FII Selling: भारतीय शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की बिकवाली लगातार तेज होती जा रही है। एनएसई के आंकड़ों के मुताबिक, 26 मई से 1 जून के बीच सिर्फ चार कारोबारी सत्रों में विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स सेगमेंट में 14,261 करोड़ रुपये से ज्यादा की शुद्ध बिकवाली की है।
यह बिकवाली सिर्फ रकम के लिहाज से ही बड़ी नहीं है, बल्कि इसकी रफ्तार भी बाजार की चिंता बढ़ा रही है। तुलना करें तो अक्टूबर-नवंबर 2025 में करीब 17,294 करोड़ रुपये की बिकवाली हुई थी, लेकिन उसमें 12 कारोबारी दिन लगे थे। इस बार लगभग उतनी ही बिकवाली सिर्फ चार दिन में देखने को मिली है।
जून डेरिवेटिव्स सीरीज शुरू होने के बाद से विदेशी निवेशकों ने इंडेक्स फ्यूचर्स में 91,041 लॉट की शुद्ध बिकवाली की है। इनमें से 70,315 लॉट की बिकवाली सिर्फ पिछले तीन कारोबारी सत्रों में हुई है।
निफ्टी फ्यूचर्स में भी विदेशी निवेशकों ने बड़े पैमाने पर शॉर्ट पोजिशन बनाई हैं। आंकड़ों के मुताबिक, जून सीरीज की शुरुआत से निफ्टी फ्यूचर्स में 76,209 लॉट की नई शॉर्ट पोजिशन जोड़ी गई है। इनमें से 57,429 लॉट सिर्फ पिछले तीन सत्रों में जुड़े हैं।
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एचडीएफसी सिक्योरिटीज के डिप्टी वाइस प्रेसिडेंट नंदीश शाह का कहना है कि चुनौतियों के बावजूद विदेशी निवेशकों के लिए भारत की लंबी अवधि की कहानी खत्म नहीं हुई है। हालांकि फिलहाल वे भारत की तुलना में कोरिया, ताइवान और जापान जैसे बाजारों को ज्यादा आकर्षक मान रहे हैं।
नंदीश शाह के मुताबिक, ऊंचे कच्चे तेल के दाम, मानसून को लेकर अनिश्चितता, दूसरे एशियाई बाजारों की तुलना में भारतीय शेयरों का महंगा वैल्यूएशन और कंपनियों की कमाई पर दबाव जैसे कारक विदेशी निवेशकों को सतर्क बना रहे हैं।
उन्होंने कहा, “विदेशी निवेशक नकद और फ्यूचर्स दोनों सेगमेंट में हर मौके पर बिकवाली कर रहे हैं। उन्हें कोरिया, ताइवान और जापान जैसे बाजार ज्यादा आकर्षक लग रहे हैं, क्योंकि वहां वैल्यूएशन अपेक्षाकृत बेहतर है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी निवेश संभावनाएं भी ज्यादा हैं।”
शाह का मानना है कि अगले तीन महीनों में निफ्टी अपने एशियाई साथियों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन कर सकता है। उनके अनुसार निफ्टी की तेजी फिलहाल 24,800 के आसपास सीमित रह सकती है, जबकि किसी नकारात्मक घटनाक्रम की स्थिति में यह 22,200 तक फिसल सकता है।
लगातार बिकवाली का असर बाजार पर भी दिख रहा है। पिछले चार कारोबारी सत्रों में निफ्टी करीब 2.7 फीसदी टूट चुका है। इस दौरान सूचकांक अपने 20, 50, 100 और 200 दिन के प्रमुख मूविंग एवरेज के नीचे फिसल गया है, जिसे तकनीकी विश्लेषक कमजोरी का संकेत मानते हैं।
एसबीआई सिक्योरिटीज के तकनीकी और डेरिवेटिव्स रिसर्च प्रमुख सुदीप शाह का कहना है कि कई तकनीकी संकेतक भी फिलहाल बाजार में कमजोरी की ओर इशारा कर रहे हैं।
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उनके मुताबिक, “रिलेटिव स्ट्रेंथ इंडेक्स (RSI) फिसलकर 40 पर आ गया है, जो बाजार में कमजोर होती गति को दिखाता है। वहीं एवरेज डायरेक्शनल इंडेक्स (ADX) भी मंदी का संकेत दे रहा है। DI- और DI+ के बीच का अंतर बढ़ रहा है, जिससे साफ है कि इस समय बाजार में बिकवालों का दबदबा बना हुआ है।”
सुदीप शाह के अनुसार निफ्टी के लिए 23,100-23,050 का स्तर तत्काल सपोर्ट है। अगर यह स्तर टूटता है तो इंडेक्स 22,950 और फिर 22,800 तक जा सकता है। वहीं ऊपर की ओर 23,350-23,400 का दायरा तत्काल रुकावट का काम कर सकता है।
विदेशी निवेशकों का लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो भी करीब तीन महीने के निचले स्तर पर पहुंच गया है। यह रेशियो 0.11 पर है, जिसका मतलब है कि उनकी लगभग 89 फीसदी खुली पोजिशन गिरावट के दांव यानी शॉर्ट साइड पर हैं।
सुदीप शाह ने कहा, “FII का लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो 29 मई के 11.98 फीसदी से घटकर 1 जून को 9.69 फीसदी पर आ गया है। खास बात यह है कि पिछले तीन कारोबारी सत्रों में इंडेक्स फ्यूचर्स में लगातार शॉर्ट बिल्ड-अप देखने को मिला है, जो बढ़ती मंदी की धारणा को दर्शाता है।”
इसके उलट, खुदरा निवेशकों का रुख अब भी सकारात्मक बना हुआ है। उनका लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो दो महीने के उच्च स्तर 2.96 पर पहुंच गया है, यानी हर एक शॉर्ट पोजिशन के मुकाबले लगभग तीन लॉन्ग पोजिशन मौजूद हैं। वहीं घरेलू संस्थागत निवेशकों (DII) और प्रोप्राइटर्स का लॉन्ग-शॉर्ट रेशियो क्रमशः 2.02 और 1.42 है।