पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस्लामाबाद में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची से मुलाकात की। (25 अप्रैल 2026, फोटो: रॉयटर्स)
US-Iran War: अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने ईरान की ओर से दिए गए हालिया शांति प्रस्ताव को “अपर्याप्त” करार दिया है। अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि यदि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को लेकर बड़े बदलाव नहीं करता है, तो कूटनीतिक बातचीत टूट सकती है और सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू होने की संभावना भी बन सकती है।
अमेरिकी वेबसाइट Axios की रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने अपना प्रस्ताव पाकिस्तान के मध्यस्थों के जरिए भेजा था। लेकिन इस प्रस्ताव में पिछले रुख की तुलना में बहुत कम बदलाव किए गए थे। एक वरिष्ठ अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि इस प्रस्ताव में सबसे बड़ी चिंता वाले मुद्दों, खासकर यूरेनियम संवर्धन और परमाणु गतिविधियों पर स्पष्ट समाधान नहीं दिया गया है।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि फिलहाल अमेरिका और ईरान किसी अंतिम समझौते की विस्तृत शर्तों पर बातचीत नहीं कर रहे हैं। दोनों पक्ष अभी केवल आगे की संभावित वार्ता के लिए एक शुरुआती ढांचा तैयार करने की कोशिश कर रहे हैं।
इस पूरे मामले में पाकिस्तान एक महत्वपूर्ण मध्यस्थ के रूप में सामने आया है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी कुछ दिनों तक ईरान में रहे और वहां से लौटने के बाद उन्होंने दोनों देशों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान किया।
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बातचीत में सबसे बड़ा मुद्दा ईरान का परमाणु कार्यक्रम है। अमेरिका लगातार मांग कर रहा है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन को या तो सीमित करे या रोक दे और कड़ी निगरानी स्वीकार करे। वहीं ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम उसका संप्रभु अधिकार है और वह इसे पूरी तरह छोड़ने या कमजोर करने को तैयार नहीं है।
पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें कमजोर होती दिख रही हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल ही में ईरान को चेतावनी देते हुए कहा है कि अब समय तेजी से खत्म हो रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि अगर बातचीत में कोई ठोस प्रगति नहीं होती है तो अमेरिका सैन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकता है और कार्रवाई और सख्त हो सकती है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक Iran ने किसी भी बड़े परमाणु समझौते से पहले कुछ अहम शर्तें रखी हैं। ईरान चाहता है कि पहले उसके खिलाफ लगाए गए सभी प्रतिबंध पूरी तरह हटाए जाएं। इसके साथ ही वह चाहता है कि उसे तेल निर्यात दोबारा शुरू करने की पूरी आजादी मिले।
ईरान की मांग है कि भविष्य में उस पर किसी तरह के हमले न हों और सुरक्षा की पक्की गारंटी दी जाए। तेहरान का कहना है कि बिना इन शर्तों के वह किसी बड़े समझौते पर आगे नहीं बढ़ेगा।
ईरानी अधिकारियों ने यह भी साफ किया है कि अगर बातचीत सफल नहीं होती है तो देश किसी भी संभावित संघर्ष के लिए तैयार है। उनका कहना है कि मौजूदा हालात में राष्ट्रीय हितों की रक्षा उनकी पहली प्राथमिकता है।
दूसरी तरफ अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि अभी किसी बड़े समझौते की संभावना दूर नजर आ रही है। उनका कहना है कि ईरान पर दबाव बनाए रखना जरूरी है ताकि वह एक व्यापक और स्पष्ट प्रस्ताव के साथ बातचीत की मेज पर आए।
फिलहाल दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है, लेकिन स्थिति अब भी जटिल बनी हुई है। एक तरफ अमेरिका सख्त रुख अपनाए हुए है, वहीं ईरान अपनी शर्तों पर अड़ा हुआ है। ऐसे में कूटनीतिक समाधान की राह आसान नहीं दिख रही है और आने वाले दिनों में तनाव और बढ़ सकता है।