सरकार डिजिटल पेमेंट के सबसे बड़े माध्यम यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) पर बड़े ट्रांजैक्शन के लिए चार्ज लगाने की तैयारी कर रही है। मामले से जुड़े तीन सूत्रों के मुताबिक, देश की पेमेंट अथॉरिटी मंगलवार को बैंकों और पेमेंट कंपनियों के साथ इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है। बैठक में बड़े ट्रांजैक्शन पर कितना चार्ज लगाया जाए और उससे मिलने वाली रकम को बैंकों, पेमेंट ऐप और दूसरी कंपनियों के बीच किस तरह बांटा जाए, इस पर बात हो रही है।
यह चर्चा ऐसे समय हो रही है, जब भारत ने सोमवार को पेमेंट से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत अब 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाने की इजाजत मिल गई है। अभी तक UPI के जरिए होने वाले सभी पेमेंट पूरी तरह फ्री थे।
0.4% तक चार्ज लगाने पर विचार
सूत्रों के मुताबिक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करीब 0.4 फीसदी चार्ज लगाने के पक्ष में हैं। हालांकि, अभी अंतिम चार्ज तय नहीं हुआ है। इस चार्ज से मिलने वाली रकम में बैंकों, पेमेंट ऐप और मर्चेंट पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर की हिस्सेदारी कितनी होगी, यह भी अभी तय होना बाकी है।
मामले से जुड़े एक सूत्र के मुताबिक, कुल चार्ज का 40 फीसदी हिस्सा बैंकों को मिल सकता है। बाकी पैसा पेमेंट ऐप और मर्चेंट पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर के बीच बराबर बांटे जाने की संभावना है।
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हालांकि, हर तरह के UPI पेमेंट पर चार्ज लगाने की योजना नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, दुकानदार या कारोबारी को किए जाने वाले पेमेंट यानी ‘पर्सन-टू-मर्चेंट’ ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगाया जा सकता है। वहीं, दो लोगों के बीच होने वाले ‘पीयर टू पीयर’ पेमेंट पहले की तरह फ्री रह सकते हैं।
अगस्त में हुए 24 अरब UPI पेमेंट
UPI भारत में डिजिटल पेमेंट का सबसे बड़ा प्लेटफॉर्म बन चुका है। अगस्त में UPI के जरिए करीब 24 अरब पेमेंट हुए, जिनकी कुल रकम लगभग 311 अरब डॉलर रही। बड़े ट्रांजैक्शन पर चार्ज लगने से बैंकों और पेमेंट कंपनियों के लिए कमाई का एक नया जरिया खुल सकता है।
ब्रोकरेज फर्म जेफरीज के एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस चार्ज से पेमेंट इंडस्ट्री को हर साल 5,000 करोड़ से 10,000 करोड़ रुपये तक की अतिरिक्त कमाई हो सकती है।
इस बदलाव का फायदा पेटीएम और पाइन लैब्स जैसी कंपनियों को मिल सकता है। इससे बैंकों की कमाई का एक नया रास्ता भी खुल सकता है। वहीं, IPO की तैयारी कर रही फोनपे और रोजरपे के कारोबार की संभावनाओं पर भी इसका असर पड़ सकता है।
भारत के UPI मार्केट में वॉलमार्ड समर्थित फोनपेट, अल्फाबेट की गूगल पे, पेटीएम और मेटा की CRED जैसे बड़े पेमेंट ऐप हैं। इनमें कई कंपनियों को विदेशी निवेश भी मिला हुआ है।
मामले से जुड़े तीनों सूत्रों ने अपनी पहचान सार्वजनिक नहीं करने की शर्त पर जानकारी दी है, क्योंकि उन्हें मीडिया से बात करने की इजाजत नहीं है। इस मामले में पूछे गए ईमेल का NPCI और RBI ने तुरंत जवाब नहीं दिया।
(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)
