ब्रिक्स देशों के समूह ने पश्चिम एशिया में लगातार बढ़ते तनाव पर गहरी चिंता जताई है और ज्यादा से ज्यादा संयम बरतने की अपील की है। उन्होंने ऐसे कदमों से बचने का अनुरोध किया है जिनसे हालात और बिगड़ सकते हों।
ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अपनाए गए दिल्ली घोषणापत्र में कहा गया है कि संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों और सिद्धांतों के अनुसार संप्रभुता और देशों की क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान किया जाए, नागरिकों और नागरिक सुविधाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।
घोषणापत्र में कहा गया है, ‘हम क्षेत्र में स्थायी शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए दीर्घावधि सहमति की दिशा में संवाद और कूटनीति के माध्यम से प्रयास बढ़ाने को प्रोत्साहित करते हैं। हम अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार वैश्विक व्यापार, आपूर्ति श्रृंखलाओं और ऊर्जा की सुचारू आवाजाही को बनाए रखने के लिए मिलकर काम करने की जरूरत पर जोर देते हैं।’
11 सदस्यीय समूह ने घोषणा में कहा कि वे ऊर्जा सुरक्षा को सामाजिक और आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और सभी राष्ट्रों की भलाई के महत्त्वपूर्ण आधार के रूप में मान्यता देते हैं। घोषणा में कहा गया है, ‘हम ऊर्जा बाजार की स्थिरता सुनिश्चित करने और विविध स्रोतों से ऊर्जा के निर्बाध प्रवाह, मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, महत्त्वपूर्ण ऊर्जा बुनियादी ढांचे, जिसमें दूसरे देशों के बुनियादी ढांचे भी शामिल हैं, की मजबूती और सुरक्षा को सुनिश्चित करते हुए ऊर्जा सुरक्षा बढ़ाने पर जोर देते हैं।’
ब्रिक्स देशों ने स्वीकार किया कि जीवाश्म ईंधन दुनिया के ऊर्जा मिश्रण में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता रहेगा, विशेषकर उभरते बाजारों और विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए। उन्होंने जलवायु लक्ष्यों के अनुरूप ऊर्जा संबंधित बदलाव और ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने की आवश्यकता बताई। साथ ही, तकनीक सबकी वाले सिद्धांतों और साझा लेकिन अलग-अलग जिम्मेदारियों एवं राष्ट्रीय परिस्थितियों, आवश्यकताओं और प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर संबंधित क्षमताओं का ध्यान रखा जाएगा ।
नई दिल्ली घोषणापत्र ने संतुलित और विविध ऊर्जा मिश्रण के महत्त्व को स्पष्ट किया है। यह घोषणापत्र राष्ट्रीय परिस्थितियों को दर्शाता है और ऊर्जा के विविध स्रोतों को स्वीकार करता है, जिनमें नवीकरणीय ऊर्जा, जैव ऊर्जा, जीवाश्म ईंधन, परमाणु ऊर्जा, जलविद्युत, हाइड्रोजन, कम कार्बन वाली टेक्नॉलजी और ऊर्जा भंडारण टेक्नॉलजी शामिल हैं। ये सभी स्रोत एसडीजी (सतत विकास लक्ष्यों) की प्राप्ति और ऊर्जा सुरक्षा में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
घोषणापत्र में कहा गया है, ‘हम ऊर्जा के मामले में विचार-विमर्श के माध्यम से सभी उपलब्ध ऊर्जा स्रोतों, सुदृढ़ ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं और ब्रिक्स देशों के बीच व्यापक सहयोग की भूमिका पर जोर देते हैं। इस संबंध में, हम शून्य और निम्न-उत्सर्जन हाइड्रोजन के लिए इंटरऑपरेबल मानकों और प्रमाणन ढांचों पर ब्रिक्स सहयोग को बढ़ावा देते हैं और इस संबंध में हाइड्रोजन मूल्य श्रृंखलाओं पर ब्रिक्स संयुक्त रिपोर्ट पर जारी कार्य की सराहना करते हैं।’
ब्रिक्स के सदस्य देशों ने इस बात पर भी जोर दिया कि जरूरी खनिजों की ऐसी आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा दिया जाए जो भरोसेमंद, जिम्मेदार, विविध, मजबूत, निष्पक्ष, टिकाऊ और न्यायसंगत हों।
