पश्चिम बंगाल सरकार के अनुरोध पर टाटा मेटालिक्स अब राज्य में विस्तार योजना को ठंडे बस्ते में डालने अपने फैसले करेगी।
कंपनी के प्रबंधन निदेशक हर्ष के. झा के मुताबिक बंगाल सरकार ने कंपनी से अपने फैसले पर फिर से विचार करने का अनुरोध किया था और कंपनी ऐसा ही करेगी। उन्होंने कहा कि, ‘इस मुद्दे पर टाटा मेटालिक्स के बोर्ड की जल्द ही होने वाली बैठक में विचार किया जाएगा। फिर जो भी फैसला होगा, उसके बारे में राज्य सरकार को जानकारी दे दी जाएगी।’
ठीक एक महीने पहले कंपनी ने पश्चिम बंगाल की अपनी इस विस्तार परियोजना पर आगे नहीं बढ़ने का फैसला किया था। कंपनी के इस फैसले के पीछे सबसे बड़ी वजह जमीन की काफी ऊंची कीमतें थीं। साथ ही, जमीन देने में भी काफी देर हो रही थी।
खड़गपुर में तीन साल पहले जब पश्चिम बंगाल औद्योगिक विकास निगम (डब्ल्यूबीआईटीसी) ने कंपनी की इस परियोजना के लिए जमीन का अधिग्रहण शुरू किया था, तबसे लेकर अब तक जमीन की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं।
तीन साल पहले जमीन 3.5 से लेकर 4.5 लाख रुपये प्रति एकड़ के भाव पर बिक रही थी, जबकि आज एक एकड़ जमीन की कीमत 8-9.5 लाख रुपये हो चुकी है। इसलिए कंपनी से भी ज्यादा कीमत मांगी जा रही थी।
डब्ल्यूबीआईटीसी के प्रबंध निदेशक सुब्रता गुप्ता का कहना है कि, ‘इस बाबत कंपनी से बात हो चुकी है। अब हमें उनसे जबाव का इंतजार है। जमीन की कीमत को लेकर हमारा रवैया सख्त नहीं है, उस पर मोल-भाव हो सकता है।’
उम्मीद है कि कंपनी सरकार से अधिग्रहण में लगने वाले वक्त और कीमतों के बारे में पक्के वादे की मांग कर सकती है। कंपनी को अपनी विस्तार परियोजना के लिए 350 एकड़ जमीन की जरूरत है, जबकि वह अब तक 200 एकड़ जमीन का अधिग्रहण कर चुकी है।
यह जमीन टाटा मेटालिक्स की खड़गपुर में स्थित पिग आयरन कारखाने के बिल्कुल पास स्थित है। इस परियोजना के तहत शुरुआत में कंपनी ने 700-800 करोड़ रुपये के निवेश से पांच लाख टन उत्पादन क्षमता वाले प्लांट को बनाने का लक्ष्य रखा था।
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री बुध्ददेब भट्टाचार्य ने 26 फरवरी, 2005 में टाटा मेटालिक्स को प्राथमिकता के आधार पर जमीन मुहैया करवाने का वादा किया था। इस बाद कंपनी ने 15 मार्च, 2005 में जमीन के लिए आवेदन किया था। इस बीच टाटा मेटालिक्स ने अपनी कर्नाटक परियोजना के तहत काम तेज कर दिया है।
शुरुआत में कंपनी ने 500 एकड़ जमीन की मांग की थी, जिसे अब बढ़ाकर 900 एकड़ कर दिया गया है। हालांकि, कंपनी राज्य में इस प्रोजेक्ट को सशर्त कर रही है। कंपनी जमीन पर काम तभी शुरू करेगी, जब कर्नाटक सरकार कंपनी को लौह अयस्क के खान मुहैया करवाएगी।