अल्टिमा पार्टनर्स द्वारा प्रवर्तित इंडियन फिल्म कंपनी लिमिटेड अधिग्रहण समूह (आईएफसीआरजी) दो निदेशकों- राघव बहल और आलोक वर्मा को लंदन के एआईएम में सूचीबद्ध फिल्म इंवेस्टमेंट कंपनी से निकालने की मांग वापस लेने पर सहमत हो गई है।
आईएफसी आरजी के पास कंपनी की 21 फीसदी हिस्सेदारी है और उसने निदेशकों को निकालने के पीछे तर्क दिया था कि कंपनी का प्रदर्शन खराब चल रहा है।
इंडियन फिल्म कंपनी में अल्टिमा इंडिया की हिस्सेदारी 14.39 फीसदी है। बहल इस कंपनी के प्रवर्तक हैं और उनकी हिस्सेदारी 21.64 फीसदी है।
बोर्ड ने आपसी सहमति के आधार पर अतुल सेठिया को अल्टिमा का निदेशक और दीपक गुप्ता को आईएफसी के स्वतंत्र व्यापारी हिस्सेदार नियुक्त करने का फैसला किया था। गुप्ता अधिग्रहण समूह और नेटवर्क18 से जुड़े नहीं हैं और वह स्वतंत्र भूमिका निभा रहे हैं।
बोर्ड ने यह भी निर्णय लिया था कि लंबी अवधि की हिस्सेदारी का जिम्मा गुप्ता और सेठिया के कंधों पर होगा और इन सारी क्रियाकलापों का निरीक्षण नेटवर्क 18 के समीर मनचंदानी करेंगे। अल्टिमा इस पर भी तैयार थी कि अगर सेठिया की हिस्सेदारी 10 फीसदी से घट जाती है, तो उन्हें त्यागपत्र देना होगा।
इसी तरह की बात दीपक गुप्ता के लिए भी कही गई थी। पेल्हाम पब्लिक रिलेशंस के निदेशक एलेक्स वाल्टर्स के मुताबिक, इंडियन फिल्म कंपनी और आईएफसी अधिग्रहण समूह के बीच चली बहस लाभप्रद थी और दोनों पक्ष इस बात पर राजी हो गए थे कि 5 फरवरी को होने वाली बैठक को रद्द कर दिया जाए।
उन्होंने कहा, ‘बोर्ड शेयरधारकों के पक्ष में समझौता कर काफी खुश थे।’ इंडियन फिल्म कंपनी के मुताबिक, आईएफसीआरजी ने यह स्वीकार किया था कि कंपनी के कारोबार और नेटवर्क 18 समूह की ब्रांड सजगता बढ़ाने में राघव बहल का योगदान उल्लेखनीय रहा है।