मंदी की मार से आईआईएम की नींद हराम

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 7:28 PM IST

मंदी की मार से तो अब प्रतिष्ठित भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) की भी नींद हराम होने लगी है। इसलिए वह अपनी प्लेसमेंट रणनीति में बदलाव कर रही है।
इसके लिए डे-जीरो (प्लेसमेंट शुरू होने वाले दिन) को लेकर मौजूद चिंता को खत्म करने और प्लेसमेंट फीस में कटौती की सोची जा रही है। डे-जीरो की जगह पर संस्थान प्लेसमेंट की प्रक्रिया को पूरे एक हफ्ते या पखवाड़े तक फैलाने की सोच रहे हैं।
आईआईएम- अहमदाबाद के निदेशक समीर बरुआ ने बताया कि, ‘हम अपनी पूरी प्लेसमेंट की प्रक्रिया में बदलाव करने की सोच रहे हैं। इसमें हम डे-जीरो की रणनीति में भी फेरबदल करने के बारे में विचार कर रहे हैं। साथ ही, हम कंपनियों के साथ लंबे रिश्ते बनाने के तरीकों के बारे में भी सोच-विचार कर रहे हैं। अब तक तो हम सिर्फ एक छोटे से सेगमेंट पर ही अपना ध्यान केंद्रित करते आए थे।’
अभी पिछले हफ्ते ही आईआईएम-ए की प्लेसमेंट पूरी हुई है। इस बार संस्थान के छात्रों की सैलरी में पिछले बार ऑफर किए पैकेज की तुलना में 32 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है। आईआईएम- बेंगलुरु और आईआईएम-कोलकाता में भी प्लेसमेंट का काम पूरा हो चुका है।
इनके आंकड़े मंगलवार को जारी किए जाएंगे। आईआईएम बेंगलुरु (आईआईएम, बी) ने भी कहा है कि वह भी अपनी प्लेसमेंट प्रक्रिया में अगले कुछ दिनों में फेरबदल करेगी। आईआईएम बी के प्लेसमेंट अध्यक्ष प्रोफेसर सौरव मुखर्जी का कहना है, ‘हम इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ हैं कि प्लेसमेंट की मौजूदा व्यवस्था में कई खामियां हैं। लेकिन बाकी व्यवस्थाओं के मुकाबले इस प्रक्रिया में खामियां काफी कम हैं।’
संस्थान ने अपने प्लेसमेंट सेल का नाम बदलकर ‘कैरियर डेवलपमेंट ऐंड प्लेसमेंट सेल’ करने का फैसला किया है। साथ ही, इसके लिए एक नए शख्स को भी चुनने का फैसला किया है, जिसका काम ही इस क्षेत्र में काम करना और कंपनियों के साथ संबंधों को मजबूत करना होगा।
सभी आईआईएम ने एक तर्कसंगत प्लेसमेंट फीस को तय करने का भी फैसला किया है । इस वक्त आईआईएम दो स्तर पर कंपनियों से फीस वसूलते हैं। पहला जब वे प्लेसमेंट में हिस्सा लेती हैं और दूसरा जब वे छात्रों को नौकरी देती हैं।
इस साल अलग-अलग सेक्टरों की कई घरेलू और विदेशी कंपनियों ने संस्थानों से इस फीस को माफ या कम करने का अनुरोध किया था। संस्थानों का कहना है कि वे यह फीस इसलिए वसूलती हैं, ताकि वजीफे और दूसरी शैक्षणिक जरूरतों को पूरा किया जा सके।
प्लेसमेंट की जुगत
डे-जीरो से जुड़ी चिंताओं को खत्म करने पर है जोर
सरकारी कंपनियों को लुभाने के लिए नई रणनीति
कंपनियों से बनाए जाएंगे दीर्घकालिक रिश्ते

First Published : March 10, 2009 | 4:39 PM IST