म्युचुअल फंड

क्या Small-Cap Fund वाकई लॉन्ग टर्म में Large-Cap Fund से ज्यादा रिटर्न देते हैं? 20 साल की स्टडी ने खोली पोल

रिपोर्ट के अनुसार, स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेहद चक्रीय (cyclical) होता है। यानी इनका प्रदर्शन समय-समय पर बदलता रहता है और हमेशा एक जैसा नहीं रहता

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अंशु   
Last Updated- June 02, 2026 | 6:10 PM IST

Small Cap vs Large Cap Funds: इक्विटी निवेश की दुनिया में लंबे समय से यह धारणा बनी हुई है कि स्मॉल-कैप फंड्स (Small-Cap Funds) लॉन्ग टर्म में लार्ज-कैप फंड्स (Large-Cap Funds) की तुलना में कहीं बेहतर रिटर्न देते हैं। यही वजह है कि ज्यादा जोखिम उठाने की क्षमता रखने वाले कई निवेशक बेहतर वेल्थ क्रिएशन की उम्मीद में अपने पोर्टफोलियो का बड़ा हिस्सा स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश करते रहे हैं।

हालांकि, हाल ही में PhonePe Wealth के Share.Market प्लेटफॉर्म द्वारा जारी एक स्टडी इस पारंपरिक सोच पर सवाल उठाती है। स्टडी के मुताबिक, पिछले 20 वर्षों में स्मॉल-कैप फंड्स ने लार्ज-कैप फंड्स से बेहतर प्रदर्शन तो किया है, लेकिन अतिरिक्त रिटर्न का अंतर अपेक्षाकृत बहुत ही कम रहा है। वहीं, इसके बदले निवेशकों को कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव और बड़े नुकसान का जोखिम उठाना पड़ा। ऐसे में यह सवाल अहम हो जाता है कि क्या स्मॉल-कैप फंड्स से मिलने वाला अतिरिक्त रिटर्न वास्तव में उनके अतिरिक्त जोखिम की भरपाई करता है?

लॉन्ग टर्म में रिटर्न का अंतर उम्मीद से कहीं कम

इस स्टडी में स्मॉल-कैप और लार्ज-कैप सेगमेंट के प्रदर्शन की तुलना करने के लिए पिछले 20 वर्षों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके लिए Nifty Small Cap 250 Total Return Index (TRI) और Nifty 100 TRI को आधार बनाया गया।

स्टडी के नतीजों के अनुसार, पिछले 20 वर्षों में Nifty Small Cap 250 TRI ने 12.54% का एनुअल रिटर्न दिया, जबकि Nifty 100 TRI का रिटर्न 11.72% रहा। यानी स्मॉल-कैप इंडेक्स ने लार्ज-कैप इंडेक्स को सालाना केवल 0.82 फीसदी अंक से ही पीछे छोड़ा। स्मॉल-कैप शेयरों को लेकर बनी हाई रिटर्न की धारणा को देखते हुए यह अंतर कई निवेशकों की अपेक्षा से काफी कम है। ये आंकड़े CRISP म्युचुअल फंड स्कोरकार्ड से प्राप्त हुए हैं।

हालांकि, कागज पर सालाना 0.82% अतिरिक्त रिटर्न आकर्षक दिख सकता है, लेकिन स्टडी का कहना है कि निवेशकों को इस अतिरिक्त कमाई की तुलना स्मॉल-कैप निवेश से जुड़े कहीं ज्यादा उतार-चढ़ाव और नुकसान के जोखिम से भी करनी चाहिए। दूसरे शब्दों में, थोड़ा बेहतर रिटर्न पाने के लिए निवेशकों को काफी ज्यादा जोखिम उठाना पड़ता है।

Table 1: Nifty Small Cap 250 TRI vs Nifty 100 TRI in Last 20 Years
Returns Volatility Maximum Drawdown
Small Cap Large Cap Small Cap Large Cap Small Cap Large Cap
12.54% 11.72% 28.81% 21.06% -75.56% -61.08%

Source: Source: CRISP MF Scorecard March 2026, ICRA MFI360 Explorer

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ज्यादा रिटर्न के साथ काफी ज्यादा जोखिम भी

स्टडी के अनुसार, स्मॉल-कैप और लार्ज-कैप निवेश के बीच जोखिम का अंतर काफी बड़ा है। रिपोर्ट में बताया गया है कि स्मॉल-कैप इंडेक्स में सालाना उतार-चढ़ाव (एनुअलाइज्ड वोलैटिलिटी) 28.81% रही, जो लार्ज-कैप इंडेक्स की 21.06% से काफी ज्यादा है। इससे भी अहम बात यह है कि स्मॉल-कैप इंडेक्स में अधिकतम गिरावट (maximum drawdown) 75.56% तक पहुंची, जबकि लार्ज-कैप इंडेक्स में यह गिरावट 61.08% रही।

