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GSTN ने नई E-Way Bill सुविधाएं वापस लीं, फिलहाल पुराने नियम ही रहेंगे लागू

जीएसटीएन ने 17 मई की अपनी एडवाइजरी इन बदलावों का प्रस्ताव किया था और पिछले 2 महीनों में जारी कई एडवाइजरी के माध्यम से इनके बारे में स्पष्टीकरण और एफएक्यू भी जारी किए गए थे

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मोनिका यादव   
Last Updated- July 30, 2026 | 11:33 PM IST

वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (जीएसटीएन) ने तकनीक और बिजनेस प्रॉसेस को लेकर उद्योग की चिंताओं के चलते इलेक्ट्रॉनिक वे बिल (ई-वे बिल) में पेश की गई नई सुविधाओं को फिलहाल रोक दिया है। ये बदलाव मूल रूप से 1 अगस्त से लागू होने थे।

जीएसटी व्यवस्था के तहत निर्धारित मूल्य से अधिक के माल की आवाजाही के लिए ई-वे बिल एक इलेक्ट्रॉनिक दस्तावेज है। जीएसटीएन ने बुधवार को जारी एक परामर्श में कहा कि करदाताओं को पिछले परामर्श के आधार पर अपने सिस्टम में कोई बदलाव करने की आवश्यकता नहीं है और उन्हें इस सिलसिले में आगे की सूचना तक इंतजार करना करना होगा।

ई-वे बिल नियमों में प्रस्तावित बदलावों के तहत व्यवसायों के लिए यह जरूरी कर दिया गया कि वे माल पाने वाले अंतिम व्यक्ति का जीएसटी रजिस्ट्रेशन नंबर दें। ऐसा तब जरूरी होगा जब इनवॉइस किसी एक पार्टी के नाम पर बनाया गया हो, लेकिन माल किसी दूसरी पार्टी को या उसी पार्टी की किसी दूसरी जगह पर पहुंचाया जाना हो।

जीएसटीएन ने माल की डिलीवरी के बाद ई-वे बिल को बंद करने की एक स्वैच्छिक सुविधा भी शुरू की है। जीएसटीएन ने 17 मई की अपनी एडवाइजरी इन बदलावों का प्रस्ताव किया था और पिछले 2 महीनों में जारी कई एडवाइजरी के माध्यम से इनके बारे में स्पष्टीकरण और एफएक्यू भी जारी किए गए थे। जीएसटीएन ने कहा कि एफएक्यू सहित प्रस्तावित नई सुविधाओं से संबंधित सभी परामर्श जीएसटी पोर्टल से वापस ले लिए जाएंगे।

पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रशांत अग्रवाल ने कहा कि इस फैसले से व्यवसायों को बदलावों के लिए तैयार होने का समय मिलेगा। उन्होंने कहा, ‘प्रस्तावित बदलावों के लिए कंपनियों के एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग (ईआरपी) सिस्टम, ग्राहक डेटाबेस और व्यावसायिक प्रक्रियाओं में संशोधन की आवश्यकता होती है, जिसके लिए कार्यान्वयन और परीक्षण के लिए पर्याप्त समय की आवश्यकता होती है। इसे स्थगित करने का निर्णय उद्योग की चिंताओं के साथ जुड़ने की उसकी इच्छा को दर्शाता है।

इसके अलावा कुछ सत्यापन, विशेष रूप से ‘बिल-टू/शिप-टू’ लेनदेन में जहां बिलिंग और वितरण स्थान एक ही जीएसटीआईएन हो सकते हैं, पर उद्योग से व्यापक परामर्श के बाद पुनर्विचार किया जाना चाहिए। कम से कम तीन से छह महीने की संक्रमण अवधि सुचारु कार्यान्वयन सुनिश्चित करने में मदद करेगी।’

उद्योग समूहों ने बदलावों को लागू करने के लिए और समय मांगा था। उनका तर्क था कि व्यवसायों को अपने ईआरपी सिस्टम में बदलाव करना होगा, ग्राहक डेटाबेस को अपडेट करना होगा और रोलआउट से पहले व्यापक परीक्षण करना होगा। उन्होंने ‘शिप-टू’ जीएसटीआईएन विवरण एकत्र करने, व्यावसायिक गोपनीयता और प्रस्तावित सत्यापन से उत्पन्न होने वाली अनुपालन चुनौतियों जैसी व्यावहारिक चिंताओं को भी उठाया था।

First Published : July 30, 2026 | 11:29 PM IST