टेक महिंद्रा के लिए है यह चोखा सौदा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 12:21 AM IST

देश की छठी सबसे बड़ी आईटी सेवा प्रदाता कंपनी टेक महिंद्रा, सत्यम सौदे के बाद राजस्व, बाजार पूंजीकरण और कर्मचारियों के लिहाज से देश की पांचवी सबसे बड़ी आईटी कंपनी बन जाएगी।
सत्यम खरीद के लिए सबसे अधिक बोली लगाने वाली टेक महिंद्रा को इस सप्ताह के अंत तककंपनी लॉ बोर्ड से इस सौदे को पूरा करने की अनुमति मिल जाएगी। आंकड़ों पर नजर डालें, तो 31 दिसंबर 2008 में समाप्त तिमाही में टेक महिंद्रा का राजस्व 11,32.1 करोड़ रुपये था और कंपनी ने इस दौरान 222.8 करोड़ रुपये का शुद्ध मुनाफा कमाया था।
सत्यम के 48,000 कर्मचारियों को शामिल करने के बाद टेक महिंद्रा के कर्मचारियों की कुल संख्या  73,500 हो जाएगी, जो भारत की तीसरी सबसे बड़ी आईटी कंपनी से थोड़ा कम है। तीसरी सबसे बड़ी कंपनी विप्रो के पास 97,000 कर्मचारियों की फौज है।
माइंडप्लेक्स कंसल्टिंग के निदेशक और सह-संस्थापक सब्यसाची सतपथी का कहना है कि दोनों कंपनियों के विलय होने से टेक महिंद्रा को सेवाओं और ग्राहकों के लिहाज से फायदा होने की उम्मीद है। उन्होंने बताया कि इस सौदे के बाद टेक महिंद्रा ईआरपी सेवा प्रदान करने में सक्षम हो जाएगी, जबकि फिलहाल कंपनी के पास इस तरह की सेवा उपलब्ध नहीं है।
फॉरेस्टर इंडिया के प्रमुख सुदीन आप्टे का कहना है कि टेक महिंद्रा ने सत्यम को खरीद कर अच्छा निर्णय किया है। यह कंपनी के विकास की बेहतर रणनीति की कहानी बयां करती है। हालांकि आप्टे कहते हैं कि टेक महिंद्रा के विविध कारोबार को देखते हुए ग्राहक थोड़ा चिंतित भी हो सकते हैं। कंपनी अब तक सबसे ज्यादा सेवा ब्रिटिश टेलिकॉम को प्रदान करती है, जिसकी टेक महिंद्रा में अल्पांश हिस्सेदारी है।
एसेंडिया कंसल्टिंग के प्रमुख विश्लेषक आलोक शिंदे का कहना है कि टेक महिंद्रा को कुछ समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। दरअसल, कंपनी ब्रिटिश टेलिकॉम पर ज्यादा निर्भर है, लेकिन इससे टेक महिंद्रा को फायदा भी हो सकता है, क्योंकि ब्रिटिश टेलिकॉम की आय में लगातार इजाफा हो रहा है।
शिंदे का कहना है कि टेक महिंद्रा के पास अच्छे प्रबंधक हैं, जिससे वह सत्यम को फिर से स्थापित करने में सफल होगी। कंपनी के पास संजय कालरा जैसे योग्य प्रबंधक हैं, जो मौजूदा समय में बीटी और टेक महिंद्रा के स्ट्रेटजिक इंसिएटिव का काम देखते हैं। खास बात यह कि अधिग्रहण और विलय मामले में उन्हें महारत हासिल है, जिससे टेक महिंद्रा को फायदा हो सकता है।
शिंदे का कहना है कि टेक महिंद्रा तत्काल तो नहीं, लेकिन आने वाले समय बड़ी कंपनी बनकर उभरेगी। नैस्कॉम के अध्यक्ष सोम मित्तल का भी मानना है कि टेक महिंद्रा के पास आईटी क्षेत्र का अनुभव है और सत्यम को पटरी पर लाने में कंपनी सक्षम है।
घोटाले ने घटा दिया भाव
एक समय 542 रुपये प्रति शेयर भाव पर इठलाने वाली सत्यम के लिए सोमवार को 58 रुपये प्रति शेयर की सबसे ऊंची बोली लगी, जो एक साल पहले के शेयर भाव का दसवां हिस्सा है।
अधिग्रहण के लिए सफल बोलीकर्ता बनकर उभरी टेक महिंद्रा ने 58 रुपये प्रति शेयर की सबसे ऊंची बोली लगाई है और कंपनी में 51 फीसदी हिस्सेदारी के लिए उसे करीब 2,889 करोड़ रुपये खर्च करने पड़ेंगे।

First Published : April 14, 2009 | 3:50 PM IST