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सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों को बड़ी राहत, SEBI ने आसान किए नियम

SEBI New Rules: केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों को अब निवेशक समूह की जानकारी नहीं देनी होगी। नए नियम तुरंत लागू हो गए हैं

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खुशबू तिवारी   
Last Updated- September 07, 2026 | 7:12 PM IST

SEBI New Rules for FPI: बाजार नियामक SEBI ने भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों यानी FPI के लिए नियम आसान कर दिए हैं। अब केवल सरकारी प्रतिभूतियों में पैसा लगाने वाले विदेशी निवेशकों को अपने ‘निवेशक समूह’ की जानकारी नहीं देनी होगी। नए नियम तत्काल प्रभाव से लागू हो गए हैं।

SEBI ने सोमवार, 7 सितंबर को जारी सर्कुलर में इसकी जानकारी दी। इस बदलाव का मकसद विदेशी निवेशकों के लिए नियमों का पालन आसान बनाना और भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश की प्रक्रिया सरल करना है।

किन विदेशी निवेशकों को मिलेगी राहत?

नए नियमों का फायदा उन FPI को मिलेगा, जो केवल भारत सरकार की प्रतिभूतियों में निवेश करते हैं। ऐसे निवेशकों को अब अपने निवेशक समूह से जुड़ी जानकारी जमा करने की जरूरत नहीं होगी।

हालांकि, सरकारी प्रतिभूतियों के अलावा शेयरों या दूसरी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले FPI पर मौजूदा नियम लागू रहेंगे। SEBI की यह छूट केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए है।

पहले क्या था नियम?

SEBI ने सितंबर 2025 में पहली बार सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले कुछ विदेशी निवेशकों को इस नियम से छूट दी थी। उस समय यह राहत केवल फुली एक्सेसिबल रूट यानी FAR के जरिए सरकारी बॉन्ड खरीदने वाले FPI को मिली थी।

पुराने नियम के तहत लिखा गया था कि FAR के जरिए केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले FPI को निवेशक समूह की जानकारी नहीं देनी होगी। अब SEBI ने इसमें से FAR की शर्त हटा दी है।

इसका मतलब है कि सरकारी प्रतिभूतियों में किसी भी मान्य रास्ते से निवेश करने वाले FPI को यह जानकारी देने से छूट मिलेगी, बशर्ते उनका निवेश केवल सरकारी प्रतिभूतियों तक सीमित हो।

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नियम में बदलाव क्यों किया गया?

रिजर्व बैंक ने 5 जून 2026 को सरकारी प्रतिभूतियों में जनरल रूट के जरिए निवेश करने वाले FPI के लिए तय कंसंट्रेशन लिमिट की शर्त हटा दी थी।

इस बदलाव के बाद केवल सरकारी बॉन्ड में निवेश करने वाले FPI के लिए निवेशक समूह की पहचान से जुड़ी जानकारी का महत्व खत्म हो गया था। इसे देखते हुए SEBI ने इस जानकारी को जमा करने की जरूरत समाप्त कर दी।

निवेशक समूह का क्या मतलब है?

अगर कई विदेशी निवेशक एक ही व्यक्ति या संस्था के नियंत्रण में काम करते हैं तो नियामकीय उद्देश्यों के लिए उन्हें एक निवेशक समूह माना जा सकता है। इससे नियामक को किसी एक समूह के कुल निवेश और उससे जुड़े जोखिमों की पहचान करने में मदद मिलती है।

सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले FPI के लिए कंसंट्रेशन लिमिट हटने के बाद ऐसे निवेशक समूह की पहचान की जरूरत नहीं रह गई। इसी वजह से SEBI ने इससे जुड़ी जानकारी देने की शर्त समाप्त कर दी है।

किन संस्थाओं को करना होगा बदलाव?

SEBI ने डिपॉजिटरी, कस्टोडियन और डेजिग्नेटेड डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट्स को अपने सिस्टम में जरूरी बदलाव करने को कहा है। इससे नई व्यवस्था के तहत विदेशी निवेशकों के दस्तावेज और आवेदन की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी।

नया नियम सर्कुलर जारी होने के साथ ही प्रभावी हो गया है।

सरकारी बॉन्ड बाजार पर क्या होगा असर?

नियम आसान होने से केवल सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश करने वाले विदेशी निवेशकों के लिए कागजी प्रक्रिया और नियामकीय बोझ कम होगा। इससे भारतीय सरकारी बॉन्ड में निवेश की प्रक्रिया पहले के मुकाबले आसान हो जाएगी।

हालांकि, इस बदलाव से विदेशी निवेश में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह वैश्विक ब्याज दरों, भारतीय बॉन्ड की यील्ड, रुपये की चाल और विदेशी निवेशकों की रणनीति पर निर्भर करेगा।

First Published : September 7, 2026 | 7:02 PM IST