हैवेल्स: लॉयड से नहीं मिली वृद्धि को रफ्तार

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 15, 2022 | 3:09 AM IST

हैवेल्स इंडिया ने भारत की व्यापार नीति में मेक इन इंडिया पर जोर के बल पर अपनी उपभोक्ता इकाई लॉयड को रफ्तार देने की कोशिश कर रही है। कंपनी देश के एयर कंडिशनिंग, एलईडी टीवी और वॉशिंग मशीन बाजार की छोटी खिलाड़ी रही है लेकिन पिछले दो वर्षों के दौरान एयर कंडिशनिंग जैसे उपभोक्ता वस्तुओं के अयात की राह में शुल्क संबंधी बाधाओं के बीच कंपनी की बाजार हिस्सेदारी बढऩे की उम्मीद है।
कंपनी ने एक बयान में कहा, ‘हमने एयर कंडिशनर के लिए अपना एक नया विनिर्माण संयंत्र चालू किया है जिससे हमें काफी मदद मिलेगी।’ हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी के कंज्यूमर ड्यूरेबल्स कारोबार के लिए आगे की राह आसान नहीं है क्योंकि इस श्रेणी में तमाम बहुराष्ट्रीय कंपनियां मौजूद हैं और इसमें व्यापक प्रौद्योगिकी की जरूरत होती है।
एक उद्योग विशेषज्ञ ने कहा, ‘कंपनी अपनी वित्तीय सफलता का श्रेय स्विचगियर, वायर एवं केबल, फैन और मोटर जैसी सीमित प्रतिस्पर्धा एवं अधिक मार्जिन वाली श्रेणियों में अपनी दमदार स्थिति को देती है। लेकिन एसी, टीवी एवं अन्य कंज्यूमर अप्लायंस जैसी नई श्रेणियों में मार्जिन काफी कम है और हैवेल्स को प्रमुख वैश्विक कंपनियों से सीधी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है।’
हैवेल्स ने फरवरी 2016 में लॉयड कंज्यूमर के कारोबार का अधिग्रहण किया था ताकि उसे अपने उपभोक्ता उत्पाद पोर्टफोलियो को पूरा करने में मदद मिल सके। हैवेल्स ने अपने पंखा कारोबार के साथ इस सफर की शुरुआत 2003 में की थी।
अधिग्रहण के समय लॉयड एयर कंडिशनिंग, वॉशिंग मशीन और एलईडी टीवी श्रेणी में मौजूद थी। हैवेल्स का कहना है कि अब उसके उत्पाद देश के खास मकानों में 70 फीसदी से अधिक शॉकेट की जरूरतों को पूरा करता है जो उद्योग का सबसे व्यापक उत्पाद शृंखला है।
हालांकि इस अधिग्रहण से हैवेल्स की वृद्धि को रफ्तार नहीं मिल पाई। कंपनी ने दो दशक तक लगातार वृद्धि दर्ज करने के बाद वित्त वर्ष 2020 में पहली बार राजस्व और मुनाफे में गिरावट दर्ज की है। उसकी बिक्री में 6.3 फीसदी की कमी आई जबकि कर बाद मुनाफे में 21.3 फीसदी की गिरावट जर्द की गई। वित्त वर्ष 2020 में लॉयड इकाई से प्राप्त राजस्व में 14.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। जबकि वोल्टास और ब्लू स्टार जैसी प्रतिस्पर्धी कंपनियों ने वृद्धि दर्ज की।
कंपनी ने कमजोर वित्तीय प्रदर्शन की मुख्य वजह कोरोना वैश्विक महामारी और लॉकडाउन को बताया है। कंपनी ने कहा, ‘पंखे, कूलर और एयर कंडिशनर की बिक्री के लिहाज से फरवरी से लेकर अप्रैल तक की अवधि हमारे लिए पीक सीजन होती है। लेकिन लॉकडाउन के कारण हमारी गर्मी की बिक्री को जबरस्त झटका लगा।’लेकिन विश्लेष इससे सहमत नहीं है।
प्रभुदास लीलाधर के अमनीश अग्रवाल ने कहा, ‘स्विचगियर, वायर एवं केबल और लाइटिंग जैसी हैवेल्स की प्रमुख श्रेणियों में वित्त वर्ष 2019 में वृद्धि दर्ज करने के लिए उसमें गिरावट दर्ज की गई। रियल एस्टेट में नरमी, कमजोर उपभोक्ता धारणा और बढ़ती प्रतिस्पर्धा से कंपनी के उत्पादों की बिक्री को झटका लगा।’
 
दिसंबर 2019 तिमाही में कंपनी की शुद्ध बिक्री में सालाना आधार पर 10 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई जो पिछले 15 वर्षों में उसकी सबसे बड़ी गिरावट थी। उसके बाद से ही कंपनी के उत्पादों की बिक्री में गिरावट जारी है।

First Published : August 21, 2020 | 12:09 AM IST