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Power sector: महंगे वैल्यूएशन के बीच BHEL और Voltamp क्यों बने ब्रोकरेज के फेवरेट?

हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन में तेजी, प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ी, लेकिन मिडिल ईस्ट संकट बना नई चुनौती

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- April 13, 2026 | 11:24 AM IST

Power Sector: पावर ट्रांसमिशन और डिस्ट्रीब्यूशन सेक्टर में ग्रोथ के संकेत तो दिख रहे हैं, लेकिन मौजूदा स्तर पर कंपनियों के शेयर महंगे हो चुके हैं। ऐसे में ब्रोकरेज हाउस नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने इस सेक्टर पर सतर्क रुख अपनाया है। पावर T&D सेक्टर खासकर हाई वोल्टेज (HV) सेगमेंट में मार्च तिमाही में मजबूत प्रदर्शन की उम्मीद है। ऑर्डर और कामकाज में तेजी से ग्रोथ देखने को मिल सकती है।

हालांकि, मौजूदा कीमतों पर कंपनियों के शेयर काफी महंगे हो गए हैं। इसी वजह से ब्रोकरेज ने हिताची एनर्जी और जीवीटीडी की रेटिंग घटाकर ‘होल्ड’ कर दी है। ब्रोकरेज का मानना है कि इन शेयरों में आने वाले कई सालों की ग्रोथ पहले ही कीमत में जुड़ चुकी है, इसलिए यहां से ज्यादा बढ़त की गुंजाइश सीमित है। इसके अलावा, L&T की रेटिंग भी घटाकर ‘होल्ड’ कर दी गई है क्योंकि शेयर पहले ही अपने पुराने स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि सप्लाई से जुड़ी चुनौतियां अभी भी बनी रह सकती हैं।

Power Sector: कहां दिख रहा मौका

नुवामा के मुताबिक, सेक्टर में महंगे वैल्यूएशन के बीच कुछ कंपनियां बेहतर दिख रही हैं। ब्रोकरेज ने BHEL और वोल्टैम्प (Voltamp) को पसंदीदा शेयर बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, BHEL में आने वाले समय में ऑपरेटिंग मार्जिन में सुधार की उम्मीद है, जबकि वोल्टैम्प को डेटा सेंटर, रिन्यूएबल एनर्जी और प्राइवेट कैपेक्स से फायदा मिल सकता है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन सेगमेंट में कामकाज में तेजी आने लगी है। जमीन से जुड़े मुद्दों में राहत मिलने से प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ रही है। जनवरी 2026 में ट्रांसमिशन लाइन जोड़ने की रफ्तार बढ़ी है और PGCIL ने अपने निवेश अनुमान को भी बढ़ाया है। इससे सेक्टर में कंपनियों की आय में सुधार की संभावना है।

हालांकि, मिडिल ईस्ट संकट का असर अब दिखने लगा है। लॉजिस्टिक लागत बढ़ रही है और एक्सपोर्ट पर असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, प्राइवेट कैपेक्स में शुरुआती सुधार के संकेत मिले थे, लेकिन अब यह रफ्तार धीमी पड़ती दिख रही है। मैन्युफैक्चरिंग PMI भी मार्च में घटकर 53.9 पर आ गया, जो मांग में नरमी का संकेत है।

EPC कंपनियों पर असर

EPC कंपनियों जैसे L&T, KEC और KPIL पर भी असर पड़ सकता है। रिपोर्ट के अनुसार, मिडिल ईस्ट में कामकाज ज्यादातर सामान्य रहा, लेकिन अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में समस्या जारी रहती है तो लॉजिस्टिक लागत और कच्चे माल की सप्लाई पर असर पड़ सकता है। इससे अगली तिमाही में प्रोजेक्ट्स की गति प्रभावित हो सकती है।

Power Sector: आगे का नजरिया

नुवामा का मानना है कि सेक्टर में लंबी अवधि की ग्रोथ बनी रहेगी, लेकिन मौजूदा स्तर पर निवेश में सावधानी जरूरी है। जहां एक तरफ पावर ट्रांसमिशन में तेजी दिख रही है, वहीं दूसरी तरफ महंगे वैल्यूएशन और ग्लोबल अनिश्चितता निवेशकों के लिए जोखिम बढ़ा सकती है।

(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)

First Published : April 13, 2026 | 11:24 AM IST