सत्यम सौदे के बाद मुख्य आपके सामने सबसे बड़ी चुनौती क्या है?
विनीत नायर : सबसे पहले कॉरपोरेट गवर्नेंस पर ध्यान देना होगा, क्योंकि इसी के बल पर कंपनी की खोई प्रतिष्ठा को फिर से कायम की जा सकती है। दूसरी चुनौती कंपनी की वित्तीय स्थिति सुदृढ़ करना है। उसके बाद ग्राहकों के विश्वास को जीतना हमारा लक्ष्य होगा।
आनंद महिंद्रा : हमारा मुख्य मकसद कंपनी की साख को फिर से कायम करना है। इसके लिए सत्यम के प्रमुख ग्राहकों से बात करने की योजना बनाई जा रही है, ताकि उनका भरोसा कंपनी में बना रहे।
क्या आपने सत्यम की कीमत ज्यादा आंकी है?
महिंद्रा : नहीं, ऐसी बात नहीं है। हमने काफी सोच-समझकर खास रणनीति के तहत सत्यम के लिए बोली लगाई है।
कब तक सत्यम पर टेक महिंद्रा के पूर्ण नियंत्रण की उम्मीद है?
महिंद्रा : फिलहाल इस बारे में कुछ भी नहीं कह सकता, लेकिन इतना तय है कि बहुत जल्द टेक महिंद्रा का सत्यम पर कब्जा हो जाएगा।
सत्यम के लिए आपने किस आधार पर बोली लगाई?
नायर : इसके लिए कंपनी की बिलिंग, उपयोगिता और परिचालन लाभ को ध्यान में रखा गया। ऐसे में हमें कंपनी के मूल्यांकन में किसी तरह की परेशानी नहीं आई।
ब्रिटिश टेलिकॉम का इस सौदे के बारे में क्या सोचना है?
नायर : बीटी का इस सौदे को लेकर सकारात्मक रुख है। बिना बीटी के समर्थन के टेक महिंद्रा इस सौदे को करने में सक्षम नहीं थी।
महिंद्रा : सत्यम के लिए बोली लगाने से पहले महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, टेक महिंद्रा और बीटी के बीच काफी विचार-विमर्श किया गया।