सऊदी अरामको कर रही खर्च में कटौती

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 2:55 AM IST

ऊर्जा क्षेत्र की प्रमुख कंपनी सऊदी अरामको ने चीन में 10 अरब डॉलर की तेल रिफाइनरी परियोजना से पीछे हट गई है। ब्लूमबर्ग की एक हालिया खबर में कहा गया है कि कंपनी ने खर्च में कटौती करने के उद्देश्य से ऐसा किया है। लेकिन इससे कंपनी के भारत सहित अंतरराष्ट्रीय सौदों को लेकर आशंका जताई जाने लगी है।
इस महीने के आरंभ में रॉयटर्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि वर्ष 2021 के लिए अरामको की पूंजीगत व्यय योजना पिछले अनुमान के मुकाबले काफी कम होगी। कंपनी के मुख्य कार्याधिकारी अमीन नासिर ने कंपनी के वित्तीय नतीजे जारी करने के बाद विश्लेषकों एवं निवेशकों से बातचीत में यह खुलासा किया था।
क्रेडिट सुइस के विश्लेषकों का मानना है कि पूंजीगत खर्च में कमी कंपनी के नियोजित अधिग्रहण के लिए अच्छी खबर नहीं है। उन्होंने 25 अगस्त को जारी अपने एक नोट में कहा, ‘फाइनैंशियल टाइम्स (12 अगस्त को) ने कहा है कि वर्ष 2021 के लिए पूंजीगत खर्च घटकर 20 से 25 अरब डॉलर रह सकता है। तेल उत्खनन संबंधी पूंजीगत खर्च करीब 13 अरब डॉलर रहने के आसार हैं जबकि शेष रकम गैस एवं वितरण मद में खर्च किया जाएगा। इस प्रकार की कटौती से स्वाभाविक तौर पर कंपनी की अंतरराष्ट्रीय निवेश योजनाएं प्रभावित हो सकती हैं जिनमें रिफाइनिंग परियोजनाएं भी शामिल हैं।’ सऊदी अरामको ने पिछले साल अगस्त में रिलायंस इंडस्ट्रीज के ऑयल टु केमिकल (ओ2सी) कारोबार में हिस्सेदारी खरीदने के लिए बातचीत शुरू की थी। इसके अलावा अरामको सरकारी तेल विपणन कंपनियों की मेगा रिफाइनरी में भी भागीदार है। हालांकि औपचारिक तौर पर कोई निवेश की घोषण अभी नहीं की गई है लेकिन अरामको को भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (बीपीसीएल) में बहुलांश हिस्सेदारी के संभावित खरीदार के तौर पर भी देखा जा रहा था।
क्रेडिट सुइस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, ‘अरामको ने कई फ्रेमवर्क समझौते, समझौता ज्ञापन (समझौता ज्ञापन), आशय पत्र (एलओआई) आदि पर हस्ताक्षर कर रखा है। जाहिर तौर पर कंपनी इनमें से कई पर आगे नहीं बढ़ेगी लेकिन आपको कुछ पर आगे बढऩे की जरूरत भी है ताकि आप 8 से 10 एमबीडी सकल रिफाइनिंग क्षमता के अपने दीर्घकालिक लक्ष्य तक पहुंच सकें।’
अगस्त 2019 में रिलायंस इंडस्ट्रीज ने घोषणा की थी कि सऊदी अरामको आरआईएल के ओ2सी कारोबार में निवेश करना चाहती है जिससे 15 अरब डॉलर के एक सौदे के तहत 20 फीसदी हिस्सेदारी बिकने की उम्मीद है। लेकिन जुलाई में अपनी हालिया वार्षिक आम बैठक में आरआईएल ने शेयरधारकों को सूचित किया कि वह सौदा अपनी मूल समय सारणी के अनुरूप आगे नहीं बढ़ सका।
क्रेडिट सुइस ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अरामको ने अपनी पूंजीगत व्यय योजना में संशोधन किया है और लक्ष्य हासिल करने के लिए आरआईएल के साथ उसका सौदा पर्याप्त होगा।
वर्ष 2018 में सऊदी अरामको ऐंड अबू धाबी नैशनल ऑयल कंपनी (एडीएनओसी) ने महाराष्ट्र में 6 करोड़ टन क्षमता की  रिफाइनरी और पेट्रोकेमिकल परिसर विकसित करने के लिए सरकारी तेल विपणन कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (एचपीसीएल) और बीपीसीएल के साथ साझेदारी करने में दिलचस्पी दिखाई थी।

First Published : August 27, 2020 | 12:17 AM IST