कलम को मिलेगा दम

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 7:22 PM IST

सत्यम घोटाले के बाद कंपनियों की धोखाधड़ी से बचने के लिए तमाम तरीके निकाले जा रहे हैं। इसी के तहत ऑडिटरों को नए अधिकार देने की बात भी चल रही है, जिनके तहत अगर वे किसी कंपनी के बहीखातों में गड़बड़ी पाते हैं, तो उस पर हस्ताक्षर करने से वे इनकार कर सकते हैं।
भारतीय सनदी लेखाकार संस्थान (आईसीएआई) द्वारा गठित एक विशेष दल इस तरह के कदम को अमली जामा पहनाने पर जोर दे रहा है। 

इतनी ही नहीं कंपनियों के बहीखातों के तौर तरीके भी बदल सकते हैं क्योंकि सरकार ने आईसीएआई से मुनाफे और नुकसान को सही तरीके से दिखाने के लिए नए नियमों पर मशविरा मांगा है।
आईसीएआई के सूत्रों ने बताया कि सरकार इसके जरिये यह सुनिश्चित करना चाहती है कि कंपनी का प्रबंधन किसी भी तरीके से अपनी कारगुजारियों पर पर्दा न डाल सके। यह विशेष दल अगले कुछ हफ्तों में इन मसलों पर अपनी सिफारिशों को अंतिम रूप देगा और कंपनी मामलों के मंत्रालय को अपनी रिपोर्ट सौंप देगा।
बहीखातों पर हस्ताक्षर से इनकार का अधिकार ऑडिटरों को दिया जाना वाकई एक अहम कदम है क्योंकि फिलहाल उनके पास कोई पुख्ता अधिकार नहीं है। यदि कोई ऑडिटर अभी खातों में गड़बड़ी पाता है, तो वह कंपनी प्रबंधन को सूचित कर देता है।
लेकिन यदि कंपनी प्रबंधन उसे मानने से इनकार कर देता है, तो ऑडिटर के पास खातों पर हस्ताक्षर करने के अलावा कोई दूसरा चारा नहीं होता। 

इस मामले से जुड़े एक सूत्र ने बताया, ‘अगर कानून के तहत सुनिश्चित कर दिया जाए कि ऑडिटर की बताई गड़बड़ियों को दुरुस्त करना प्रबंधन के लिए अनिवार्य है, तो हालात बिल्कुल बदल जाएंगे। इससे हमें दोषी ऑडिटरों को सजा देने में भी मदद मिलेगी।’
आईसीएआई से अलग एक ऑडिटर ने बताया कि यदि कोई बड़ी गड़बड़ी पता चल जाती है, तो कंपनी प्रबंधन फौरन ऑडिटर को हटाने की कार्रवाई शुरू कर देता है। 

अक्सर कंपनियां या उनके निदेशक सख्त रवैये वाले ऑडिटर की शिकायत लेकर आईसीएआई पहुंच जाते हैं। उनका तर्क होता है कि ऑडिटर कंपनी को निशाना बना रहा है या उसे ब्लैकमेल कर रहा है।
कंपनी मामलों के मंत्रालय के एक अधिकारी ने बताया कि सरकार आईसीएआई की सिफारिशों के आधार पर ही इस मामले में कोई फैसला करेगी। उन्होंने कहा, ‘खातों की जांच में उन्हें महारत हासिल है, इसलिए हमने खाते तैयार करने के तरीके बेहतर बनाने के लिए उनसे ही मदद मांगी। हम उनके मशविरों की बुनियाद पर ही कोई काम करेंगे।’
मंत्रालय इस मामले में अन्य नियामक संस्थाओं मसलन सेबी के साथ भी तालमेल बढ़ाने पर काम कर रहा है। 

एक अन्य अधिकारी ने कहा, ‘नियामक संस्थाओं ने पहले ही यह विचार करना शुरू कर दिया है कि एक और सत्यम घोटाला रोकने के लिए कौन से कदम उठाए जाने चाहिए। अगले कुछ महीनों में आपको वैसे ही कुछ कदम दिखेंगे, जैसे अमेरिका ने एनरॉन और वर्ल्डकॉम विवाद के बाद उठाए थे।’
नहीं दिखेगी दूसरी सत्यम
ऑडिटरों को होगा खातों से संतुष्ट होने पर ही हस्ताक्षर करने का अधिकार

कंपनियां नहीं डाल पाएंगी अपनी कारगुजारियों पर पर्दा

फिलहाल ऑडिटर के पास नहीं हैं पुख्ता अधिकार

सख्ती दिखाने पर कंपनियां लगाती हैं ब्लैकमेलिंग का आरोप

आईसीएआई की सिफारिशों पर सरकार करेगी फैसला

First Published : March 8, 2009 | 11:06 PM IST