विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जगदीशन ने बैंक के बोर्ड को बताया कि पिछले 35 साल उनके लिए बहुत अच्छे रहे।
भारत में निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी के तौर पर शशिधर जगदीशन का कार्यकाल अक्टूबर में खत्म हो रहा है। दोबारा चुने जाने के बारे में महीनों से चल रही अटकलों पर विराम लगाते हुए जगदीशन ने बीते शनिवार को बैंक के बोर्ड को बताया कि वह नया कार्यकाल नहीं चाहते हैं। घटनाक्रम से अवगत सूत्रों ने बताया कि जगदीशन ने बैंक के बोर्ड से कहा कि वह चाहते हैं कि कोई नया नेतृत्व बैंक की कमान संभाले और उसे आगे ले जाए क्योंकि पिछले छह महीनों में बैंक से जुड़े विभिन्न मुद्दों का समाधान हो चुका है।
विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार जगदीशन ने बैंक के बोर्ड को बताया कि पिछले 35 साल उनके लिए बहुत अच्छे रहे। एमडी एवं सीईओ के रूप में पिछले छह वर्ष विशेष रूप से महत्त्वपूर्ण रहे हैं और उनके कार्यकाल में बैंक ने कई अहम उपलब्धियां हासिल की हैं। इनमें बैंक की तकनीकी प्रणालियों को दुरुस्त करना और एचडीएफसी लिमिटेड के साथ विलय को पूरा करना शामिल है।
दुर्भाग्य से पिछले पांच-छह महीने बैंक के लिए अच्छे नहीं रहे और वह चाहते थे कि इन मसलों के समाधान के बाद ही कोई कदम उठाएं। जगदीशन ने बोर्ड को बताया कि अब इन मुद्दों का समाधान हो चुका है ऐसे में कोई नया व्यक्ति बिना किसी पूर्वग्रह के जिम्मेदारी संभालकर बैंक को आगे ले जा सकता है।
वित्त वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट में जगदीशन ने उल्लेख किया था कि एचडीएफसी बैंक ने तकनीक और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) को अलग-अलग क्षमताओं के रूप में देखने के बजाय सीधे अपनी प्रणालियों, कार्य और निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल करना शुरू कर दिया है। जगदीशन ने यह भी बताया था कि तकनीक के मोर्चे पर बैंक द्वारा की जा रही विभिन्न पहल उसे अधिक तेज, लचीला और एआई के लिए तैयार बैंक बनाने में मदद कर रही हैं।
यह बात इसलिए भी खास तौर पर अहम है क्योंकि जगदीशन के पद संभालने के कुछ ही महीनों बाद निजी क्षेत्र के इस सबसे बड़े बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक की नाराजगी का सामना करना पड़ा था। बैंक की इंटरनेट और मोबाइल बैंकिंग सेवाओं में बार-बार आई दिक्कतों के कारण नियामक ने दिसंबर 2020 में नए क्रेडिट कार्ड जारी करने और डिजिटल पहल शुरू करने से बैंक को रोक दिया था। एचडीएफसी बैंक को इन समस्याओं को दुरुस्त करने और पाबंदियों से बाहर निकलने में 15 महीने लग गए।
शनिवार को एचडीएफसी बैंक ने एक्सचेंजों को सूचित किया कि तमाम प्रयास के बावजूद जगदीशन ने दोहराया कि वह दोबारा नियुक्ति के लिए आवेदन नहीं करना चाहते। यह उनके पहले के रुख से अलग था। इससे पहले उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह दोबारा नियुक्ति के लिए अपनी दावेदारी पेश करेंगे। यह उस समय हुआ था जब बैंक के पूर्व अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने इस्तीफा देते हुए आरोप लगाया था कि बैंक में कुछ घटनाएं और तौर-तरीके उनके मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं थीं।
22 मार्च को चक्रवर्ती के इस्तीफे के महज चार दिन बाद बिज़नेस स्टैंडर्ड को दिए साक्षात्कार में जगदीशन ने कहा था, ‘हां, मैं तैयार हूं और पूरी ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना चाहता हूं। लेकिन मैं उस प्रक्रिया का सम्मान करता हूं जिसे अपनाया जाना जरूरी है, चाहे वह बोर्ड की प्रक्रिया हो या नियामकीय प्रक्रिया।’
