फिर विवादों में फंसी माल्को

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 7:33 PM IST

मद्रास अल्युमिनियम कंपनी लि. (माल्को) और विवादों का जैसे अब चोली-दामन का साथ हो गया है।
पहले तो उसकी स्टरलाइट इंडस्ट्रीज के साथ मिलकर खुद के पुनर्गठन की योजना बुरी तरह नाकामयाब रही और अब माल्को के शेयरों को गैर-सूचीबध्द कराने के प्रस्ताव पर भी अच्छा-खासा विवाद
खड़ा हो गया है।
निवेशकों का कहना है कि शेयरों को गैर सूचीबध्द कराने के लिए जो 105 रुपये प्रति शेयर की रकम तय की गई है, वह सेबी के रिवर्स बुक बिल्डिंग (आरआरबी) के दिशा-निदेशों के खिलाफ है। 25 फरवरी को जारी किए गए बयान में कंपनी ने कहा था कि, ‘माल्को के बोर्ड ऑफ डाइरेक्टर्स ने कंपनी की डिलिस्टिंग के लिए 105 रुपये प्रति शेयर की अधिकतम रकम तय की है।’
लेकिन जिंदल सिक्योरिटीज के निदेशक अनिल जिंदल का कहना है कि आरआरबी दिशानिर्देश के उपबंध 8(2) के तहत गैर सूचीबध्द किए जाने के लिए कंपनी सिर्फ न्यूनतम कीमत ही तय कर सकती है, न कि अधिकतम कीमत। जिंदल सिक्योरिटीज ने इस बाबत कंपनी के शेयरों को गैर सूचीबध्द कराने में मदद कर रही आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के पास अपना विरोध दर्ज किया है।
सीएनआई रिसर्च के प्रबंध निदेशक किशोर ओस्तवाल ने बताया कि, ‘किसी कंपनी के शेयरों को गैर सूचीबध्द किए जाने के मामले में कंपनी मिसाल के लिए एक प्राइस बैंड तो दे सकती है, लेकिन वह उसकी अधिकतम कीमत तय नहीं कर सकती।
अगर उसने कीमत पर सीलिंग लगा दी है, तो फिर कीमतें तय करने की प्रक्रिया का मकसद ही क्या रह जाएगा?’ हालांकि, कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि माल्को का बोर्ड इस कीमत पर भी फेर-बदल कर सकता है।
जिंदल का कहना है कि गैर-सूचीबध्द किए जाने के मौजूद दिशानिदेर्शों में सिर्फ न्यूनतम कीमत, खोजी गई कीमत और आखिरी कीमत का जिक्र किया गया है। बोर्ड ने जो 105 रुपये प्रति शेयर की कीमत तय है, वह इनमें से किसी के तहत नहीं आती। उनके मुताबिक शेयरधारकों को भेजे गए नोटिसों में भी 105 रुपये प्रति शेयर की कीमत का कोई जिक्र नहीं किया गया था।
दूसरी तरफ, आईफ्लेक्स सोल्यूशंस के मामले में उसका अधिग्रहण करने वाली कंपनी, ओरेकल उसके शेयरों को गैर सूचीबध्द नहीं करवा पाई थी। दरअसल, ओरेकल खोजी गई कीमत (डिक्सवर्ड प्राइस) पर राजी नहीं हो सकी थी, जो काफी ज्यादा थी।
सितंबर, 2008 में वेदांता के माल्को का खुद में विलय करने से इनकार करने के बाद उसके शेयरों की कीमत 250 रुपये प्रति शेयर से धड़ाम से 40 रुपये प्रति शेयर पर आ गिरे थे। कंपनी का मालिकाना हक वेदांता समूह के पास ही है।

First Published : March 12, 2009 | 11:32 AM IST