देश की 5 सबसे बड़ी दवा कंपनियों में से एक ल्यूपिन लिमिटेड पिछले 4 साल से 30 फीसदी की दर से विकास कर रही है।
वहीं वित्त वर्ष 208-09 के पहले 9 महीनों में कंपनी के कारोबार में 38 और मुनाफे में 49 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई है। कंपनी की रणनीति के बारे में कंपनी के प्रबंध निदेशक कमल कुमार शर्मा से बात की पी. बी. जयकुमार ने। प्रस्तुत है, बातचीत के प्रमुख अंश :
ल्यूपिन ने पिछले 18 महीनों में 6 कंपनियों का अधिग्रहण किया है। क्या ऐसा अधिग्रहण के खतरों से बचने के लिए किया गया?
हमारे लिए कंपनी का आकार मायने नहीं रखता। नए भौगोलिक क्षेत्रों में प्रवेश करने और नई तकनीक का इस्तेमाल करने के इरादे से ये अधिग्रहण किए गए हैं। हम नहीं मानते कि केवल नियंत्रण के इरादे से ही कंपनी का अधिग्रहण किया जाना चाहिए।
क्योवा का अधिग्रहण इस लिहाज से महत्वपूर्ण था कि इससे हमें जापानी बाजार में उतरने का मौका मिला। जापान में कोई नई कंपनी खड़ा करना आसान नहीं है। वहां दवा निर्माण के मानक भी दुनिया में सबसे ज्यादा सख्त हैं। इस अधिग्रहण से हमें बेहतरीन तकनीक मिल गई। जब से यह सौदा हुआ तब से क्योवा की सालाना विकास दर 21 फीसदी रही।
दवा अनुसंधान और विकास के कार्यक्रमों को देखें, तो इसका अनुसरण कई दवा कंपनियां कर रही हैं। आपका क्या कहना है?
नई दवा के अनुसंधान में बहुत खतरे हैं। इसमें समय भी बहुत लगता है। इन दवाओं के बाजार में आते-आते कई साल लग जाते हैं। पिछले कुछ सालों में हमने अपना अनुसंधान और विकास बजट काफी बढ़ाया है। एक अणु की परीक्षण प्रक्रिया जहां तीसरे चरण में है, वहीं दो अणुओं की परीक्षण प्रक्रिया दूसरे दौर में है। बेहतर परिणाम के लिए अब हम अपने अनुसंधान और विकास गतिविधियों को पनर्गठित कर रहे हैं।
अमेरिका में आपकी रणनीति प्रत्यक्ष तरीके से कारोबार करने की है। आपकी यह रणनीति कितनी मददगार होगी?
अमेरिकी बाजार में हमारा कारोबार 45 फीसदी की दर से बढ़ रहा है। सुप्रैक्स और दूसरे ब्रांडेड पीडियाट्रिक उत्पाद अमेरिका के सबसे ज्यादा बिकने वाले उत्पादों में शामिल हैं। हम जल्द ही कई और उत्पाद लॉन्च करेंगे। जेनरिक कारोबार के विस्तार में हम बहुत संभलकर चल रहे हैं। उम्मीद है कि अगले कुछ साल में हमाारा कारोबार 35 फीसदी की दर से बढ़ेगा।
ल्यूपिन को टीबी निरोधक दवाइयों के लिए जाना जाता है, लेकिन हाल के दिनों में कंपनी अन्य दवाओं पर ध्यान केंद्रित कर रही है। क्या आप टीबी निरोधक दवाइयों से बाहर निकलने की योजना बना रहे हैं?
नहीं, ऐसी बात नहीं है। कंपनी नई पीढ़ी की दवाइयों के विकास में लगी हुई है। कंपनी हाल ही में टीबी के लिए फोर-इन-वन दवाइयों का विकास किया है, जिसे लॉन्च कर दिया गया है। हालांकि यह भी सच है कि हम कारोबार कर रहे हैं।
ऐसे में उन क्षेत्रों पर भी ध्यान देने की जरूरत है, जिससे ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है। जहां तक टीबी की दवाइयों की बात है, तो उसमें हमारा एकछत्र राज है, लेकिन इसका कुल कारोबार कंपनी के सालाना टर्नओवर का मात्र 3 फीसदी है।
भविष्य की क्या योजना है?
हर साल कंपनी अपने विस्तार और विकास पर करीब 300 करोड़ रुपये खर्च करती है। कंपनी इंदौर में ओरल दवाइयों के लिए नया संयंत्र भी लगा रही है। जहां करीब 70 करोड़ रुपये खर्च किया जाना प्रस्तावित है। आने वाले साल में कंपनी अपनी निवेश राशि में 25 फीसदी इजाफा करने की योजना बना रही है।