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UPI पेमेंट पर चार्ज को लेकर हैं कंफ्यूज? आपके मन में उठ रहे हर सवाल का जवाब यहां जान लीजिए

UPI पर MDR चार्ज की चर्चा तेज है। लेकिन सवाल यह है कि 2,000 रुपये से ज्यादा पेमेंट पर क्या बदल सकता है, किसे चार्ज देना पड़ सकता है और इसका असर कितना होगा

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ऋषभ राज   
Last Updated- September 15, 2026 | 6:46 PM IST

देश में UPI पेमेंट को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। लोगों में मन में यह सवाल है कि क्या भविष्य में 2,000 रुपये से ज्यादा का UPI पेमेंट करने पर चार्ज देना पड़ेगा। इसकी वजह है वित्त मंत्रालय का 14 सितंबर का नोटिफिकेशन, जिसमें बताया गया कि 2000 रुपये से कम के UPI पेमेंट पर कोई चार्ज नहीं लगेगा।

इसके बाद लोगों ने सवाल करना शुरू किया कि क्या आगे 2000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करने पर सरकार चार्ज लेगी। हालांकि, नोटिफिकेशन में यह जिक्र नहीं है कि कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर अब तुरंत चार्ज लगने लगेगा। तो नई व्यवस्था में क्या बदलने वाला है, चर्चा में जो MDR टर्म आ रहा है, इसका क्या मतलब है और इसका असर आम UPI यूजर पर कितना पड़ेगा, आइए समझते हैं।

नोटिफिकेशन में क्या कहा गया है?

यह नोटिफिकेशन ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट’ के सेक्शन 10A में किए गए बदलाव के बाद जारी किया गया है। हालांकि, सरकार ने अभी यह साफ नहीं किया है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर दुकानदार या मर्चेंट से चार्ज लिया जाएगा या नहीं।

इसका मतलब यह नहीं है कि 2,000 रुपये से ज्यादा का हर UPI पेमेंट अब चार्जेबल हो गया है। खास तौर पर एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति यानी P2P ट्रांसफर पहले की तरह फ्री रहेंगे।

हालांकि, सरकार बार-बार कहती रही है कि आम लोगों के लिए UPI फ्री ही रहेगा। अगर MDR यानी मर्चेंट डिस्काउंट रेट लागू किया जाता है तो यह बहुत कम होगा और एक तय सीमा से ज्यादा के कुछ खास मर्चेंट लेनदेन पर ही लागू होगा।

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MDR क्या होता है और इसका पैसा कौन देता है?

MDR यानी ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ वह चार्ज है जो डिजिटल पेमेंट को प्रोसेस करने के लिए लिया जाता है। आम तौर पर यह पैसा ग्राहक से नहीं, बल्कि जिस दुकानदार या मर्चेंट को पेमेंट मिल रहा है, उससे लिया जाता है।

जनवरी 2020 से सरकार ने 30 दिसंबर 2019 की गजट नोटिफिकेशन के जरिए रूपे डेबिट कार्ड और UPI के P2M यानी व्यक्ति से दुकानदार या मर्चेंट को किए जाने वाले पेमेंट पर MDR खत्म कर दिया था।

यह जीरो-MDR व्यवस्था इनकम टैक्स एक्ट के सेक्शन 269SU के तहत लागू की गई थी। अब नई नोटिफिकेशन में खास तौर पर 2,000 रुपये तक के UPI लेनदेन पर इस चार्ज-फ्री व्यवस्था को फिर से साफ किया गया है।

कितना चार्ज लग सकता है?

अभी यह तय नहीं हुआ है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI पेमेंट पर कितना MDR लगेगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नोटिफिकेशन जारी होने के अगले ही दिन यानी आज NPCI ने इस मुद्दे पर बैठक बुलाई। इस मामले में अंतिम फैसला ‘UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी’ करेगी। इस कमेटी की अगुवाई NPCI करता है। इसमें बैंकों के अलावा फोनपे, गूगल पे, पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया और इंडियन बैंक्स एसोसिएशन समेत 22 मेंबर हैं।