स्टॉक एक्सचेंज को दी गई सूचना में बैंक ने कहा, ‘जगदीशन 26 अक्टूबर, 2026 को कारोबारी समय समाप्त होने के बाद बैंक से सेवानिवृत्त हो जाएंगे। बोर्ड ने बैंक के प्रति उनकी प्रतिबद्धता, नेतृत्व, बैंक की वृद्धि में उनके योगदान तथा देश के कॉरपोरेट क्षेत्र के सबसे बड़े विलयों में से एक को सफलतापूर्वक पूरा करने में उनकी भूमिका की सराहना की।’
इसके अलावा बैंक ने कहा कि बोर्ड ने उनके उत्तराधिकारी के चयन और नियुक्ति की प्रक्रिया को तय समय से पहले पूरा करने के काम में तेजी लाने का फैसला किया है। एक सूत्र ने कहा, ‘इस तरह के पद के लिए योग्य लोगों की संख्या बहुत कम होती है—शायद पूरे देश में केवल पांच, छह या सात लोग ही इसके योग्य हों। इसलिए विकल्प बहुत सीमित हो जाते हैं। आपको तेजी से फैसला लेना होगा क्योंकि यह सीएफओ चुनने की तुलना में कहीं अधिक मुश्किल है, जहां आपके पास 100 उम्मीदवार हो सकते हैं।’ उन्होंने आगे कहा कि जगदीशन का कार्यकाल खत्म होने में कुछ ही महीने बचे हैं, इसलिए बैंक के अंदर से योग्य उम्मीदवार को चुनना ही सबसे ज्यादा मुमकिन विकल्प लग रहा है।
सूत्र ने कहा, ‘बैंक के बोर्ड की नामांकन एवं पारिश्रमिक समिति को प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए कहा गया है और दो महीने के भीतर उत्तराधिकारी की पहचान कर ली जाएगी।’ सूत्र ने कहा कि बैंक के मौजूदा उप प्रबंध निदेशक कैजाद भरूचा ही एकमात्र ऐसे आंतरिक उम्मीदवार हैं, जो संभावित रूप से अगला एमडी एवं सीईओ पद संभाल सकते हैं।
हालांकि भरूचा को अगला एमडी एवं सीईओ नियुक्त करने में एक संभावित समस्या उनका एचडीएफसी बैंक के बोर्ड में कार्यकाल है। वह 2014 से बैंक के बोर्ड में निदेशक हैं और इस तरह आरबीआई द्वारा निदेशकों के लिए निर्धारित 15 वर्ष की अधिकतम सीमा के करीब पहुंच चुके हैं।
हालांकि नियमों में कुछ ढील दी जा सकती है जिससे उनके कार्यकाल को बढ़ाने की अनुमति मिल सके। सूत्र ने कहा कि इस तरह का विस्तार बैंक को भविष्य के लिए किसी उत्तराधिकारी को तैयार करने का पर्याप्त समय दे सकता है। 61 वर्षीय जगदीशन को पहली बार अक्टूबर 2020 में आदित्य पुरी की जगह एचडीएफसी बैंक का एमडी एवं सीईओ नियुक्त किया गया था। जगदीशन को 2023 में दोबारा इस पद पर नियुक्त किया गया था।
मार्च में तत्कालीन अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के अचानक इस्तीफे से शुरू हुए कई घटनाक्रम ने बैंक में कॉरपोरेट गवर्नेंस को लेकर सवाल खड़े किए थे। संभव है कि इन्हीं घटनाओं के चलते जगदीशन ने फिर नियुक्ति से बचने का फैसला किया हो।
चक्रवर्ती ने आरोप लगाया था कि बैंक में कुछ घटनाएं और तौर-तरीके उनके मूल्यों और नैतिक मानकों के अनुरूप नहीं थीं। हालांकि बाद में बैंक द्वारा शुरू की गई कानूनी समीक्षा में चक्रवर्ती के आरोपों का कोई आधार नहीं पाया गया।
इसके बाद एक और मामला सामने आया। बैंक की ओर से की गई आंतरिक जांच में पाया गया कि करीब 45 करोड़ रुपये महाराष्ट्र सरकार के स्वामित्व वाली महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन को ‘डिफरेंशियल इंटरेस्ट’ के रूप में वर्गीकृत मार्केटिंग खर्च के जरिये दिए गए थे। इसके बाद एचडीएफसी बैंक ने जगदीशन समेत अपने तीन वरिष्ठ कर्मचारियों को चेतावनी पत्र जारी किए और उन पर जुर्माना लगाया। हालांकि बोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि यह चूक दुर्भावनापूर्ण नहीं थी और इसे कदाचार के बजाय कारोबारी अतिरेक का मामला माना गया।