आर्थिक मंदी के दौर में सरकारी कंपनी टेलीकम्युनिकेशंस कंसल्टेंट्स इंडिया लिमिटेड (टीसीआईएल) की भारती हेक्साकॉम में अपनी 30 फीसदी हिस्सेदारी बेचने पर आर्थिक मामलों के विभाग (डीईए) ने आपत्ति जताई है।
डीईए के मुताबिक, मंदी के चलते टीसीआईएल इस विनिवेश से वाजिब कीमत पाने में नाकाम रह सकती है। भारती हेक्साकॉम भारती एयरटेल और टीसीआईएल का संयुक्त उपक्रम है। इसमें टीसीआईएल के 30 फीसदी और भारती एयरटेल के 70 फीसदी शेयर हैं।
विभाग ने यह आशंका आर्थिक संकट के चलते जताई है। उसके मुताबिक, ”ऐसा करने के पीछे चाहे कोई भी वजह हो, लेकिन टीसीआईएल का हेक्साकॉम में अभी अपनी हिस्सेदारी बेचने का निर्णय सही नहीं है।” इसलिए डीईए ने दूरसंचार विभाग को सलाह दी है कि अभी वे केवल हिस्सेदारी बिक्री के लिए आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति से सैद्धांतिक मंजूरी ले लें।
डीईए के मुताबिक, विनिवेश की वास्तविक प्रक्रिया का निश्चय बाद में दूरसंचार विभाग और उसके बीच बातचीत के बाद तय किया जाना चाहिए। टीसीआईएल इस संयुक्त उपक्रम से बीते दो साल से निकलना चाह रही है। टीसीआईएल जहां चाह रही है कि कंपनी उसके प्रस्ताव को मान ले, वहीं भारती एयरटेल इस प्रस्ताव को खारिज कर चुकी है।
टीसीआईएल अब अपना फोकस मोबाइल सेवा की बजाय केवल दूरसंचार की बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने पर ही रखना चाहती है। हालांकि सरकार इस प्रस्ताव के खिलाफ थी। टीसीआईएल देश और विदेश में अपनी सेवाएं देती है।
यह कंपनी इसके अलावा भवन और सड़क भी बना रही है। भारती एयरटेल भी टीसीआईएल के लाभांश भुगतान के प्रस्ताव को खारिज कर चुकी है। एयरटेल का तर्क है कि कंपनी अपने सभी अर्जित राजस्व का निवेश कंपनी के विकास पर कर देती है।