मदरसन सूमी ने जून तिमाही में कमजोर प्रदर्शन किया, क्योंकि उसे अपने प्रमुख बाजारों में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ा। जहां अनियमित आपूर्ति की वजह से उत्पादन बंद रहने से उसका वैश्विक परिचालन प्रभावित हुआ, वहीं घरेलू व्यवसाय में कोविड संक्रमण की दूसरी लहर के कारण कमजोरी देखी गई।
समेकित राजस्व तिमाही आधार पर 5 प्रतिशत नीचे रहा, जो अनुमानों के मुकाबले कम है। वहीं परिचालन मुनाफा स्तर पर भी कंपनी को निराशा का सामना करना पड़ा। कंपनी का एबिटा 29 प्रतिशत की तिमाही गिरावट के साथ 1,220 करोड़ रुपये रहा, जो अनुमानों के मुकाबले 30 प्रतिशत कम है। चिप की किल्लत और कच्चे माल की ऊंची कीमतों की वजह से आपूर्ति प्रभावित हुई और मुनाफे पर दबाव पड़ा। मार्जिन 260 आधार अंक तक घटकर 7.6 प्रतिशत रह गया।
सेमीकंडक्टर की किल्लत के अलावा, टेक्सास में तूफान और बेल्जियम में बाढ़ से भी वाहन निर्माताओं को उत्पादन रोकने के लिए बाध्य होना पड़ा था। कंपनी को वित्त वर्ष 2022 की दूसरी छमाही में कुछ सुधार से पहले अल्पावधि में सेमीकंडक्टर की किल्लत बरकरार रहने की आशंका है। यूरोपीय कार पंजीकरण लगातार मजबूत बना हुआ है और इसमें तिमाही आधार पर 12 प्रतिशत की वृद्घि आई है।
हालांकि इन समस्याओं से उत्पादन में विलंब को बढ़ावा मिला है, लेकिन ब्रोकरों का मानना है कि कार और वाणिज्यिक वाहनों, दोनों के लिए मजबूत मांग बनी हुई है।
आपूर्ति शृंखला से संबंधित समस्याओं के कारण पैदा हुए प्रभाव की कुछ हद तक भरपाई सहायक इकाई एसएमआरपीबीवी में परिचालन दक्षता की वजह से हुई। यह सहायक इकाई यात्री कारों के लिए जरूरतें पूरी करती है। मार्जिन पर बड़ा प्रभाव पीकेसी पर पड़ा, जो वाणिज्यिक वाहनों को कलपुर्जों की आपूर्ति करती है। कलपुर्जों की किल्लत के अलावा, लॉजिस्टिक और नई पेशकशों से संबंधित लागत के साथ साथ तांबा कीमतों में तेजी से पीकेसी का मार्जिन प्रभावित हुआ।
कीमत वृद्घि का बोझ ग्राहकों पर डाले जाने से कंपनी को सितंबर तिमाही में लागत वृद्घि के 80 प्रतिशत हिस्से की भरपाई होने की संभावना है। जहां एसएमआरपीबीवी का मार्जिन 190 आधार अंक घटकर 8 प्रतिशत रह गया, वहीं पीकेसी के लिए यह तिमाही आधार पर 394 आधार अंक घटकर 4 प्रतिशत रह गया।
एसएमआरपीबीवी में मार्जिन प्रदर्शन इस शेयर के लिए एकमात्र सबसे बड़ा कारक था। लागत कटौती और दक्षता में सुधार से जून तिमाही से पहले की लगातार दो तिमाहियों में मजबूत मार्जिन में मदद मिली। जून तिमाही में मार्जिन में दबाव महसूस किया गया।
कमजोर राजस्व और मार्जिन को देखते हुए कई ब्रोकरों ने वित्त वर्ष 2022 के लिए कंपनी के आय अनुमानों में 8 प्रतिशत तक की कमी की है। हालांकि वे दीर्घावधि परिवेश को लेकर आशान्वित हैं। मोतीलाल ओसवाल रिसर्च के जिनेश गांधी का कहना है, ‘जहां अल्पावधि परिदृश्य आपूर्ति से संबंधित अनिश्चितताओं की वजह से अस्पष्टï है, वहीं एमएसएस अपने मुख्य व्यवसायों में चक्रीय सुधार, मजबूत ऑर्डर बुक और एसएमआरपीबीवी में दक्षता का लाभ उठाने के लिए अच्छी स्थिति में है।’
कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटी का मानना है कि कंपनी वित्त वर्ष 2023 तक शुद्घ नकदी की स्थिति में आ जाएगी।
