मंगलवार को उतार-चढ़ाव भरे कारोबार के बाद रुपया लगातार पांचवें कारोबारी सत्र में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर बंद हुआ। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से सरकारी बैंकों द्वारा डॉलर की संभावित बिक्री ने स्थानीय मुद्रा को सहारा दिया। डीलरों ने यह जानकारी दी।
बैंकिंग सिस्टम से अतिरिक्त नकदी को हटाने के लिए केंद्रीय बैंक ने खरीद-फरोख्त के जरिए बॉन्डों की अदला-बदली जारी रखी। ट्रेडरों ने बताया कि केंद्रीय बैंक की खरीद-फरोख्त मुख्य रूप से जनवरी 2027 की परिपक्वता के आसपास वाली प्रतिभूतियों पर केंद्रित थी।
रुपया पिछले बंद भाव 95.78 प्रति डॉलर के मुकाबले 95.59 प्रति डॉलर पर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से इसमें 4.83 फीसदी की गिरावट आई है। मौजूदा कैलेंडर वर्ष में रुपये में 5.98 फीसदी की नरमी दर्ज हुई है जबकि चालू वित्त वर्ष में इसमें 0.82 फीसदी की गिरावट आई है।
ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.5 फीसदी गिरकर 98.8 डॉलर प्रति बैरल रह गई। यह गिरावट उन खबरों के बाद आई है, जिनमें कहा गया है कि अगर अमेरिका अपना सैन्य दबाव कम करे और नाकेबंदी हटा ले तो ईरान होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोल सकता है।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में शोध विश्लेषक दिलीप परमार ने कहा, होर्मुज स्ट्रेट के जल्द ही फिर से खुलने की खबरों के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई, जिससे भारतीय रुपये में तेजी देखी गई।
