कर्णधार ही कर रहे कंपनी से किनारा

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 1:10 AM IST

मंदी के इस दौर में बड़ी विज्ञापन एजेंसियो पर दोहरी मार पड़ती दिख रही है। एक ओर तो उनके ग्राहक उनसे मुंह मोड़ रहे हैं तो दूसरी ओर उनके अपने बड़े अधिकारी इन एजेंसियों को अलविदा कहकर अपनी खुद की विज्ञापन एजेंसियां चलाने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
पिछले कुछ वक्त में जेडब्ल्यूटी, लियो बर्नेट, डीडीबी मुद्रा और ग्रे वर्ल्डवाइड जैसी नामचीन एजेंसियों के 6 बड़े कर्णधार इन एजेंसियों को सलाम नमस्ते कर अपनी एजेंसियों का श्रीगणेश कर चुके हैं।
जेडब्ल्यूटी के मुख्य क्रिएटिव डायरेक्टर रह चुके एग्नेलो डियास, लियो बर्नेट के कार्यकारी क्रिएटिव डायरेक्टर (ईडीसी) संतोष पाढी ने पिछले महीने मिलकर अपनी खुद की एजेंसी ‘टैप रूट इंडिया’ की बुनियाद डाली।
इसी तरह डीडीबी मुद्रा के पूर्व ईसीडी जगदीश आचार्य ने भी अपनी ‘कट द क्रैप’ के जरिये विज्ञापन जगत में अपनी नई पारी शुरू की है। इस होड़ में लियो बर्नेट के पूर्व ईसीडी सुकुमार मेनन ने भी पिछड़ना मुनासिब नहीं समझा और ‘ब्लैक स्वान लाइफ’ नाम से अपनी खुद की एजेंसी शुरू की।
ग्रे वर्ल्डवाइड के पूर्व ईसीडी बृजेश जैकब ने तो एक नहीं दो एजेंसियों की शुरुआत की है। उन्होंने ’22 फीट’ नाम से डिजिटल एजेंसी और ‘व्हाइट कैनवास’ नाम से एक संपूर्ण सेवा प्रदाता एजेंसी की शुरुआत की है।
विज्ञापन जगत के इन महारथियों को मंदी का खौफ बिलकुल नहीं सता रहा है, तभी तो इन्होंने मौजूदा मंदी के माहौल में भी अपनी एजेंसियों की शुरुआत करने में कोई हिचक नहीं दिखाई है। इनके इस विश्वास को इस बात से भी मजबूती मिल रही है कि इनको ग्राहक मिलने में मुश्किलें नहीं आ रही हैं।
टैपरूट इंडिया के संतोष पांढी कहते हैं, ‘इस दौर में बड़ी एजेंसियों को ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। अगर ग्राहकों को कम खर्च में ही बेहतर सेवाएं मिल जाएं तो उनके लिए तो यह फायदेमंद ही है।
इसलिए अब ग्राहक मझोली और नई एजेंसियों का रुख कर रहे हैं। उनके लिए काम मायने रखते है किसी एजेंसी का नाम नहीं।’ उनका मानना है कि एक विशेषज्ञ एजेंसी ज्यादा किफायती सेवाएं देती हैं। 
फिलहाल तो ये नई एजेंसियां अपनी सेवाओं में विस्तार करने की योजना पर भी काम कर रही हैं। दरअसल, ग्राहक इन एजेंसियों को हाथोंहाथ ले रहे हैं जिससे इनका उत्साह भी बढ़ा है।
एक जानकार कहते हैं कि ग्राहकों के लिए एजेंसी के नाम से ज्यादा अहमियत इस बात की होती है कि अमुक विज्ञापन एजेंसी में कौन दिग्गज काम करता है। आज की तारीख में पीयूष पांडे और उनके जैसे बड़े नाम अपनी एजेंसियों से ज्यादा मायने रखते हैं।
खुदमुख्तारी में समझदारी !
अपनी एजेंसी शुरू करने को तरजीह दे रहे हैं दिग्गज

काम मिलने में भी नहीं आ रही है मुश्किल

First Published : February 16, 2009 | 12:12 AM IST