‘हम एफएमसीजी कंपनियों से टकराव नहीं करेंगे’

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 9:19 PM IST

फ्यूचर समूह के संस्थापक किशोर बियाणी देश में रिटेल क्रांति के जनक माने जाते हैं। फूड बाजार, बिग बाजार, बिग एप्पल सहित कई ब्रांड इसी समूह के हैं।
अपने ब्रांडों को बढ़ाने और नगदी जुटाने के लिए यह समूह कई तरह के उपाय अपना रहा है। मुंबई में आयोजित एक फूड फोरम में किशोर बियाणी पर रिटेल कारोबार में उनकी रणनीति को लेकर सवालों की बौछार कर दी गई। फोरम में बियाणी से पूछे गए सवालों और उनके जवाबों के संक्षिप्त अंश :
नए उत्पादों और कारोबारी रणनीति के साथ आप एफएमसीजी कंपनियों के लिए कड़ी चुनौती पेश कर रहे हैं?
हमने तय किया कि हम एफएमसीजी कंपनियों से तब तक टकराव नहीं लेंगे जब तक कि हमें उकसाया नहीं जाता। अगर एफएमसीजी कंपनियां, आधुनिक रिटेलरों को उतनी ही छूट दें जितनी किसी पानवाले को दी जाती है, तो यह रिटेलरों की उपेक्षा और उनका असम्मान है। हम ऐसी चीजें बर्दाश्त नहीं करेंगे।
ऐसी खबरें हैं कि आप अपने वैल्यू फार्मेट का विनिवेश कर सकते हैं। असल में इस क्षेत्र के बारे में आपकी योजना क्या है?
बिजनेस और प्लानिंग के क्षेत्र में हमारे पास 26 इकाइयां हैं। फिलहाल हमें धन की आवश्यकता है। हमें इन सभी इकाइयों में साझेदारों की जरूरत है। धन जुटाने के लिए हम इन सभी इकाइयों में मौजूद संभावानाएं तलाश रहे हैं।
प्राइवेट ब्रांड के बारे में आपकी रणनीति क्या है?
टूथपेस्ट में हम जल्द ही प्राइवेट लेबल लॉन्च करने जा रहे हैं। हम कोला लॉन्च कर चुके हैं। लोगों की ओर से इसे काफी बेहतर समर्थन मिला। आलू चिप्स की बात करें तो कुल बिक्री में हमारे ब्रांड की हिस्सेदारी 20 फीसदी की है। कई और उत्पादों की लॉन्चिंग होने वाली है। उम्मीद है इसके जरिए हम जहां पहुंचना चाहते हैं, वहां पहुंचने में कामयाब रहेंगे।
यूरोपीय रिटेलर केयरफोर के साथ आपके समूह के करार की बातें की जा रही थी। क्या यह सही है?
कुछ भी संभव है।
खाद्य पदार्थों के खुदरा कारोबार में आई मंदी को कैसे देखते हैं?
खाद्य पदार्थों पर मंदी का असर सबसे बाद में दिखता है। लेकिन पिछले 7-8 साल में खाद्य क्षेत्र में बमुश्किल ही कोई ऐसा मूल्यवर्द्धित उत्पाद रहा है, जिसने रिटेलरों को खूब लाभ दिया हो। संगठित रिटेल का लक्ष्य ही मूल्यवर्द्धित पदार्थों का उपभोग बढ़ाना रहा है। मंदी के चलते इसकी कीमतें सही करने में मदद मिली।
बहुराष्ट्रीय खुदरा कंपनियों की ओर से देश के रिटेल स्टोरों को मिल रही चुनौती को आप किस तरह देखते हैं? अब तो इसे विदेशी कंपनियों के लिए और ज्यादा खोलने की बातें कही जा रही हैं।
आधुनिक रिटेल स्टोरों का विचार खपत बढ़ाने और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लाया गया। यदि यह काम अंतरराष्ट्रीय रिटेलर कर सकते हैं तो यह अच्छी बात है। मेरा मानना है कि कई ऐसी कंपनियां हैं जो इस क्षेत्र और अर्थव्यवस्था को बढ़ा सकती हैं।

First Published : March 25, 2009 | 12:06 PM IST