इसका मतलब यह है कि बाजार में बड़ी गिरावट या कमजोर दौर के दौरान स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश करने वाले निवेशकों को ऐतिहासिक रूप से कहीं ज्यादा नुकसान और अपने पोर्टफोलियो में ज्यादा तेज गिरावट का सामना करना पड़ा है।

कुल जमा बात यह है कि स्मॉल-कैप फंड्स ने लार्ज-कैप फंड्स के मुकाबले थोड़ा बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन इसके लिए निवेशकों को काफी ज्यादा जोखिम उठाना पड़ा। ऐसे में लंबी अवधि में मिलने वाला यह अतिरिक्त रिटर्न हमेशा उस अतिरिक्त जोखिम की भरपाई नहीं कर पाता।

स्मॉल-कैप का बेहतर प्रदर्शन हमेशा नहीं रहता

स्टडी की एक और महत्वपूर्ण बात यह है कि स्मॉल-कैप फंड्स का बेहतर प्रदर्शन लगातार नहीं रहता, बल्कि यह बाजार चक्र (मार्केट साइकिल) पर काफी हद तक निर्भर करता है। तीन साल के रोलिंग पीरियड में स्मॉल-कैप इंडेक्स का लार्ज-कैप इंडेक्स के मुकाबले सालाना प्रदर्शन -17.16% से लेकर +20.52% तक रहा। वहीं, पांच साल की अवधी में यह अंतर -9.12% से +15.29% के बीच रहा, जबकि 10 साल की अवधी में यह -4.26% से +6.43% तक दर्ज किया गया।

ये आंकड़े दिखाते हैं कि यदि कोई निवेशक मार्केट साइकिल के गलत समय पर स्मॉल-कैप फंड्स में निवेश करता है, तो उसे कई वर्षों तक लार्ज-कैप फंड्स की तुलना में कमजोर रिटर्न मिल सकते हैं। भले ही, लॉन्ग टर्म में इस कैटेगरी में बेहतर ग्रोथ की संभावना मौजूद हो।

स्टडी के अनुसार, तेजी वाले बाजार (बुल रन) के दौरान स्मॉल-कैप शेयर आमतौर पर शानदार प्रदर्शन करते हैं। उदाहरण के तौर पर 2014-2017 और 2020-2024 के दौरान स्मॉल-कैप ने लार्ज-कैप को काफी पीछे छोड़ा। हालांकि, बाजार में करेक्शन या आर्थिक सुस्ती के दौर में इनका प्रदर्शन अक्सर तेजी से कमजोर पड़ जाता है और ये लार्ज-कैप शेयरों से पिछड़ जाते हैं।

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स्मॉल-कैप में सही समय पर निवेश क्यों जरूरी?

रिपोर्ट की सबसे महत्वपूर्ण टिप्पणियों में से एक यह है कि स्मॉल-कैप शेयरों का प्रदर्शन बेहद चक्रीय (cyclical) होता है। यानी इनका प्रदर्शन समय-समय पर बदलता रहता है और हमेशा एक जैसा नहीं रहता।

शोधकर्ताओं ने पाया कि स्मॉल-कैप के पिछले और भविष्य के रिटर्न के बीच एक नेगेटिव संबंध देखने को मिलता है। इसका मतलब है कि जिस अवधि में स्मॉल-कैप ने बेहद शानदार प्रदर्शन किया हो, उसके बाद अक्सर इनके रिटर्न अपेक्षाकृत कमजोर पड़ जाते हैं। वहीं, जब यह सेगमेंट लंबे समय तक कमजोर प्रदर्शन करता है, तो उसके बाद बेहतर रिटर्न मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

‘बाय एंड होल्ड’ की स्ट्रैटेजी पर सवाल?

रिपोर्ट में सामने आने वाले यह तथ्य इक्विटी निवेश में लोकप्रिय ‘बाय एंड होल्ड’ (खरीदो और लंबे समय तक बनाए रखो) रणनीति पर सवाल खड़ा करते हैं, खासकर स्मॉल-कैप निवेश के मामले में।

रिपोर्ट के अनुसार, जो निवेशक अपने पोर्टफोलियो का प्रदर्शन बेहतर बनाना चाहते हैं, उनके लिए स्मॉल-कैप में रणनीतिक (tactical) तरीके से निवेश करना ज्यादा फायदेमंद हो सकता है। यानी जब स्मॉल-कैप शेयर लार्ज-कैप की तुलना में काफी कमजोर प्रदर्शन कर रहे हों, तब निवेश बढ़ाया जाए और जब वे लंबे समय तक शानदार प्रदर्शन कर चुके हों, तब उनमें निवेश का हिस्सा घटाने पर विचार किया जाए।

क्या अभी स्मॉल-कैप में निवेश का सही मौका है?

