नकदी की किल्लत से जूझ रही रिटेल कंपनी सुभिक्षा चाहे या न चाहे, उसकी कमान तो आईसीआईसीआई वेंचर के हाथ में ही रहेगी।
दरअसल सुभिक्षा के संस्थापक और प्रबंध निदेशक आर सुब्रमण्यन के साथ कंपनी का गोल्डन शेयर समझौता है, जिसके तहत आईसीआईसीआई वेंचर की हिस्सेदारी 2 फीसदी रह जाने पर भी प्रबंधन उसके पास ही रहेगा।
सुब्रमण्यन ने बताया कि हिस्सेदारी समझौते के तहत आईसीआईसीआई वेंचर की जब तक कंपनी में कम से कम 2 फीसदी हिस्सेदारी है, तब तक लगाम वही थामेगी।
कुल मिलाकर हालात यह हैं कि रोजमर्रा के कामकाज का जिम्मा प्रबंध निदेशक यानी सुब्रमण्यन के सिर है और मामूली सी हिस्सेदारी होने पर भी आईसीआईसीआई वेंचर कंपनी की सर्वेसर्वा है।
आईसीआईसीआई वेंचर के प्रवक्ता ने इस मसले पर कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। उसके पास सुभिक्षा में 23 फीसदी हिस्सेदारी है। उसने 2000 में कंपनी में 10 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी थी।
2004 में उसने अतिरिक्त शेयर खरीदे, जिनकी वजह से ये अधिकार उसके पास तब तक रहेंगे, जब तक वह 2 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखती है। इन अधिकारों में सुभिक्षा के बोर्ड सदस्यों की नियुक्ति भी शामिल है। ऑडिटर नियुक्त करना भी आईसीआईसीआई वेंचर का ही अधिकार है।
विलय पर तरेरीं आंखें
नकदी के संकट से जूझ रही सुभिक्षा की ब्लू ग्रीन कंस्ट्रक्शंस के साथ विलय की योजनाओं पर पर कंपनी के निवेशक और फाइनैंसर पलीता लगा सकते हैं।
आईसीआईसीआई वेंचर, प्रेमजी इन्वेस्ट और एक अन्य फाइनैंसर इस योजना पर अपनी आंखें तरेर रहे हैं।
सुब्रमण्यन का कहना है कि विलय की योजना पर पहले इन सभी की सहमति थी लेकिन अब निवेशक ही इसको लेकर सवाल उठा रहे हैं।