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ई-कॉमर्स शुल्क पर भारत का रुख नरम, लंबी मोहलत पर करेगा विचार

डब्ल्यूटीओ की मोहलत के तहत सदस्य देश सीमा पार इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क नहीं लगाते हैं

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श्रेया नंदी   
Last Updated- April 03, 2026 | 12:02 AM IST

हाल में संपन्न विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन (एमसी14) में भारत ने अपने रुख में नरमी का संकेत दिया। भारत ई-कॉमर्स पर शुल्क के लिए मोहलत की अवधि बढ़ाने के लिए एक लंबी समय-सीमा पर विचार करने के लिए तैयार दिखा ताकि कारोबारियों को लंबी अव​धि की योजना बनाने में मदद मिल सके।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आज कहा, ‘भारत का रुख बिल्कुल स्पष्ट था कि हमें थोड़ी लंबी अवधि पर विचार करना चाहिए ताकि कारोबारी अपनी व्यावसायिक गतिविधियों के लिए लंबी अवधि की योजना बना सकें।’

उन्होंने कहा, ‘हमने मंत्रियों के बीच इस मुद्दे पर चर्चा की। सामान्य तौर पर हमारी राय यह थी कि कारोबारियों के लिए अधिक निश्चितता और पूर्वानुमान सुनि​श्चित करने के लिए हमें इस बार एक लंबी अवधि पर विचार करना चाहिए। मगर इस मुद्दे पर अभी भी विभिन्न देशों के बीच चर्चा चल रही है। अगले एक या दो महीनों में इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा।’

डब्ल्यूटीओ के 14वें मंत्रिस्तरीय सम्मेलन का आयोजन कैमरून के याउंडे में 26 से 30 मार्च तक आयोजित किया गया। मगर मंत्रिस्तरीय घोषणा हुए बिना यह सम्मेलन संपन्न हो गया क्योंकि सदस्य देश समय के अभाव के कारण ई-कॉमर्स सीमा शुल्क पर विवादास्पद रोक सहित प्रमुख मुद्दों पर आम सहमति बनाने में विफल रहे। हालांकि अन्य मुद्दों के साथ शुल्क में मोहलत पर बातचीत जिनेवा में डब्ल्यूटीओ के मुख्यालय में जारी रहेगी। बाद में इसे याउंडे पैकेज के तहत घोषित किया जाएगा।

डब्ल्यूटीओ की मोहलत के तहत सदस्य देश सीमा पार इलेक्ट्रॉनिक ट्रांसमिशन पर सीमा शुल्क नहीं लगाते हैं। लगभग तीन दशक से सदस्य देश हर दो साल में इसे बढ़ाने पर सहमत होते रहे हैं। मगर इस बात पर उनकी राय अलग-अलग रही है कि इसे जारी रहना चाहिए या नहीं। भारत ने राजस्व नुकसान संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए लंबी अवधि की मोहलत का विरोध जारी रखा।

अमेरिका सहित अधिकतर विकसित देश चाहते हैं कि इस मोहलत को स्थायी बना दिया जाए। अमेरिका ई-कॉमर्स शुल्क पर मोहलत को स्थायी बनाने के लिए दमदार तरीके से जोर दे रहा है, जबकि भारत केवल एक अस्थायी विस्तार को स्वीकार करने के लिए तैयार है।

अमेरिकी व्यापार मंत्री जेमीसन ग्रीर ने पिछले सप्ताह कहा था, ‘मैं स्पष्ट तौर पर कहना चाहता हूं कि अमेरिका इस मोहलत को एक और अस्थायी विस्तार देने के पक्ष में नहीं है। इससे हमारे कारोबारियों को कारोबार के परिचालन के लिए आवश्यक निश्चितता नहीं मिलेगी। यह डब्ल्यूटीओ के रुख को और कमजोर करेगा।’

इस सप्ताह के आरंभ में ग्रीर ने यह भी कहा कि अमेरिका इस मुद्दे पर सभी इच्छुक व्यापार साझेदारों के साथ डब्ल्यूटीओ के बाहर काम करेगा और एक बहुपक्षीय ई-कॉमर्स मोहलत समझौते के लिए प्रतिबद्धता जाहिर करेगा।

डब्ल्यूटीओ में सुधार संबंधी चर्चाओं के तहत कुछ विकसित देशों द्वारा बहुपक्षीय समझौते लाए जाने के दबाव के बीच गोयल ने कहा कि ऐसी व्यवस्थाओं को कुछ सुरक्षात्मक उपायों के साथ संचालित होना चाहिए।

First Published : April 2, 2026 | 11:58 PM IST