संकटग्रस्त ऋणदाता डीएचएफएल के जेल में बंद प्रवर्तक कपिल वधावन ने कंपनी पर ऋणदाताओं के बकाये का पुनर्भुगतान करने के लिए अपनी निजी और पारिवारिक परिसंपत्ति की पेशकश की है। उनका दावा है कि इसका मूल्य 43,000 करोड़ रुपये है। वधावन ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा नियुक्त प्रशासक आर सुब्रमण्यकुमार को 17 अक्टूबर को लिखा था कि उनका यह प्रस्ताव उन परिसंपत्तियों के लिए अधिकतम मूल्य सुनिश्चित करेगा जिन्हें ऋण चुकाने के लिए रोक रखा है। फिलहाल न्यायिक हिरासत में चल रहे वधावन ने डीएचएफएल का उचित और पूर्ण समाधान करने तथा परिसंपत्तियों का अधिकतम मूल्य प्राप्त करने के लिए उन विभिन्न परियोजनाओं के अधिकार, स्वामित्व और ब्याज के हस्तांतरण का प्रस्ताव रखा है जो उनके परिवार की अचल परिसंपत्ति के पोर्टफोलियो का हिस्सा हैं।
17 अक्टूबर वाले इस पत्र में कहा गया है कि जुहू गली परियोजना और इरला परियोजना सहित इन परियोजनाओं का मूल्यांकन 43,879 करोड़ रुपये है जो बाजार मूल्य से 15 प्रतिशत कम दर पर है।
वधावन ने कहा है कि सितंबर 2018 में आईएल ऐंड एफएस संकट के बाद न केवल डीएचएफएल, बल्कि सभी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों को बड़े वित्तीय संकट का सामना करना पड़ा है और कंपनी ने विभिन्न कदम उठाए हैं तथा डीएचएफएल की आधार हाउसिंग फाइनैंस, अवांसे, फाइनैंशियल, डीएचएफएल प्रामेरिका एसेट मैनेजर्स और डीएचएफलएल प्रामेरिका ट्रस्टी लिमिटेड जैसी परिसंपत्तियों से पैसा जुटाते हुए 44,000 करोड़ रुपये की देनदारियों का पुनर्भुगतान कर दिया है। 7 जून, 2019 को भारतीय रिजर्व बैंक ने प्रुडेंशियल फ्रेमवर्क पर एक परिपत्र जारी किया था। यह परिपत्र डीएचएफएल के आर्थिक संकट के समाधान और उसके ऋण पुनर्गठन की प्रक्रिया और दबावग्रस्त परिसंपत्तियों के संबंध में था।