रूसी कंपनी पर टाटा टी का कब्जा!

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 9:44 PM IST

देश की दूसरी सबसे बड़ी ब्रांडेड चाय निर्माता कंपनी टाटा टी अमेरिका और ब्रिटेन के बाद अब रूस में अधिग्रहण की तैयारी में है।
इस अधिग्रहण के लिए रतन टाटा समूह की कंपनी टाटा टी ने यूरोपीय बैंक फॉर रिकंस्ट्रक्शन ऐंड डेवलपमेंट (ईबीआरडी) से हाथ मिलाया है। इसके तहत टाटा टी और ईबीआरडी रूसी पैकेजिंग और डिस्ट्रब्यूशन कंपनी ग्रैंड में बहुलांश हिस्सेदारी का अधिग्रहण करेगा।
टाटा टी ने बंबई स्टॉक एक्सचेंज को बताया कि कंपनी की विदेशी सहायक इकाई और ईबीआरडी के कंसोर्टियम ने ग्रैंड कारोबार में 51 फीसदी हिस्सेदारी अधिग्रहण करने का निर्णय किया है। इस अधिग्रहण से रूसी पेय बाजार में टाटा टी की मौजूदगी मजबूत होगी।
हालांकि कंपनी ने यह नहीं बताया है कि अधिग्रहण की राशि कितनी होगी। उल्लेखनीय है कि इस सौदे से पहले टाटा टी ने टीऑन (चाय और फल आधारित पेय) लॉन्च करते हुए यह कहा था कि वह जल्द ही इस सेगमेंट में सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी।
वर्ष 1994 में स्थापित ग्रैंड रूस में काफी और चाय खंड में ब्रांडिंग पैकेजिंग और वितरण कंपनी है। रूस में कुल आयातित चाय का 15 फीसदी आयात ग्रांड ही करती है और इस क्षेत्र में रूस की यह दूसरी सबसे बड़ी कंपनी है।
कंपनी की ओर से बताया गया कि अधिग्रहण का यह सौदा वर्ष 2009 की पहली छमाही में पूरा होने की उम्मीद है। इस सौदे के बाद टाटा टी की ग्रैंड में हिस्सेदारी 33.2 फीसदी, जबकि ईबीआरडी की हिस्सेदारी 17.8 फीसदी होगी। शेष 49 फीसदी हिस्सेदारी अलेक्जेंडर ई. बोरिसोव के नेतृत्व वाली रूसी कंपनी के संस्थापक प्रमोटरों के पास होगी।
अधिग्रहण की खबर के बाद बंबई स्टॉक एक्सचेंज में कंपनी के शेयर 3 फीसदी की उछाल के साथ 559 रुपये पर पहुंच गए। कंपनी की ओर से बताया गया कि ईबीआरडी और टाटा टी की ओर से ग्रांड में भारी निवेश किया जाएगा और इसकी उत्पादन क्षमता को बढाया जाएगा, साथ ही गुणवत्ता में भी सुधार लाने की कोशिश की जाएगी।
कंपनी ने बताया कि इस सौदे से कंपनी को अपने उत्पादों के लिए नया बाजार मिलेगा, जिससे काफी फायदा होने की उम्मीद है। गौरतलब है कि चाय खपत के लिहाज से भारत और चीन के बाद रूस सबसे बड़ा बाजार है।

First Published : March 26, 2009 | 10:53 PM IST