कोविड-19 के बाद डिजिटलीकरण की बढ़ी रफ्तार

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 6:02 AM IST

बीएस संवाददाता
विप्रो के साथ साझेदारी में जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) की स्वास्थ्य सेवा इकाई को हाल में उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना के लिए केंद्र सरकार से मंजूरी मिली है। कंपनी डिजिटल प्रौद्योगिकी पर ध्यान केंद्रित करने के साथ ही कोविड-19 के दौर में कुछ प्रमुख विषयों पर गौर कर रही है। जीई दक्षिण एशिया के अध्यक्ष महेश पलशीकर ने ज्योति मुकुल से बातचीत में कहा कि वैश्विक महामारी के कारण पिछले कुछ महीनों के दौरान नई परियोजनाओं के लिए निर्णय लेने के चक्र में तेजी आई है। पेश हैं मुख्य अंश:
पिछला एक साल कैसा रहा? क्या कारोबार कोविड-पूर्व स्तर तक लौट चुका है?
हम काफी हद तक लंबे चक्र की अत्यधिक पूंजी निवेश वाली परियोजना कारोबार में हैं। मार्च और अप्रैल 2020 के दौरान मौजूदा परियोजनाएं प्रभावित हुईं क्योंकि आप लोगों को परियोजना स्थल पर जुटा नहीं सके लेकिन ऊर्जा क्षेत्र में हमारे ग्राहक परियोजना संबंधी निर्णय को भी टाल रहे थे। हालांकि कारोबार होने के कारण निर्णय लेने की प्रक्रिया को छह से नौ महीनों के दौरान रफ्तार मिलने लगी। स्वास्थ्य सेवा कारोबार में हमने देखा कि कोविड-19 से संक्रमित लोगों को उपकरणों की तत्काल आवश्यकता होती है और मांग किसी भी आपूर्ति के मुकाबले अधिक थी। इन उपकरणों में एक्स-रे, सीटी स्कैन सिस्टम, वेंटिलेटर आदि शामिल हैं। हमने वैश्विक और स्थानीय सहयोग से हरसंभव बेहतर करने की कोशिश की। विमानन कारोबार में उड़ानों का संचालन प्रभावित हुआ और अब वह 70 से 80 फीसदी तक सुचारु हो चुका है। सैन्य विमानन कारोबार में हमारे पास दमदार तकनीक है लेकिन लद्दाख में स्थिति को देखते हुए सशस्त्र बलों की प्राथमिकताएं बदल गई हैं लेकिन यह एक एक दीर्घकालिक कारोबार है। हम इन क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करते रहेंगे।

क्या कोविड-19 ने कारोबार की प्रकृति को बदल दिया है?
कुछ चीजें पहले से ही मौजूद थीं लेकिन अब उनमें तेजी दिख रही है। डिजिटल एवं रिमोट स्वास्थ्य सेवा समाधान उनमें प्रमुख है। यह सरकार, अस्पतालों और यहां तक ??कि आम लोगों के लिए भी एक प्राथमिकता बन गई है। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां हमारे पास कई पेशकश हैं। सरकार ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ध्यान दे रही है जिससे इसे बल मिला है। हमारे पास बेंगलूरु में एक टीम है जो न केवल भारत में बल्कि वैश्विक स्तर पर डिजिटल स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराती है। हमारे पास एडिसन एक्स प्लेटफॉर्म है जो अगली पीढ़ी के डिजिटल समाधानों पर केंद्रित है। एक अन्य चीज जो सामने दिख रहा है वह है अक्षय ऊर्जा एवं स्वच्छ ऊर्जा में तेजी। आमतौर पर पारंपरिक ऊर्जा में जोखिम पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हम संभवत: एकमात्र ऐसी कंपनी है जो बिजली उत्पादन एवं वितरण के सभी ईंधन विकल्पों को प्रस्तुत करते हैं। हमारे पास छह काफी दमदार कारोबार हैं जो ऊर्जा में बदलाव और कार्बन उत्सर्जन को प्रबंधित करते हैं। विमानन क्षेत्र में उड़ान के भविष्य में काफी बदलाव आया है।

सरकार की उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजना कितनी अच्छी है और आपकी किस इकाई को इसकी मंजूरी मिली है?
जीई हेल्थकेयर भारत में तीन विश्वस्तरीय विनिर्माण संयंत्रों का परिचालन पहले से ही करती है। पीएलआई योजना चिकित्सा उपकरण जैसे महत्त्वपूर्ण उद्योग में भारत के लिए आत्मनिर्भरता को बढ़ावा देने का एक शानदार अवसर है। भारतीय स्वास्थ्य सेवा उद्योग आवश्यक चिकित्सा उपकरणों के एक बड़े हिस्से का आयात करता है। पीएलआई के साथ निजी/स्थानीय कंपनियां स्थानीय आपूर्ति शृंखला के साथ अपनी वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ा सकती हैं। विप्रो जीई हेल्थकेयर को औषधि विभाग से पीएलआई की मंजूरी मिली है। विप्रो जीई हेल्थकेयर भारत में एक नई चिकित्सा उपकरण विनिर्माण संयंत्र स्थापित करने पर अगले तीन से चार वर्षों के दौरान 100 करोड़ रुपये के निवेश की योजना बना रही है।

विभिन्न श्रेणियों में डिजिटलीकरण कितना महत्त्वपूर्ण होगा? क्या भारत जैसे कीमत को लेकर संवेदनशील बाजार में तकनीक की खपत पर्याप्त रहेगी?
हमारी हरेक कारोबारी पेशकश की अपनी डिजिटल यात्रा है लेकिन कोविड-19 के बाद उसकी रफ्तार बढ़ी है। अक्षय ऊर्जा क्षेत्र इसे शानदार तरीके से अपनाया गया है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में भी उसे रफ्तार मिल रही है। विमानन में दो अलग-अलग पहलू हैं। पहला प्रौद्योगिकी और दूसरा परिसंपत्तियों को कुशलतापूर्वक कैसे प्रबंधित करने के बारे में। इस क्षेत्र में डिजिटल यात्री समाधान भी विकसित हो रहे हैं।

First Published : April 12, 2021 | 12:23 AM IST