शिवालिक को लेकर फिर जगी उम्मीदें

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 10, 2022 | 9:19 PM IST

भारत का नया स्टेल्थ युध्दपोत, आईएनएस शिवालिक, के लिए उम्मीद की किरणें एक बार फिर से जगमगा रही हैं।
12 मार्च को अमेरिकी सरकार ने जनरल इलेक्ट्रिक (जीई) को दो एलएम 2500 गैस टरबाइन इंजन पर काम फिर से शुरू करने की इजाजत दे दी। इस युध्दपोत को इन्हीं इंजनों से ताकत मिलेगी।
छह मार्च को ‘बिजनेस स्टैंडर्ड’ ने खबर दी थी कि इस जहाज का निर्माण ठप पड़ गया है क्योंकि अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने जीई से इस बाबत सारे काम रोक देने को कहा था। मझगांव डॉक लि. (एमडीएल) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक वाइस एडमिरल एचएस माल्ही ने इस खबर की पुष्टि की है। आईएनएस शिवालिक यही कंपनी बना रही है।
उन्होंने बताया कि, ‘यह मामला सुलझ गया है। जीई ने हमें बताया है कि उसे इसके लिए अमेरिकी सरकार की सहमति हासिल हो गई है। पहले जीई ने हमें बताया था कि इस इजाजत को हासिल करने में तीन-चार महीनों का वक्त लग सकता है, लेकिन अमेरिकी सरकार ने इसे जल्दी पास कर दिया।’
दरअसल, इसमें इतनी देर इसलिए हुई क्योंकि अमेरिकी विदेश मंत्रालय की हथियारों के निर्यात के लिए इजाजत देने की प्रक्रिया काफी जटिल है। उद्योग सूत्रों के मुताबिक एलएम 2500 गैस टरबाइन का इस्तेमाल कारोबारी और सैनिक, दोनों जरूरतों के लिए किया जा सकता है। इसी वजह से इसे अमेरिकी सरकार की हथियार सूची में शामिल नहीं किया गया है।
इसलिए इसके वास्ते विदेश मंत्रालय के डाइरेक्टरेट ऑफ डिफेंस टे्रड कंट्रोल्स (डीडीटीसी) से निर्यात लाइसेंस की जरूरत भी नहीं होती है। चूंकि इसका इस्तेमाल यहां एक युध्दपोत में किया जाना था, इसलिए यहां यह सैनिक जरूरतों को पूरा करता। इसी वास्ते विदेश मंत्रालय से कंपनी को तकनीकी सहायता समझौते (टीएए) की जरूरत थी। यह 12 मार्च को हो पाया। इसके बाद ही कंपनी ने शिवालिक पर फिर से काम करना शुरू किया।
यूएस-इंडिया बिजनेस कॉउन्सिल (यूएसआईबीसी) के निखिल खन्ना ने भी बताया कि, ‘जीई को विदेश मंत्रालय से टीएए हासिल करना था, जो उसने कर लिया। इसके तहत कुछ आसान सी प्रक्रियाओं को पूरा करना था। हमें पूरा भरोसा और गर्व है कि भारत के इस अत्याधुनिक स्टेल्थ जहाज को ताकत जीई के इंजनों से मिलेगी।’
जीई ने भी रक्षा उद्योग की पत्रिका ‘जेन’ को बताया है कि, ‘हम भारतीय नौसेना को उसके नए जहाजों के लिए एलएम 2500 गैस टरबाइन देना जारी रखेंगे, जिसके लिए किसी निर्यात लाइसेंस की जरूरत नहीं है। इस हफ्ते कंपनी ने अमेरिकी विदेश मंत्रालय से ऐसा लाइसेंस हासिल किया है, जिसके तहत हम इससे जुड़ी तरकरीबन सारी सुविधाओं को मुहैया करवा सकते हैं।’
इस देरी की वजह से एमडीएल अब काम को वक्त पर पूरा करने के लिए भरसक कोशिश कर रहा है, ताकि मानसून के पहुंचने से पहले शिवालिक को तैयार किया जा सके। मानसून में इस जहाज का परीक्षण करना लगभग नामुमकिन होगा।
वाइस एडमिरल माल्ही ने बताया कि, ‘जो वक्त गुजर चुका है, उसे वापस नहीं हासिल किया जा सकता है। हमें जनवरी के मध्य तक इन इंजनों की जरूरत थी, लेकिन अब यह हमें मार्च के अंत तक मिल पाएंगे। इस हिसाब से हमारे हाथों से दो महीने का वक्त निकल चुका है। मुझे उम्मीद है कि जीई तेजी से काम पूरा करके इस देरी को कम से कम रखने की कोशिश करेगा।’
वैसे, अमेरिकी उद्योग जगत इस मामले को लेकर मचे हो-हल्ले से काफी नाखुश है। सूत्रों का कहना है कि, ‘दरअसल, यह वक्त लॉकहीड सी-130जे सौदे और बोइंग वीवीआईपी जेट्स के सौदे को लेकर जश्न मनाने का है।
साथ ही, अभी हाल ही में भारत और अमेरिका के बीच का अब तक का सबसे बड़ा रक्षा सौदा हुआ। इसके तहत भारतीय नौसेना ने 2.2 अरब डॉलर में बोइंग पी-8आई टोही विमान खरीदे हैं। भारत इस विमान का पहला अंतरराष्ट्रीय खरीदार है। यह वाकई एक बड़ी बात है।’

First Published : March 25, 2009 | 12:11 PM IST