शेयर बाजार

क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम के बीच सेंसेक्स-निफ्टी में फिर दिखा अंतर, SEBI ने ब्रोकरों से मांगे सुझाव

निफ्टी के कुछ शेयरों में यह अंतर ज्यादा साफ दिखा। उदाहरण के लिए बजाज ऑटो का शेयर बीएसई पर 11,730 और एनएसई पर 11,661 पर बंद हुआ, यानी दोनों में 69 रुपये का अंतर था

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सुन्दर सेतुरामन   
खुशबू तिवारी   
Last Updated- August 13, 2026 | 10:19 PM IST

सेंसेक्स के साप्ताहिक अनुबंधों की एक्सपायरी के दिन गुरुवार को बेंचमार्क सेंसेक्स और निफ्टी के बीच अंतर फिर से देखने को मिला। दोपहर 3:15 बजे तक बेंचमार्क निफ्टी 0.34 फीसदी और सेंसेक्स 0.13 फीसदी नीचे था। गुरुवार के सत्र के आखिर में निफ्टी 24,396 पर बंद हुआ, जिसमें 40 अंक यानी 0.16 फीसदी की गिरावट आई। सेंसेक्स 78,080 पर बंद हुआ, जिसमें 114 अंक यानी 0.15 फीसदी की बढ़त हुई। दोनों बेंचमार्क के बीच यह अंतर 0.31 फीसदी का रहा।

पिछले तीन दिनों में यह अंतर न के बराबर था। मंगलवार को भी निफ्टी की एक्सपायरी के दौरान यह अंतर 0.04 फीसदी था। जब से क्लोजिंग ऑक्शन सिस्टम (सीएएस) शुरू हुआ है, तब से इन दोनों बेंचमार्क के बीच औसतन 0.29 फीसदी का अंतर आ रहा है।

निफ्टी के कुछ शेयरों में यह अंतर ज्यादा साफ दिखा। उदाहरण के लिए बजाज ऑटो का शेयर बीएसई पर 11,730 और एनएसई पर 11,661 पर बंद हुआ, यानी दोनों में 69 रुपये का अंतर था। इसी तरह, अल्ट्राटेक सीमेंट के मामले में दोनों एक्सचेंजों पर बंद भाव में 44 रुपये का अंतर था, जबकि ट्रेंट में यह अंतर 24 रुपये था।  

एक ब्रोकरेज कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, जब ‘खरीद वाली ‘ गतिविधियां बढ़ती हैं तो यह अंतर साफ दिखने लगता है। आज बस इतना हुआ कि बीएसई और एनएसई दोनों के कैश मार्केट में कुछ करोड़ की अतिरिक्त खरीदारी हुई। बाजार नियामक ब्रोकरों को अपने प्लेटफॉर्म पर कैश-मार्केट की वैल्यू को ज्यादा प्रमुखता से दिखाने के लिए प्रोत्साहित कर रहा है ताकि लिक्विडिटी और भागीदारी बढ़े। लेकिन जब तक भागीदारी नहीं बढ़ती, तब तक लिक्विडिटी की यह समस्या और ट्रेडरों के लिए चुनौतियां बनी रहने की संभावना है।

सूत्रों के मुताबिक, बाजार नियामक स्टॉक ब्रोकरों के साथ लगातार बैठकें कर रहा है। सबसे हालिया बैठक गुरुवार को हुई। सूत्रों ने बताया कि नियामक ने ब्रोकरों से अपने सिस्टम को अपडेट करने को कहा और साथ ही सीएएस फ्रेमवर्क और इसमें भागीदारी को बेहतर बनाने के लिए उनसे सुझाव भी लिए।

एक दिन पहले सेबी के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने एक ग्लोबल कमोडिटी कॉन्क्लेव के दौरान कहा था कि ज्यादातर बड़े ब्रोकरों ने सांकेतिक कीमतें दिखाना शुरू कर दिया है। जो पात्र स्टॉक ब्रोकर अभी तक ऐसा नहीं कर पाए हैं, उनसे उम्मीद है कि वे 14 अगस्त तक अपने क्लाइंटों को ये कीमतें उपलब्ध करा देंगे।

चेयरमैन ने कहा कि सीएएस में म्युचुअल फंडों की भागीदारी 5-7 फीसदी से बढ़कर अब लगभग 20-25 फीसदी हो गई है। उन्होंने कहा कि एक्सपायरी की तारीखों के आसपास प्रोप्राइटरी ट्रेडरों की भागीदारी ज्यादा देखी जाती है। पांडेय ने इस बात पर जोर दिया कि सीएएस एक पारदर्शी सिस्टम है और नए सिस्टम के बारे में समझ की कमी है, इसलिए भागीदारी बढ़ने में समय लग सकता है।

नाम न बताने की शर्त पर उद्योग के एक व्यक्ति ने कहा, सीएएस में भागीदारी बढ़ाने की कोशिशें हो रही हैं। लेकिन इसे लागू करना इतना आसान नहीं है। वैश्विक समकक्षों और भारतीय बाजार के प्रतिभागियों के बीच अंतर है। इस समय कुछ आशंकाएं भी हैं। यह उपयुक्तता का मामला है। प्रोडक्ट अच्छा है, लेकिन अभी भारत के लिए उपयुक्त नहीं है। इसके लिए इकोसिस्टम तैयार करने की जरूरत है। संस्थागत निवेशक और खुदरा निवेशक दोनों को इसमें भाग लेने की जरूरत है।

First Published : August 13, 2026 | 10:19 PM IST