हालांकि स्टडी निवेशकों को स्मॉल-कैप फंड्स से जुड़े जोखिमों के प्रति आगाह करती है, लेकिन यह इस कैटेगरी को पूरी तरह खारिज नहीं करती। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले दो साल के करेक्शन और वैल्यूएशन में नरमी के बाद स्मॉल-कैप और लार्ज-कैप शेयरों के प्रदर्शन का अंतर काफी कम हो गया है। साथ ही, स्मॉल-कैप शेयरों का वैल्यूएशन अब उस स्तर की तुलना में ज्यादा संतुलित और आकर्षक नजर आ रहा है, जो तेज रैली के दौरान देखने को मिला था। जो निवेशक अगले 12-18 महीनों के लिए निवेश करना चाहते हैं, उनके लिए यह एक आकर्षक एंट्री पॉइंट हो सकता है।

स्टडी का संकेत है कि मौजूदा बाजार माहौल में चुनिंदा स्मॉल-कैप शेयरों या फंडों में निवेश का अवसर पहले की तुलना में ज्यादा आकर्षक हो सकता है। खासकर तब, जब पिछले वर्षों की तुलना में वैल्यूएशन ज्यादा उचित स्तर पर पहुंच चुके हैं।

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सही फंड का चुनाव पहले से ज्यादा महत्वपूर्ण

स्टडी यह भी बताती है कि सभी स्मॉल-कैप फंड एक जैसे नहीं होते और हर फंड एक जैसा प्रदर्शन भी नहीं करता। स्मॉल-कैप सेगमेंट में ज्यादा उतार-चढ़ाव और कंपनियों से जुड़े जोखिम अपेक्षाकृत ज्यादा होते हैं। ऐसे में सही फंड का चयन निवेशकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। रिपोर्ट निवेशकों को ऐसे फंड्स पर ध्यान देने की सलाह देती है, जिन्होंने अलग-अलग बाजार चक्रों में लगातार अच्छा प्रदर्शन किया हो और जिनकी निवेश शैली गुणवत्ता (Quality) या मूल्य (Value) आधारित हो।

CRISP फ्रेमवर्क के तहत मूल्यांकन किए गए स्मॉल-कैप फंड्स में प्रदर्शन की निरंतरता (Performance Consistency) के मामले में Nippon India Small Cap Fund सबसे बेहतर रैंक वाले फंडों में शामिल रहा। इसके बाद Invesco India Small Cap Fund, ITI Small Cap Fund और Edelweiss Small Cap Fund का स्थान रहा।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

रिपोर्ट का मुख्य संदेश यह नहीं है कि निवेशकों को स्मॉल-कैप फंड्स से पूरी तरह दूर रहना चाहिए, बल्कि यह है कि उन्हें अपनी उम्मीदें यथार्थवादी (realistic) रखनी चाहिए। ऐतिहासिक रूप से स्मॉल-कैप फंड्स ने लार्ज-कैप फंड्स की तुलना में बेहतर रिटर्न दिया है, लेकिन यह अतिरिक्त रिटर्न उतना बड़ा नहीं रहा, जितना अतिरिक्त जोखिम और उतार-चढ़ाव निवेशकों को झेलना पड़ा है।

कम जोखिम पसंद करने वाले निवेशकों (conservative investors) के लिए लार्ज-कैप फंड अब भी बेहतर विकल्प हो सकते हैं, क्योंकि इनमें जोखिम अपेक्षाकृत कम होता है। वहीं, ज्यादा जोखिम लेने वाले निवेशक स्मॉल-कैप फंड्स से फायदा उठा सकते हैं। लेकिन रिपोर्ट के अनुसार सफलता केवल लंबे समय तक निवेश बनाए रखने से नहीं मिलेगी। इसके लिए सही वैल्यूएशन पर निवेश, निवेश का सही समय चुनना और सही फंड का चयन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

कुल मिलाकर, यह धारणा कि स्मॉल-कैप फंड हमेशा लंबी अवधि में बहुत ज्यादा बेहतर रिटर्न देते हैं, ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर पूरी तरह सही साबित नहीं होती। असली फायदा सिर्फ ज्यादा स्मॉल-कैप फंड रखने में नहीं, बल्कि यह समझने में है कि उनमें कब और किस तरह निवेश किया जाए।

First Published : June 2, 2026 | 5:32 PM IST