पीरामल जुटाएंगे पीई फंड से कर्ज

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 3:07 AM IST

अमेरिका की प्राइवेट इक्विटी फंड अपोलो ग्लोबल मैंनेजमेंट और पीरामल कैपिटल हाउसिंग फाइनैंस के बीच एक ऋण सौदे पर बातचीत अंतिम चरण में हैं। सूत्रों ने बताया कि दोनों पक्षों के बीच चल रही बातचीत के तहत अमेरिकी कंपनी पीरामल एंटरप्राइजेज की इकाई पीरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस को 2,200 से 3,700 करोड़ रुपये तक ऋण देगी।
आवास वित्त या गैर-बैंकिंग वित्त खंड में इस वर्ष यह सबसे बड़ा सौदा होगा। दोनों पक्षों के बीच सौदे की शर्तें इस तरह तैयार की गई हैं कि पीरामल द्वारा कुछ डेवलपरों को आवंटित होने वाले कुछ खास ऋणों में इसकी भूमिका वरिष्ठ कर्जदाता के तौर पर होगी। इस प्रावधान के तहत संबंधित परियोजना की नकदी पर पहला अधिकार अपोलो का होगा। सूत्रों के अनुसार अपोलो के पास यह तय करने का विकल्प होगा कि वह किस डेवलपर को आवंटित ऋण के मामले में अपने अधिकार का इस्तेमाल करना चाहती है। सूत्रों ने कहा, ‘सौदे की शर्तों के अनुसार अपोलो पीरामल को करीब 18 प्रतिशत दर पर ऋण देगी और पीरामल द्वारा डेवलपरों को आवंटित कर्ज के कुल मूल्य का 65-70 प्रतिशत ऋण अपोलो से मिलेगा।’ इस वर्ष इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस ने भी ओकट्री कैपिटल के साथ ऐसा ही समझौता किया था। इसके तहत इंडियाबुल्स द्वारा आवंटित ऋणों में ओकट्री प्रमुख हिस्सेदार थी। इस सौदे के जरिये इंडियाबुल्स ने 2,200 करोड़ रुपये जुटाए थे।
इस पूरे मामले पर संपर्क करने पर अपोलो ग्लोबल मैंनेजमेंट के प्रवक्ता ने कहा कि उनकी कंपनी बाजार में चलने वाले कयास पर टिप्पणी नहीं करती है। पीरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस के प्रवक्ता ने भी इस विषय पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। आईएलऐंडएफस के भुगतान में चूक करने के बाद दूसरी गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों की तरह पीरामल को भी मुश्किलों का सामना करना पड़ा था।
पीरामल ने लोढ़ा डेवलपर्स को आवंटित 2,000 करोड़ रुपये का ऋण पिछले वर्ष गोल्डमैन सैक्स को बेच दिया था। पीरामल की वित्त इकाई थोक ऋणों की हिस्सेदारी कम कर रही है और अपने खाते पर जोखिम कम करने के लिए खुदरा ऋणों की हिस्सेदारी में इजाफा कर रही है। जून 2020 तक पीरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस का ऋण खाता 51,265 करोड़ रुपये था। पीरामल की तरह ही एनबीएफसी एवं आवास वित्त कंपनियां नकदी लाने और जोखिम कम करने के लिए उन डेवलपरों को आवंटित ऋण बेच रही हैं, जिनके साथ जोखिम अधिक जुड़े हैं। पैसे की कमी और बिक्री नरम पडऩे से डेवलपरों को भी नकदी से जुड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। 
विशेषज्ञों का कहना है कि करीब 3.5 लाख करोड़ रुपये के ऋण अब भी एनबीएफसी एवं एचएफसी के खाते में हैं, जिनका कुछ हिस्सा दूसरी इकाइयों को बेचने की जरूरत है। एडलवाइस समूह की वित्तीय इकाई ईसीएल फाइनैंस ने रियल एस्टेट क्षेत्र को आवंटित 4,000 करोड़ रुपये का कर्ज फैरालोन कैपिटल और एसएसजी कैपिटल को बेच दिया था। एडलवाइस के प्रवक्ता ने बताया, ‘कंपनी वित्त वर्ष 2021 में 3,000 करोड़ रुपये के ऋण और बेचेगी और अगले दो वर्षों में थोक पोर्टफोलियो शून्य पर ले आएंगी।’

First Published : August 23, 2020 | 10:45 PM IST