मंदी की वजह से मारुति की मूल कंपनी सुजुकी की बिक्री जापान में वर्ष 2008 में जहां कम रही, वहीं भारत में बिक्री के मामले में मारुति ने बाजी मार ली।
जनवरी-दिसंबर 2008 में मारुति सुजुकी इंडिया (एमएसआईएल) ने जहां 697,850 कारों की बिक्री की, वहीं सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन (एसएमसी) जापानी बाजार में 679,215 कारें ही बेच पाई। हालांकि मारुति सुजुकी की बिक्री में वृद्धि की बात करें, तो वर्ष 2008 के दौरान उसमें 2 फीसदी की साल-दर-साल गिरावट आई है।
उल्लेखनीय है कि वर्ष 2007 में कंपनी ने रिकॉर्ड 710,532 कारों की बिक्री की थी। मारुति सुजुकी इंडिया लिमिटेड के चेयरमैन आर.सी. भार्गव ने कहा कि जापान की तरह भारतीय बाजार में अभी संभावनाएं खत्म नहीं हुई हैं।
हालांकि मंदी की वजह से भारत में भी कारों की बिक्री पर असर पड़ा है और आने वाले कुछ माह में अभी बिक्री और कम रहने के आसार हैं।
इसके बावजूद कंपनी का उत्पादन में कटौती करने करने का कोई इराद नहीं है। भारत में अभी भी कारों के लिए बड़ा बाजार है और कंपनी पिछले 10 सालों से 14 फीसदी की दर से विकास कर रही है।
भार्गव के मुताबिक, सुजुकी की बिक्री घटने की वजह है जापान में नई कारों को खरीदने के लिए प्रावधान। इसकी वजह से बहुत सीमित संख्या में खरीदार बाजार में आते हैं। जापान में ज्यादातर कारों के खरीदार वहीं हैं, जो पुराने मॉडल को बेचकर नई कार लेना चाहते हैं।
भारत की बात करें, तो मारुति की बिक्री शहरी इलाकों के अलावा, अर्द्ध शहरी और ग्रामीण इलाकों में भी खूब होती है। कंपनी ग्रामीण इलाकों में बिक्री बढ़ाने के लिए फाइनैंस सुविधा भी उपलब्ध करा रही है, जिससे बिक्री में और इजाफा होने की संभावना है।
हालांकि अन्य कार निर्माताओं- हुंडई मोटर इंडिया, टाटा मोटर्स, स्कोडा, फिएट और जनरल मोटर्स की ओर से नए-नए मॉडल लॉन्च करने की वजह से मारुति की बिक्री पर असर पड़ा है। बावजूद इसके भारतीय कार बाजार में मारुति की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 46 फीसदी है, उसके बाद 16 फीसदी हिस्सेदारी हुंडई मोटर्स की है।
यह आंकड़ा अप्रैल-जनवरी 2008-09 तक का है। भार्गव ने बताया कि जनवरी 2009 में कारों की बिक्री में बहुत ज्यादा उत्साह देखने को नहीं मिला। वहीं फरवरी और मार्च में भी बिक्री बढ़ने के कम ही आसर हैं। जबकि पिछले साल इस दौरान कारों में बिक्री में जबरदस्त इजाफा हुआ था।