चुनाव से मुस्कुराया सुरक्षा का बाजार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 9:45 PM IST

विज्ञापन इंडस्ट्री के बाद अब इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उत्पाद बनाने वाली कंपनियां आगामी लोकसभा चुनावों  के दौरान चांदी काटने की फिराक में है।
खबर है कि आंतकवादी घटनाओं को देखते हुए लोकसभा चुनावों  में चाक-चौबंद सुरक्षा व्यवस्था के सरकारी दावे के बाद से इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उपकरणों की मांग में 30 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो गई है।
इसके चलते सुरक्षा एजेंसियों और नामी-गिरामी होटलों व संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था देखने वाली निजी एंजेसियों की तरफ से इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उपकरणों के आर्डरों में 20 से 25 फीसदी इजाफा हुआ है।
लेकिन दूसरी ओर आईपीएल से आस लगाए बैठी इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उपकरणों के निर्माण से जुड़ी कंपनियां इसके भारत में न होने की दुहाई भी दे रही है।
सरकारी सुरक्षा एंजेसियों को इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उपकरण उपलब्ध करवाने वाली कंपनी सिक्योरिटीज इक्विपर्स इंडिया के सीईओ आई.पी. सिंह बताते है कि ‘ लोकसभा चुनावों को शांतिपूर्ण ढंग से निबटाने के लिए सरकारी सुरक्षा एंजेसियों ने सीसीटीवी कैमरे, अग्निशमन यंत्र, बॉडी स्कैनर, मैटल  डिटेक्टर, फांरेसिंक लैब उपकरण,रुम सिक्योरिटी डिवाइस के ऑर्डरों में 25 फीसदी का इजाफा किया है।’
सुरक्षा सेवाएं देने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनी एडीटी सिक्योरिटी के महाप्रंबधक वी सून ची ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया ‘इस साल तो लोकसभा चुनाव के कारण इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उपकरणों की बिक्री में 20 फीसदी की सीधी बढ़ोतरी हुई है। लेकिन महाराष्ट्र और गुजरात जैसे औद्योगिक राज्यों में यह बढ़ोतरी अन्य की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही है।
हाल में हुई आंतकी घटनाओं के बाद से भारत की होटल इंडस्ट्री के साथ रिटेल और रियल एस्टेट सेक्टर भी हमारी सेवाओं के लिए तेजी से रुख कर रहा है। फ्रॉस्ट और सुलीवन की ओर से कराए गये सर्वेक्षण के मुताबिक अभी भारत में इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उपकरणों का बाजार लगभग 15 सौ करोड़ रुपये का है। लेकिन अगर हम रियल एस्टेट और रिटेल से मिलें मौके को भुना लेते है तो यह 2010 के अंत तक 2 हजार करोड़ रुपये का हो सकता है।’
वहीं दिल्ली स्थित इलेक्ट्रानिक इक्विपमेंटस ड्रिस्टीब्यूटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष राजीव मेहता बताते है कि ‘इस समय इलेक्ट्रानिक सुरक्षा उपकरणों की सबसे ज्यादा मांग सरकारी महकमों जैसे बैंक, पुलिस, एमसीडी, मेट्रो, डीडीए, और रेलवे की तरफ से आ रही है। जो कु ल बिक्री का लगभग 60 फीसदी  है। जबकि निजी सुरक्षा एंजेसियों की तरफ से यह 35 फीसदी और व्यक्तिगत तौर पर केवल 15 फीसदी है।’
चौकस निगाहें
चुनाव के कारण सुरक्षा उपकरणों की मांग में 30 फीसदी का हुआ है इजाफा
निजी सुरक्षा एजेंसियां भी खूब कर रही हैं खरीदारी

First Published : March 26, 2009 | 11:08 PM IST