मुख्य सामग्री पर जाएं
बिज़नेस स्टैंडर्ड

बाजार की चाल के साथ बदलता है निवेश! क्या हैं बैलेंस्ड एडवांटेज फंड और कैसे काम करती है इसकी रणनीति?

बाजार में जब कभी तेजी और गिरावट दोनों का दौर साथ-साथ दिखे, तो निवेशकों के लिए सही जगह पैसा लगाना चुनौती बन जाता है।

बाजार की चाल के साथ बदलता है निवेश! क्या हैं बैलेंस्ड एडवांटेज फंड और कैसे काम करती है इसकी रणनीति?

Last Updated: सितंबर 18, 2026 | 7:40 PM IST

शेयर बाजार में पैसा लगाने वालों के सामने सबसे बड़ी उलझन यही रहती है कि तेजी आए तो कमाई का मौका हाथ से न निकले और गिरावट आए तो पैसा भी ज्यादा न डूबे। इसी बीच बैलेंस्ड एडवांटेज फंड (BAF) एक ऐसे विकल्प के तौर पर सामने आते हैं, जो बाजार के हिसाब से अपने निवेश का तरीका बदल सकते हैं। इन्हें डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंड भी कहा जाता है। ये फंड बाजार की चाल, वैल्यूएशन और जोखिम को देखते हुए इक्विटी और डेट में निवेश का अनुपात घटाते-बढ़ाते हैं। यानी बाजार महंगा दिखे तो इक्विटी का हिस्सा कम किया जा सकता है और मौके बेहतर नजर आएं तो इसमें निवेश बढ़ाया जा सकता है।

क्या होता है बैलेंस्ड एडवांटेज फंड?

ICICI प्रूडेंशियल AMC में प्रिंसिपल (निवेश रणनीति) चिंतन हरिया के मुताबिक, बैलेंस्ड एडवांटेज फंड की सबसे खास बात यह है कि इसमें इक्विटी और डेट में पैसा लगाने का अनुपात हमेशा एक जैसा नहीं रहता। बाजार की स्थिति और फंड की रणनीति के हिसाब से यह अनुपात बदला जाता है। जब शेयर बाजार का वैल्यूएशन आकर्षक नजर आता है, तो फंड इक्विटी में निवेश बढ़ा सकता है। वहीं, जब शेयर महंगे दिखने लगते हैं या बाजार में जोखिम बढ़ जाता है, तो इक्विटी का हिस्सा घटाकर डेट या दूसरे निवेश विकल्पों में पैसा बढ़ाया जा सकता है।

इस तरह की रणनीति का मकसद बाजार के अलग-अलग दौर में पोर्टफोलियो के जोखिम को संभालना होता है। लेकिन इसका यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में नुकसान की कोई गुंजाइश नहीं होती। ये फंड बाजार के उतार-चढ़ाव को कुछ कम रखने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन्हें पूरी तरह जोखिम-मुक्त निवेश नहीं माना जा सकता। छोटी अवधि में इनका रिटर्न निगेटिव भी हो सकता है। 

एसेट एलोकेशन कैसे काम करती है?

चिंतन हरिया बताते हैं कि बैलेंस्ड एडवांटेज फंड में सबसे अहम भूमिका एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी की होती है। आसान भाषा में समझें तो फंड मैनेजर यह तय करता है कि मौजूदा बाजार में पैसा इक्विटी में ज्यादा लगाया जाए या डेट में। इसके लिए हर फंड हाउस अपने अलग मॉडल का इस्तेमाल करता है। बाजार का वैल्यूएशन, जोखिम और दूसरे आर्थिक संकेतकों को देखकर इक्विटी और डेट के बीच निवेश का अनुपात बदला जाता है।

एक्सपर्ट के मुताबिक, डायनेमिक एसेट एलोकेशन फंड बाजार की स्थिति, वैल्यूएशन और जोखिम के संकेतों को देखते हुए इक्विटी और डेट में निवेश का हिस्सा बदलते हैं। यही वजह है कि ये पारंपरिक हाइब्रिड फंड्स से अलग होते हैं, जहां एसेट एलोकेशन आमतौर पर एक तय दायरे में रहता है। 

