मध्य प्रदेश में बीना रिफाइनरी वर्ष 2010 में शुरू हो जाएगी।
एक पेट्रोकेमिकल परिसर की स्थापना के लिए उर्वरक और विद्युत कंपनियों की ओर से ठंडी प्रतिक्रिया प्राप्त होने के बाद सरकार ने रिफाइनरी के पास एसएमई-आधारित पेट्रोकेमिकल परिसर स्थापित करने की योजना बनाई है।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) जैसे औद्योगिक संगठनों को अपने विचार रखने के लिए आमंत्रित किया गया है।
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, ‘ऊर्जा विभाग ने 24 लाख टन नाफ्था की बिक्री के लिए विभिन्न बिजली कंपनियों से निविदाएं आमंत्रित की थीं। रिफाइनरी हर साल इतनी मात्रा में नाफ्था का उत्पादन करेगी। ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन कमीशन (ट्राइफैक) ने भी 24 से अधिक उर्वरक कंपनियों को पत्र लिखे, लेकिन सिर्फ एक उर्वरक कंपनी ने ही हमने संपर्क किया।
कुछ बिजली कंपनियों ने नाफ्था-आधारित विद्युत संयंत्रों की स्थापना में दिलचस्पी दिखाई है। अब सरकार इस रिफाइनरी पर एसएमई-आधारित एक पेट्रो कॉम्प्लेक्स विकसित करना चाहती है।’
अधिकारी ने कहा कि राज्य सरकार जल्द ही विभिन्न व्यावसायिक निकायों से विचार आमंत्रित करेगी ताकि एसएमई-आधारित पेट्रो कॉम्प्लेक्स स्थापित किया जा सके। हालांकि कम सुगंध वाले नाफ्था, जिसे संयंत्र द्वारा उत्पादित किया जाएगा, की देश में प्रचुरता है और कोई भी उर्वरक और बिजली कंपनी इस कारोबार में प्रवेश करना नहीं चाहती।
एस्सार पावर, केडिया पावर, मोजर बेयर, जीवीएल पावर, डीबी पावर, एसटीआई पावर, एल्पाइन पावर आदि ने राज्य सरकार से नाफ्था प्राप्त करने में दिलचस्पी दिखाई है।
भारत ओमान रिफाइनरी लिमिटेड (बीओआरएल) के साथ किए गए राज्य सरकार के समझौते के तहत बीओआरएल को राज्य सरकार की योजनाओं के बारे में 31 मार्च 2009 से पहले बताना होगा। बीओआरएल को इस रिफाइनरी के लिए क्रियान्वयन अधिकार हासिल है।