न देता है, लेकिन उसमें जोखिम भी काफी ज्यादा होता है। ऐसे में अगर बाजार गिरता है तो नुकसान भी बड़ा हो सकता है। इसलिए निवेशक के लिए यह समझना जरूरी है कि रिटर्न कितना “सुरक्षित” या “स्थिर” है।

रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न आपको यह तय करने में मदद करता है कि कौन सा फंड लंबे समय में बेहतर साबित हो सकता है। यह खासकर उन निवेशकों के लिए जरूरी है जो अपने निवेश को ज्यादा उतार-चढ़ाव से बचाना चाहते हैं।

शार्प रेशियो क्या होता है?

रिस्क-एडजस्टेड रिटर्न को मापने का सबसे लोकप्रिय तरीका शार्प रेशियो है। यह बताता है कि जोखिम लेने के बदले निवेशक को अतिरिक्त रिटर्न कितना मिला।

शार्प रेशियो की गणना में तीन चीजें शामिल होती हैं-

  • फंड का कुल रिटर्न
  • जोखिम-मुक्त रिटर्न (जैसे सरकारी बॉन्ड)
  • फंड का जोखिम, जिसे स्टैंडर्ड डिविएशन से मापा जाता है

अगर किसी फंड का शार्प रेशियो ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि उस फंड ने जोखिम के मुकाबले बेहतर रिटर्न दिया है। वहीं कम शार्प रेशियो यह संकेत देता है कि रिटर्न के मुकाबले जोखिम ज्यादा है।

स्टैंडर्ड डिविएशन क्या होता है?

स्टैंडर्ड डिविएशन एक ऐसा पैमाना है जिससे यह पता चलता है कि किसी फंड का रिटर्न कितना उतार-चढ़ाव वाला है। अगर किसी फंड का स्टैंडर्ड डिविएशन ज्यादा है, तो इसका मतलब है कि उसके रिटर्न में ज्यादा अस्थिरता है।

उदाहरण के तौर पर-

  • कम स्टैंडर्ड डिविएशन: रिटर्न स्थिर, जोखिम कम
  • ज्यादा स्टैंडर्ड डिविएशन: रिटर्न में बड़ा उतार-चढ़ाव, जोखिम ज्यादा
  • इससे निवेशक यह समझ सकता है कि फंड कितना “वोलाटाइल” है और उसमें निवेश करना उसके जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार है या नहीं।
  • शार्प रेशियो और स्टैंडर्ड डिविएशन का साथ में उपयोग

इन दोनों को साथ में देखने से निवेशक को पूरी तस्वीर मिलती है। स्टैंडर्ड डिविएशन बताता है कि जोखिम कितना है, जबकि शार्प रेशियो बताता है कि उस जोखिम के बदले रिटर्न कितना अच्छा है।

मान लीजिए दो फंड हैं

फंड A: रिटर्न 12%, लेकिन स्टैंडर्ड डिविएशन ज्यादा
फंड B: रिटर्न 11%, लेकिन स्टैंडर्ड डिविएशन कम और शार्प रेशियो ज्यादा

ऐसे में फंड B बेहतर माना जा सकता है क्योंकि उसने कम जोखिम में लगभग समान रिटर्न दिया।

निवेशकों के लिए क्या सीख?

  • सिर्फ पिछले रिटर्न देखकर फंड न चुनें
  • हमेशा देखें कि रिटर्न किस स्तर के जोखिम पर मिला है
  • शार्प रेशियो ज्यादा और स्टैंडर्ड डिविएशन संतुलित होना चाहिए
  • अपने जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार फंड चुनें

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