नियुक्ति के मामले में भारत दुनिया का सबसे अधिक संभावना वाला देश बनकर उभरा है।
कर्मचारी सेवा फर्म मैनपावर ने एक सर्वेक्षण के हवाले से बताया है कि अधिकांश कंपनियों में नियुक्तियां ठप होने के बावजूद अप्रैल-जून की तिमाही जनवरी-मार्च की तिमाही से बेहतर रहेगी।
बहरहाल, मैनपावर का अनुमान है कि अप्रैल से जून की तिमाही में भारत दुनिया में सबसे अधिक नौकरियां देगा। नियुक्तियों की बात करें तो, अब यह आंकड़ा 25 फीसदी का रह गया है। ऐसा इसलिए कि नियोक्ता अपने कर्मचारियों की संख्या मौजूदा स्तर पर ही बनाए रखना चाहते हैं।
गौरतलब है कि जनवरी-मार्च की तिमाही में केवल 19 फीसदी नियोक्ताओं ने नए कर्मचारी नियुक्त किए हैं। सर्वेक्षण के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भारत का हाल सबसे आशावादी होने के बावजूद यह अब तक का दूसरा सबसे खराब अनुमान है।
मैनपावर इंडिया के प्रबंध निदेशक नरेश मल्हाण ने बताया कि यह सर्वेक्षण देश के सात औद्योगिक क्षेत्रों की 3,600 कंपनियों के बीच किया गया। इनमें से 64 फीसदी नियोक्ताओं ने बताया कि वे अभी ‘देखो और इंतजार करो’ की नीति अपना रहे हैं।
मैनपावर का यह सर्वेक्षण कंपनियों की संभावित नियुक्तियों में से संभावित छंटनी को घटाकर तैयार किया गया है। सर्वेक्षण के मुताबिक, मार्च-जून की तिमाही में हालात जनवरी-अप्रैल से थोड़े ही बेहतर होंगे। मल्हाण ने बताया कि इस समय कंपनियां लागतें कम करने में जुटी हैं और इनका गहराई से परीक्षण कर रही हैं।
फिलहाल संगठित क्षेत्र में रोजगार की हालत बहुत खराब है। यदि असंगठित क्षेत्र को भी इसमें शामिल कर लिया जाए तो स्थिति और खराब हो गई है। उल्लेखनीय है कि एशिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर दिसंबर तिमाही में 5.3 फीसदी रही। यह पिछले छह साल में सबसे कम रही।
श्रम मंत्रालय का अनुमान है कि इस अवधि में विभिन्न क्षेत्रों में करीब 5 लाख नौकरियां चली गई। जानकारों के अनुसार, मौजूदा वित्त वर्ष की विकास दर 6 फीसदी से नीचे रही तो इसका मतलब और अधिक बेरोजगारी होगी। खैर, खान और निर्माण क्षेत्रों में सबसे कम नियुक्तियां हुईं। वित्त, बीमा और रियल एस्टेट का नंबर इसके बाद रहा।