इसे एक उदाहरण से समझें। अगर बाजार में तेजी के बावजूद शेयरों का वैल्यूएशन बहुत ज्यादा महंगा हो जाता है, तो फंड का मॉडल इक्विटी में निवेश घटाने का संकेत दे सकता है। वहीं, बाजार में बड़ी गिरावट के बाद अगर शेयरों का वैल्यूएशन आकर्षक नजर आता है, तो इक्विटी में निवेश बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, यह बदलाव हर फंड के अपने मॉडल और निवेश रणनीति पर निर्भर करता है।

बाजार में उतार-चढ़ाव के बीच क्यों चर्चा में हैं?

बाजार में जब कभी तेजी और गिरावट दोनों का दौर साथ-साथ दिखे, तो निवेशकों के लिए सही जगह पैसा लगाना चुनौती बन जाता है। ऐसे माहौल में बैलेंस्ड एडवांटेज फंड एक बार फिर चर्चा में हैं। इन फंड्स की डायनेमिक रणनीति बाजार के वैल्यूएशन और परिस्थितियों के हिसाब से पोर्टफोलियो में बदलाव करने की सुविधा देती है। हालांकि, निवेशकों को बाजार के उतार-चढ़ाव को सहने की अपनी क्षमता और कम से कम पांच साल की निवेश अवधि को ध्यान में रखना चाहिए। 

फंड्स में निवेश का रुझान भी हर महीने एक जैसा नहीं रहा है। जुलाई 2026 में डायनेमिक एसेट एलोकेशन और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स की कैटेगरी से 252 करोड़ रुपये की शुद्ध निकासी हुई। इसके ठीक पिछले महीने यानी जून में इस कैटेगरी में 553 करोड़ रुपये का निवेश आया था। 

हालांकि, निवेश में उतार-चढ़ाव के बावजूद इस कैटेगरी का कुल आकार बढ़ा है। जुलाई 2026 के अंत तक डायनेमिक एसेट एलोकेशन और बैलेंस्ड एडवांटेज फंड्स का कुल एसेट अंडर मैनेजमेंट यानी AUM करीब 3.29 लाख करोड़ रुपये था। यह आंकड़ा एक साल पहले की तुलना में 7.7 फीसदी ज्यादा है।

किस निवेशक के लिए हो सकता है विकल्प?

चिंतन हरिया के मुताबिक, बैलेंस्ड एडवांटेज फंड उन निवेशकों के लिए एक विकल्प हो सकते हैं, जो इक्विटी में निवेश करके ग्रोथ का मौका चाहते हैं, लेकिन बाजार के तेज उतार-चढ़ाव से अपने पूरे पोर्टफोलियो पर पड़ने वाले असर को कुछ कम रखना चाहते हैं। खासकर नए निवेशक या वे लोग, जो खुद बाजार की स्थिति देखकर इक्विटी और डेट में निवेश का अनुपात तय नहीं करना चाहते, इस तरह के फंड पर विचार कर सकते हैं।

हालांकि, किसी बैलेंस्ड एडवांटेज फंड को चुनते समय केवल उसके पुराने रिटर्न को देखकर फैसला करना सही नहीं है। निवेशक को यह भी देखना चाहिए कि फंड एसेट एलोकेशन के लिए किस मॉडल का इस्तेमाल करता है, बाजार में गिरावट आने पर उसकी रणनीति क्या रहती है और पोर्टफोलियो में इक्विटी, डेट और दूसरे निवेश साधनों का वास्तविक हिस्सा कितना है। सबसे जरूरी बात यह है कि पिछला प्रदर्शन भविष्य के रिटर्न की गारंटी नहीं देता।

Image Gallery

mutual fund
mutual fund mutual fund

Advertisement