फिलहाल MDR की दर को लेकर सिर्फ अनुमान सामने आए हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI लेनदेन पर करीब 0.4 प्रतिशत MDR लगाए जाने के संकेत हैं। अगर ऐसा होता है तो किराना दुकानों और परिवहन जैसी रोजमर्रा की छोटी पेमेंट इससे बाहर रह सकती हैं।

बाकी इंडस्ट्री के अलग-अलग अनुमान के मुताबिक MDR की दर 0.25 से 0.4 प्रतिशत के बीच हो सकती है। वहीं, कुछ प्रस्तावों में बड़े मर्चेंट के लिए 0.3 से 0.5 प्रतिशत तक MDR लगाने की बात भी सामने आई है।

इसे उदाहरण से समझ लेते हैं। अगर मान लीजिए कि MDR चार्ज 0.4 प्रतिशत रहता है तो 20000 रुपये के पेमेंट पर 80 रुपये का MDR लग सकता है। हालांकि, यह अभी तय नहीं है कि यह किसे देना होगा, यानी आम लोगों को या फिर कारोबारी को।

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कितने लेनदेन पर पड़ेगा असर?

रॉयटर्स के सूत्रों के मुताबिक, करीब 96 प्रतिशत UPI लेनदेन MDR के दायरे से बाहर रह सकते हैं। यानी इसका असर केवल 4 से 5 प्रतिशत बड़े व्यापारियों पर पड़ने की संभावना है। वित्त वर्ष 2026 के आंकड़ों के अनुसार, कुल UPI लेनदेन की रकम में से करीब 19.5 प्रतिशत हिस्सा ही संभावित MDR के दायरे में आता है।

2,000 रुपये से ज्यादा के संभावित MDR वाले लेनदेन की कुल रकम करीब 61.13 लाख करोड़ रुपये है। अगर इस रकम पर 0.25 से 0.50 प्रतिशत की दर से MDR लगाया जाता है तो इससे करीब 15,000 करोड़ रुपये से 30,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व मिल सकता है।

हालांकि, अभी यह तय नहीं हुआ है कि MDR हर मर्चेंट पर लगेगा या सिर्फ कुछ खास मर्चेंट पर। एक प्रस्ताव यह है कि चार्ज तभी लिया जाए, जब लेनदेन 2,000 रुपये से ज्यादा का हो और पेमेंट पाने वाला बड़ा मर्चेंट हो। दूसरा विकल्प यह है कि मर्चेंट के सालाना कारोबार यानी टर्नओवर के आधार पर तय किया जाए कि उस पर MDR लगेगा या नहीं।

सरकार पहले संकेत दे चुकी है कि छोटे दुकानों पर होने वाले छोटे पेमेंट को इस दायरे से बाहर रखा जाएगा। हालांकि, 14 सितंबर की नोटिफिकेशन में यह साफ तौर पर नहीं कहा गया है कि MDR सिर्फ बड़े मर्चेंट पर ही लागू होगा।

सरकार क्यों करना चाहती है ऐसा?

सरकार का कहना है कि UPI सिस्टम को चलाने में लगातार खर्च बढ़ रहा है। इसके लिए तकनीकी सिस्टम को मजबूत करने, साइबर सुरक्षा और ऑनलाइन धोखाधड़ी रोकने पर भी काफी पैसा खर्च होता है। ऐसे में UPI के लिए कमाई का ऐसा मॉडल जरूरी है, जिससे यह सिस्टम लंबे समय तक आसानी से चलता रहे।

सरकार पहले भी संकेत दे चुकी है कि अगर MDR लागू किया जाता है तो इसके बहुत ज्यादा रखने की संभावना नहीं है। यह करीब 0.25 से 0.4 प्रतिशत के बीच रह सकता है। इसका खर्च मर्चेंट या पूरे पेमेंट सिस्टम के स्तर पर उठाया जा सकता है।

उद्योग के मुताबिक, अभी जीरो-MDR व्यवस्था की वजह से सालाना करीब 20,700 करोड़ रुपये का खर्च आता है। वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 में 24,000 करोड़ से ज्यादा UPI लेनदेन हुए। इन सभी लेनदेन की कुल रकम करीब 314 लाख करोड़ रुपये रही।

First Published : September 15, 2026 | 6:41 PM IST